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‘समान नागरिक संहिता’ पर नहीं होनी चाहिए आपत्ति’

Posted On November - 24 - 2019

नयी दिल्ली, 23 नवंबर (एजेंसी)
सुप्रीमकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस पीसी पंत ने शनिवार को कहा कि भारत के लिये ‘समान नागरिक संहिता’ पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने इसके लिये यह दलील दी कि विशेष विवाह अधिनियम या ब्रिटिश शासन द्वारा लागू किये गये उन कानूनों पर कोई आपत्ति नहीं है, जो हर किसी पर लागू होते हैं, चाहे वे किसी भी धर्म के क्यों न हो।
पंत ने कहा कि शिक्षा के माध्यम से समान संहिता की जरूरत के बारे में जागरूकता फैलाना समान नागरिक संहिता को स्वीकार करने में लोगों के दृष्टिकोण को व्यापक बनाने में एक अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने ‘भारतीय नागरिक संहिता-सभी भारतीयों के लिये समान नागरिक कानून’ विषय पर आयोजित एक सेमिनार में यह कहा। पटना उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आईए अंसारी और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति जेडयू खान ने भी कार्यक्रम में अपने विचार रखे। न्यायमूर्ति अंसारी ने कहा कि नागरिक कानूनों में एकरूपता एक स्वागत योग्य कदम है। लोगों को इसकी पड़ताल करनी चाहिए कि उनके खुद के पर्सनल लॉ में क्या बदलाव किये जा सकते हैं-जैसे कि उत्तराधिकार में मुस्लिम महिलाओं का हिस्सा मौजूदा एक तिहाई से बढ़ा कर आधा करना।


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