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हरियाणा में खनन ने मोड़ दी नदी की धारा

Posted On November - 27 - 2019

ट्रिब्यून न्यूज सर्विस
चंडीगढ़, 26 नवंबर
हरियाणा में ‘खनन माफिया’ ने इस कदर नदियों का दोहन किया कि उनका बहाव ही बदल गया। मंगलवार को विधानसभा के विशेष अधिवेशन में सदन पटल पर रखी गई कैग रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया। कैग का अनुमान है कि विभाग की लापरवाही की वजह से 1476 करोड़ रुपये की चपत सरकार को लगी है।
बेशक कैग रिपोर्ट में किसी नदी का नाम नहीं है, लेकिन माना जा रहा है कि माइनिंग का यह खेल यमुना नदी में हुआ है। माइनिंग में घोटालों के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। कैग द्वारा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाने के साथ-साथ कहा गया है कि ठेकेदारों ने इतनी मनमानी की कि नदी का प्रवाह ही बदल गया। ठेकेदारों पर आरोप हैं कि उन्होंने चयनित साइट्स के बजाय उन जगहों से माइनिंग की, जिसकी उन्हें इजाजत ही नहीं थी।
कैग ने यह भी खुलासा किया है कि स्टोर क्रशर चलाने के लाइसेंस के नवीनीकरण में देरी, ईंट-भट्ठा मालिकों से रॉयल्टी, अतिरिक्त रॉयल्टी और उस पर ब्याज की कम वसूली हुई। कई मामलों में पैसे की रिकवरी की नहीं हुई। इस वजह से 1476 करोड़ 21 लाख रुपये की नुकसान सरकार को हुआ। ठेकेदारों के प्रति भी सरकार का रवैया बड़ा लचीला रहा। विभाग ने खदान और खनिज विकास एवं पुनर्वास निधि में 49 करोड़ 30 लाख रुपये नहीं जमा करवाने वाले 48 ठेकेदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। इन ठेकेदारों के खिलाफ 17 करोड़ 44 लाख रुपये बकाया था। इसी तरह से टेंडर (संविदा) राशि जमा नहीं करवाने वाले 84 में से 69 ठेकेदारों के खिलाफ भी कोई एक्शन नहीं हुआ। इन ठेकेदारों पर 347 करोड़ रुपये बकाया रहे।

अपने हिस्से का पैसा भी नहीं कराया जमा
बताया गया कि सरकार ने खदान और खनिज विकास, पुनरोद्धार पुनर्वास निधि में अपने हिस्से के 17 करोड़ 70 लाख रुपये भी जमा नहीं करवाये। कैग रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि 2016-17 के दौरान माल ढोने वाले 1584 वाहन मालिकों ने माल कर जमा नहीं कराया। इनसे 1 करोड़ 62 लाख रुपये की वसूली नहीं हुई। इन लोगों पर 61 लाख 33 हजार रुपये का ब्याज भी बकाया था। माल ढोने वाले 1305 वाहन मालिकों ने 2015-16 व 2016-17 के दौरान टोकन टैक्स जमा नहीं कराया। इससे 18 करोड़ 42 लाख रुपये की वसूली नहीं हुई। इन पर 36 लाख 84 हजार रुपये की पेनल्टी भी बकाया थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि 4139 ईंट-भट्ठा मालिकों में से 181 मामलों में रॉयल्टी एवं अतिरिक्त रॉयल्टी के तौर पर 53 लाख रुपये जमा नहीं कराए। इन पर 24 लाख रुपये ब्याज भी बकाया था।


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