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सिल्वर स्क्रीन

Posted On November - 9 - 2019

ए. चक्रवर्ती

क्यों हैं परेशान नवाज़ुद्दीन
इधर अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी का फिल्म करिअर एक नयी करवट बदल रहा है। जिसके चलते मात्र कुछ हजार में काम करने वाले नवाज़ अब करोड़ों की फीस ले रहे हैं। खासतौर से पिछले तीन साल में लगभग हर साल उनकी चार-पांच फिल्में रिलीज़ हो रही हैं। वैसे नवाज़ रुटीन टाइप के किरदार कम ही करते हैं, इसलिए उनके जैसे मजबूत एक्टर के लिए साल में पांच-छह फिल्में कर लेना एक सामान्य-सी बात है। ऐसे में एक सहज-सी जिज्ञासा उत्पन्न होती है कि क्या इतनी मान-प्रतिष्ठा के चलते कहीं नवाज़ भी भौतिक सुख के आदी तो नहीं हो गए हैं? नवाज ऐसे किसी सवाल को सिरे से खारिज़ कर देते हैं। वह बताते हैं, ‘इसका तो सवाल ही नहीं है। मैं मानता हूं कि बीस साल पहले मैं महज़ दो या ढाई हजार लेकर यहां आया था। मैं इस बात को कभी नहीं भूल सकता कि मैं बहुत कष्ट उठाने के बाद इस जगह पर पहुंचा हूं। और यही बातें मुझे हमेशा अपनी ज़मीन पर खड़ा रखती हैं। बस, मुझे एक ही आपत्ति है, मेरी फीस को लेकर आप लोग कुछ ज्यादा ही गणना करने लगे हैं। मैं रुपए के अंक में नहीं जा रहा हूं। पर इतना ज़रूर कहूंगा कि अब तक कि मेरी यात्रा एक सपने की तरह थी। उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव में मेरा जन्म हआ। आठ भाई-बहनों में मैं सबसे बड़ा हूं। गांव से दिल्ली के नेशनल स्कूल आॅफ ड्रामा में भर्ती होने के लिए चला गया। गांव वालों ने तो समझा मैं पागल हो गया हूं। पर मेरा परिवार हमेशा मेरे साथ खड़ा था। ‘ फिल्म ठाकरे में उनकी धमाकेदार एंट्री के बाद से यही कहा जा रहा है कि उन्होंने बाॅलीवुड की कुछ स्टीरियोटाइप धारणा को तोड़ दिया है? वह बताते हैं, ‘मैं मानता हूं कि मैं नंदिता की मंटो के साथ-साथ साजिद भाई की शुद्ध मसाला फिल्म हाउसफुल-4 भी आराम से कर लेता हूं। ऐसे में यह सुनकर अच्छा लगा कि लोग इस बारे में अच्छा सोचते हैं। लेकिन अब मैं कुछ और बनी-बनाई धारणा को तोड़ना चाहता हूं।

किंग खान की यादें
वह किंग खान है। हाल ही में उन्होंने अपना जन्मदिन बहुत खामोशी से मनाया। उनसे जुड़ी बातों और गाॅसिप का कोई अंत नहीं। अपने माता-माता से जुड़ी यादों को वह अक्सर बयां करते हैं। वह कहते हैं, ‘माता-पिता से जुड़ी यादों को बयां करूं तो मुझे एक किताब लिखनी पड़ेगी। मेरे पिता स्वतंत्रता सेनानी थे। पापा से शहीद खुदीराम बोस की कहानी सुनी है। उनकी कहानी सुनाते समय पापा बहुत उत्तेजित हो जाते थे। मात्र 19 साल की उम्र में खुदीराम देश के लिए फांसी पर चढ़ गये। देश के प्रति वचनबद्धता क्या होती है, यह मैंने पापा से सीखा है। 1981 में जब पापा की मृत्यु हुई, मैं बहुत छोटा था। पापा की मृत्यु के बाद मां ने अकेले दम पर हम दोनों बच्चों का लालन-पालन किया। मेरे अभिनय के शौक से मम्मी-पापा दोनों ही वाकिफ थे। पापा के इंतकाल के बाद मेरे इस शौक को मां ने हमेशा प्रोत्साहित किया। बाद में मेरे कुछेक प्ले और मेरे पहले टीवी सीरियल फौजी को मां ने देखा था। लेकिन बतौर हीरो वह मेरी कोई फिल्म नहीं देख पायी। यह बात हमेशा मुझे कचोटती है।’

मशगूल इलियाना
अभिनेत्री इलियाना डिक्रूज़ एक बार फिर अपनी नयी फिल्म पागलपंती की वजह से चर्चा में है। उनकी एक और फिल्म ‘द बिग बुल’ की शूटिंग चल रही है। इसमें अभिषेक बच्चन उनके हीरो हैं। पिछले दिनों उनकी बीमारी और आस्ट्रेलिया के फोटोग्राफर एन्ड्रयू निबोन के साथ ब्रेक-अप को लेकर काफी गाॅसिप उड़ती रही है। मगर अभिनेत्री इलियाना ने किसी के बारे में ज्यादा बयानबाज़ी नहीं की। हमेशा की तरह उन्होंने फिर सबका मुंह यह कह कर बंद कर दिया कि वह अपनी पर्सनल लाइफ के बारे में किसी से डिस्कस नहीं करना चाहती। वैसे इलियाना अपने फिल्म करिअर को लेकर बहुत गंभीर है। हालांकि वह आज भी हिंदी फिल्मों की चर्चित नाम नहीं बन सकी है। ज्यादातर क्रिटिक इसकी एक बड़ी वजह उनके वर्किंग स्टाइल को भी मानते हैं। उनके मुताबिक वह कभी भी बाॅलीवुड में अपने करिअर की गेम प्लानिंग अच्छी तरह से नहीं कर पाई। वरना साउथ की फिल्मों की बात जानें दें तो हिंदी फिल्मों में भी उन्हें मैं तेरा हीरो, रुस्तम, मुबारकां, बादशाहो, रेड जैसी कई हिट फिल्मों का सहारा मिला है। इलियाना कहती हैं—यह गेम प्लानिंग क्या होती है, मुझे नहीं पता है। और न ही मैं ऐसी बातों में उलझना चाहती हूं। बर्फी से लेकर पागलपंती तक मेरे पास जो भी अच्छा काम आता रहा है, मैं उसे अच्छी तरह से अंजाम देती रही, आज भी साउथ की फिल्में नियमित तौर पर कर रही हूं।’
फैशन मैगजीन में उनके फिगर की बहुत चर्चा होती है। वह कहती हैं—इसके लिए मैं अपने गाॅड गिफ्टेड फिगर की शुक्रगुजार हूं।

अक्षय भी बिगड़ जाते हैं
पिछले दिनों हुई एक मुलाकात के दौरान अभिनेता अक्षय कुमार ने इस संवाददाता से कहा था कि गंभीर सब्जेक्ट वाली फिल्मों से थोड़ा मूड बदलने के लिए वह बीच-बीच में एकाध हल्की-फुल्की फिल्म भी कर लेते हैं। तब उनकी यह बात बहुत अटपटी नहीं लगी थी। लेकिन उनकी लाइट फिल्म ‘हाउसफुल-4’ से ऐसी उम्मीद हरगिज़ नहीं थी। अब इस फिल्म के संदर्भ में उनकी जो बुराई हो रही है, इस बारे में मीडिया के किसी भी सवाल से अक्षय बच रहे हैं।
अक्षय मानते हैं कि फिल्मों के चयन के मामले में एकाध-बार उनसे भी चूक हो जाती है। न ही वह ऐसी कोई गारंटी देते हैं कि आगे उनसे ऐसी चूक नहीं होगी। पर वह इस बात को बार-बार दोहराते हैं कि पहले की तुलना में वह अब अपनी फिल्मों के सब्जेक्ट और स्कि्रप्ट पर बहुत ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। अब वह खेल पर बेस्ड कोई फिल्म करना चाहते हैं। वैसे वह अपने प्रोडक्शन से एथलीट हिमा दास पर भी एक फिल्म बनाना चाहते हैं। वह कहते हैं—रियल लाइफ स्टोरी के प्रति मेरा झुकाव कुछ ज्यादा ही है। पर इस बीच रोहित शेट्टी की हल्की-फुल्की फिल्म सूर्यवंशम भी कर ली है।

कंगना का अंदाज़-ए-बयां
इधर वह जिस फिल्म में होती हैं, उसका मुख्य आधार वही होती हैं। मगर मणिकर्णिका,जजमेंटल है क्या जैसी अपनी पिछली फिल्मों की विफलता से अभिनेत्री कंगना रनौत अब बहुत सतर्क हो चुकी है। इन दिनों वह अपनी अगली फिल्म पंगा को लेकर पूरी तरह से मशगूल हैं। जनवरी में रिलीज़ होने वाली अश्विनी अय्यर तिवारी की इस फिल्म का पोस्ट प्रोडक्शन इन दिनों तेज़ी से चल रहा है। अश्विनी की पहली निर्देशित फिल्म बरेली की बर्फी बहुत पसंद की गई थी। ज़ाहिर है अब उनकी इस फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच एक स्वाभाविक क्रेज़ होगा। वैसे इस क्रेज़ की एक बड़ी वजह कंगना भी है। उनके स्टारडम का आलम यह है कि पंगा में भी एक बहुत अपरिचित से हीरो जस्सी गिल उनके साथ हैं। वैसे भी इधर वह मेल डाॅमिनेट फिल्मों में न के बराबर काम कर रही हैं। खुद कंगना का आत्मप्रशंसित वाक्य होता है—अब बड़े हीरो मेरे साथ काम करने से घबराते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि मैं अपने रोल से तो कोई समझौता करने से रही।
कंगना के स्वभाव का यह बिंदासपन स्टाइल बन चुका है। अपनी किसी फिल्म की विफलता के बाद उनके चेहरे पर कोई शिकन नज़र नहीं आती। यही वजह है कि विभिन्न इंडोर्समेंट तक में उनकी तारीफ होती है। वह बताती है—मैं जम कर खाती हूं। उन्हें तरह के तरह-तरह के परफ्यूम जमा करने का भी शौक है। वह बताती है—कई बार ऐसा भी हुआ है कि मैं यह परफ्यूम लगाए बिना ही घर से बाहर निकल गई लेकिन इसे लगाने के लिए फिर आधे रास्ते से ही लौट आई हूं।

फिटनेस फ्रीक हैं अथिया
अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी के साथ उनकी फिल्म मोतीचूर- चकनाचूर जल्द रिलीज़ होगी। अनीस बज्मी की फिल्म मुबारकां के बाद अभिनेत्री अथिया शेट्टी के लिए यह एक बड़ी उम्मीद है। असल में उनकी पहली फिल्म के हीरो ने उनकी उम्मीदें तोड़ी थी, मगर अनीस बज्मी की फिल्म ने उन्हें थोड़ा संबल दिया है। अथिया इन दिनों बााॅलीवुड का एक जाना -पहचाना नाम है। वह कहती है—नए डायरेक्टर देवमित्रा विस्वाल की मोतीचूर चकनाचूर बहुत अच्छी बनी है। असल में नवाज़ जैसे उम्दा एक्टर के साथ काम करने से आपका आत्मविश्वास बहुत बढ़ता है। मुझे लगता है कि पहली फिल्म में ही उनके साथ मेरी अच्छी केमिस्ट्री अच्छी जमी है। इसके अलावा मैं एक पंजाबी फिल्म भी कर रही हूं। इसकी शूटिंग भी जल्द पूरी हो जाएगी।’ अपनी फिटनेस को लेकर बेहद सजग सुनील शेट्टी की बेटी अथिया ने फिटनेस के मामले में अपने पिता को ही फाॅलो किया है। वह बताती हैं— मैं जिम में जाकर हर दिन एब्स, काडिओ और वेट ट्रेनिंग करती हूं। योग के कुछ आसान भी लगभग रोज़ करती हूं। फिर रनिंग, वॉकिंग और साइकलिंग भी हर दूसरे दिन करने की कोशिश  करती हूं।


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