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‘शिक्षा पर जीडीपी का 7 फीसदी खर्च करना छलावा’

Posted On November - 28 - 2019

जोगिंद्र सिंह/ट्रिन्यू
चंडीगढ़, 27 नवबंर
राष्ट्रीय शिक्षा आयोग और राज्य शिक्षा आयोग बनने से शिक्षण संस्थानों की स्वायतत्ता खत्म हो जायेगी और किसी टीचर एसोसिएशन या स्टूडेंट कौंसिल के रोल की कोई गुंजाइश नहीं होगी। पूरे देश के कालेजों-यूनिवर्सिटीज के लिये एक नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ही प्रवेश परीक्षा का संचालन करेगी। ये विचार आज पूटा द्वारा नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर आयोजित एक सेमिनार में आईडीसी के निदेशक प्रो. प्रमोद कुमार ने व्यक्त किये। उन्होंने मल्टी-डिस्सिप्लनरी कोर्स का स्वागत करते हुए कहा कि पूरे देश में कोई आईआईएस या आईआईटी जैसी विशेषज्ञता वाले संस्थान नहीं रहेंगे बल्कि हर जगह पर मल्टी-डिस्सिप्लनरी कोर्स होंगे मगर साथ ही आशंका भी जतायी कि ऐसे में लिबरल आर्ट्स के विषय दब सकते हैं क्योंकि नीति निर्धारकों के लिये आईआईटी मॉडल ज्यादा मुफीद रहेगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारतीय कल्चर की मूल भावना वाले संघीय ढांचे की अनदेखी करती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा पर जीडीपी का 7 फीसदी खर्च करना महज एक छलावा है, क्योंकि पहले भी ऐसे वादे किये जाते रहे हैं मगर मिला कुछ नहीं।


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