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लोगों की परवाह नहीं तो सत्ता में रहने का अधिकार नहीं

Posted On November - 7 - 2019

नयी दिल्ली, 6 नवंबर (एजेंसी)

अमृतसर के बाहरी क्षेत्र में बुधवार को एक खेत में फसल के अवशेष जलाता एक किसान। – प्रेट्र

सुप्रीमकोर्ट ने बुधवार को कहा कि खतरनाक स्तर का वायु प्रदूषण दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के करोड़ों लोगों के लिए जिंदगी-मौत का सवाल बन गया है। केंद्र एवं राज्य सरकारों को आड़े हाथ लेते हुए जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने सवाल किया, ‘क्या आप लोगों को प्रदूषण की वजह से इसी तरह मरने देंगे। क्या आप देश को सौ साल पीछे जाने दे सकते हैं?’ पीठ ने सवाल किया, ‘सरकारी मशीनरी पराली जलाये जाने को रोक क्यों नहीं सकती?’ न्यायाधीशों ने राज्य सरकारों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि यदि उन्हें लोगों की परवाह नहीं है तो उन्हें सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है। सख्त टिप्पणी करते हुए पीठ ने कहा, ‘आप (राज्य) कल्याणकारी सरकार की अवधारणा भूल गये हैं। आप गरीब लोगों के बारे में चिंतित ही नहीं हैं। यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।’
बता दें कि शीर्ष अदालत ने सोमवार को पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के मुख्य सचिवों को बुधवार को कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया था। बुधवार को इस पर सुनवाई हुई। दिल्ली और इससे लगे इलाकों में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए न्यायालय ने मंगलवार को इसका स्वत: संज्ञान लेते हुए अलग से खुद एक नया मामला दर्ज किया। न्यायालय ने कहा कि निर्माण कार्य एवं तोड़फोड़ की गतिविधियां करने वालों पर एक लाख रुपये तथा कूड़ा-करकट जलाने वालों पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाए। न्यायालय ने यह भी कहा था कि इस आदेश का उल्लंघन होने पर क्षेत्र के अधिकारी जिम्मेदार ठहराये जाएंगे। कोर्ट ने पूछा कि क्या सरकार पराली खरीद नहीं सकती।

स्कूल खुले, माहौल सुधरने की उम्मीद
प्रदूषण की मार झेल रही राष्ट्रीय राजधानी में बुधवार को स्कूल खुल गए। साफ मौसम और हवाओं की गति बढ़ने से दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में कमी आई जिससे बुधवार को दिल्लीवालों ने राहत की सांस ली। सरकार की वायु गुणवत्ता निगरानी एवं पूर्वानुमान सेवा ‘सफर’ ने कहा, ‘दिल्ली के औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक में उम्मीद से कहीं अधिक तेजी से सुधार हुआ है और धूप निकलने से इसमें और सुधार होने की उम्मीद हैं।’

पराली नहीं जलाने वालों को 100 रुपये प्रति क्विंटल दें
सुप्रीमकोर्ट ने पंजाब, हरियाणा तथा उप्र की सरकारों को आदेश दिया है कि पराली नहीं जलाने वाले छोटे और सीमांत किसानों को सात दिन के भीतर 100 रुपये प्रति क्विंटल का वित्तीय सहयोग दें। पीठ ने कहा, ‘कृषि हमारे देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और यह सरकार का कर्तव्य है कि वह किसानों के हितों की देखभाल करे।’ पीठ ने कहा कि यह बहुत आवश्यक है कि पराली को जलाने से रोकने के लिये किसानों को मशीनें उपलब्ध करायी जायें। पीठ ने केंद्र और पंजाब, हरियाणा, उप्र के साथ ही दिल्ली की सरकारों को निर्देश दिया कि वे पर्यावरण संबंधी मुद्दों का ध्यान रखने के लिए तीन महीने के भीतर विस्तृत योजना तैयार करें।


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