एकदा !    जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग खुला !    वैले पार्किंग से वाहन चोरी होने पर होटल जिम्मेदार !    दिल्ली फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 32 गिरफ्तार !    हाईवे फास्टैग टोल के लिये अधिकारी तैनात होंगे !    अखनूर में आईईडी ब्लास्ट में जवान शहीद !    बीरेंद्र सिंह का राज्यसभा से इस्तीफा !    बदरीनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद !    केटी पेरी, लिपा का शानदार प्रदर्शन !    निर्भया मामला दूसरे जज को भेजने की मांग स्वीकार !    

संघर्ष और विचारों की बाकी अमिट छाप

Posted On November - 7 - 2019

कृष्ण स्वरूप गोरखपुरिया

रण सिंह मान

हरियाणा में जब कभी किसी बहुआयामी व्यक्तित्व की चर्चा होगी तो कामरेड कृष्ण स्वरूप गोरखपुरिया जरूर याद किये जायेंगे। बेशक उनके जीवन का अधिकांश समय किसानों के लिये संघर्ष में बीता, पर अन्य महत्वपूर्ण विषयों की भी उन्हें गहरी जानकारी थी। किसानों के अलावा, श्रमिक, कर्मचारी, युवा, महिलाओं व राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं, पत्रकारों के शोषण व जुल्मों पर वे खुलकर बोलते थे। अपने शुरुआती दिनों में जब वे कालेज विद्यार्थी थे, तो छात्रों में पैठ बनाई। उन्हें संगठित कर उनकी समस्याओं का निदान किया व हकों के लिए लड़े। उनसे पहला परिचय इन्हीं दिनों में हुआ जब हिसार में हुए एक स्टडी सर्कल में एक साथ भाग लिया। तब से विचार भिन्नता के बावजूद हम एक-दूसरे के संपर्क में रहे। हमेशा पाया कि वे कभी भी अपने विचार दूसरों पर थोपते नहीं थे। एक निपुण तर्कशील विश्लेषक के रूप में दूसरे के दृष्टिकोण को आदर देकर अपनी बात रखना व सहमति जुटाने की जो कला कामरेड कृष्ण स्वरूप में देखी, वह बेमिसाल थी।
वर्ष 1970 में मेरी राजकीय हाई स्कूल बहल (भिवानी) में विज्ञान अध्यापक के पद पर नियुक्ति हुई। वर्ष 1972 में हरियाणा राजकीय अध्यापक संघ का प्रदेश संगठन तभी बनाया गया। इस दौरान कामरेड पृथ्वी सिंह व कृष्ण स्वरूप से बड़ा कर्मचारी आंदोलन खड़ा करने की रूपरेखा पर गहरा मंथन किया गया। वर्ष 1973 में पूरे प्रदेश में मास्टर सोहन लाल जो उस समय हरियाणा राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष थे, की अगुवाई में दिल्ली को केंद्र बनाकर बड़ा आंदोलन हुआ। आंदोलन को सक्रिय समर्थन के कारण कामरेड कृष्ण स्वरूप को जेल जाना पड़ा। उस समय प्रदेश के मुख्यमंत्री चौ. बंसीलाल थे। कामरेड पृथ्वीसिंह व कामरेड कृष्ण स्वरूप ने अध्यापकों के पक्ष में दिल्ली के विभिन्न कर्मचारी संगठनों का समर्थन जुटाने में मदद की।
अध्यापक हड़ताल से पहले हरियाणा के बिजली बोर्ड कर्मचारी संगठन ने भी बड़ा आंदोलन किया था, पर अध्यापक आंदोलन जितना सफल नहीं हो पाया था। इन आंदोलनों से सबक लेकर प्रदेश के विभिन्न कर्मचारियों ने प्रदेश स्तरीय तालमेल कमेटी बनायी, जो आज के सर्वकर्मचारी संघ व कर्मचारी महासंघ का प्रारंभिक स्वरूप था। आम कर्मचारी वामपंथी रुझान के इन साथियों को आज भी आदर भाव से देखता है।
1975 में घोषित आपात‍्काल में वे भूमिगत होकर सरकार की दमनकारी नीतियों के विरोध में सक्रिय रहे। इस दौरान उनके परिवार, खासकर उनके पिता चौ. रणसिंह ने सरकारी दमन का दंश झेला। पर न उनके पिता ने और न कामरेड कृष्ण स्वरूप ने झुकना गवारा किया। हम बहुत बार आपातकाल के खिलाफ प्रचार सामग्री दिल्ली से लेकर हरियाणा में वितरित करते रहे। यहां तक कि उन्हें हिस्ट्री शीटर व दस नम्बरी करार दिया गया। आपातकाल खत्म होने के बाद 1978 में वे अपने गांव के सरपंच निर्वाचित हुए। तब जाकर उनकी दस नम्बरी टूटी। यही नहीं उन्होंने सरकारी नौकरी ठुकराकर किसान के हितों के लिये संघर्ष को अपने जीवन का मिशन बना लिया। इस बीच हिसार टैक्सटाइल्स मिल के श्रमिकों के समर्थन में किसानों को लामबंद किया। पक्के खालों का खर्चा माफ करवाने के लिये उन्होंने कामरेड पृथ्वी सिंह के साथ मिलकर लम्बा आंदोलन चलाया। आगे चलकर चौ. देवीलाल ने अपने मुख्यमंत्रित्वकाल में पक्के खालों का खर्चा माफ किया व किसानों को लाभ मिला।
वैचारिक तौर पर कामरेड कृष्ण स्वरूप वामपंथी थे। उन्होंने राजनीति में भी अपनी किस्मत आजमाई। सीपीआईएम के उम्मीदवार के रूप में उन्होंने कई बार फतेहाबाद विधानसभा से चुनाव लड़े। चुनाव में उन्हें बेशक सफलता नहीं मिली पर प्राय: हर बार उन्हें अच्छा खासा वोट मिला। राजनीति में उनकी सक्रियता व किसानों के ज्वलन्त मुद्दों को शिद्दत के साथ उठाते रहने पर उन्हें गोरखपुरिया के नाम से ख्याति मिली। अपने आखिरी 30-40 साल उन्होंने भू-अधिग्रहण के मुआवजे व जबरन अधिग्रहण के खिलाफ कई लड़ाइयां लड़ी। हांसी, कैथल, अग्रोहा के बाद परमाणु बिजली संयंत्र गोरखपुर में जमीन के जबरी अधिग्रहण के विरोध में व मुआवजा बढ़ाने की लम्बी लड़ाई लड़ी जिसमें किसानों को बहुत फायदा हुआ।
किसानों, श्रमिकों व युवाओं के चहेते कामरेड कृष्ण स्वरूप बेशक अब हमारे बीच नहीं रहे, पर उनके संघर्ष व विचारों की अमिट छाप हजारों कर्मशील लोगों के दिलों-दिमाग पर रहेगी।


Comments Off on संघर्ष और विचारों की बाकी अमिट छाप
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
Both comments and pings are currently closed.

Comments are closed.

Powered by : Mediology Software Pvt Ltd.