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राष्ट्रपति शासन लागू, विधानसभा निलंबित

Posted On November - 13 - 2019

हरीश लखेड़ा/ट्रिन्यू
नयी दिल्ली, 12 नवंबर

मुंबई में मंगलवार को प्रेस से मुखातिब राकांपा प्रमुख शरद पवार एवं कांग्रेस नेता अहमद पटेल। – प्रेट्र

सरकार बनाने की तमाम कोशिशें विफल होने के बाद मंगलवार को महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया है। राज्य विधानसभा निलंबित अवस्था में रहेगी। प्रदेश विधानसभा के लिए 24 अक्तूबर को आए नतीजों के बाद से सरकार गठन को लेकर गतिरोध चल रहा था। मंगलवार को राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की थी जिसे केंद्रीय कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी। इसके बाद पंजाब के दौरे से दिल्ली लौटे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कैबिनेट की सिफारिश को मंजूरी दे दी। इसके बाद प्रदेश में संविधान की धारा-356 के तहत राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। इस बीच, सभी दल सरकार बनाने के लिए फार्मूला तलाशने की कोशिश में जुटे हुए हैं। भाजपा ने दावा किया है कि उसके पास बहुमत का आंकड़ा आ जाएगा। वैसे भी माना जा रहा है कि भाजपा को भी संख्याबल जुटाने का समय मिल गया है। हालांकि कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना को भी साझा सरकार बनाने के लिए फार्मूला बनाने का समय मिल गया है। इसलिए शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी अब भी कोशिश में लगे हैं।
बता दें कि प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल 9 नवंबर को समाप्त हो गया है। भाजपा-शिवसेना गठबंधन को पूर्ण बहुमत मिल तो गया था, लेकिन शिवसेना मुख्यमंत्री पद की मांग पर अड़ी रही। अंतत: उसका 30 साल पुराना गठबंधन टूट गया। पहले राज्यपाल ने सबसे बड़े दल के नाते भाजपा को सरकार बनाने का न्योता दिया, लेकिन संख्याबल नहीं होने से उसने इनकार कर दिया। फिर शिवसेना को मौका दिया गया, वह भी 145 विधायकों का समर्थन पत्र राज्यपाल को नहीं दे पाई। इसके बाद तीसरी सबसे बड़ी पार्टी एनसीपी को सरकार बनाने के लिए कहा गया। वह भी समर्थन नहीं जुटा पाई। इस बीच, प्रदेश में सरकार बनाने के लिए कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना के प्रयास जारी हैं, लेकिन सरकार बनाने को लेकर फार्मूले को अंतिम रूप देने में मुश्किलें आ रही हैं।

शिवसेना के प्रस्ताव पर नहीं लिया फैसला : कांग्रेस-राकांपा
सियासी गतिरोध के बीच कांग्रेस-राकांपा ने कहा कि उन्होंने सरकार बनाने के लिए शिवसेना को समर्थन देने के प्रस्ताव पर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है। कांग्रेस नेताओं के साथ राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि दोनों दल विचार-विमर्श कर एक आम सहमति बनाने का प्रयास करेंगे कि यदि शिवसेना को समर्थन देना है तो नीतियां और कार्यक्रमों की रूपरेखा कैसी होनी चाहिए। कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने कहा कि तीनों दलों के बीच साझा न्यूनतम कार्यक्रम तय हुए बगैर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जा सकता। उन्होंने राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की आलोचना करते हुए कहा कि कांग्रेस को सरकार बनाने का मौका नहीं दिया गया। इस बीच जानाकरों ने कहा कि अगर राज्य में स्थिर सरकार के गठन के हालात बनते हैं तो राष्ट्रपति शासन हटाया जा सकता है। इस बीच, कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू करना न सिर्फ लोकतंत्र पर क्रूर मजाक है, बल्कि ये ऐसा निंदनीय कार्य है जिसने संवैधानिक प्रथाओं को रौंदा है।’

खोज लेंगे सरकार बनाने का फार्मूला : उद्धव
मुंबई : शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को कहा कि शिवसेना, कांग्रेस और राकांपा मिलकर सरकार बनाने का रास्ता खोज लेंगे। राष्ट्रपति शासन लागू होने पर तंज कसते हुए उद्धव ने कहा, ‘जब हमने राज्यपाल से और समय मांगा तो उन्होंने नहीं दिया। हमने राज्यपाल से 48 घंटे मांगे थे लेकिन अब लगता है कि उन्होंने हमें सरकार बनाने के लिए पर्याप्त छह महीने दे दिए हैं।’ उद्धव ने कहा, ‘मैंने इस विषय पर जानकारी मंगाई है कि भाजपा ने किस प्रकार अपनी विचारधारा के विपरीत चलने वाले महबूबा मुफ्ती, नीतीश कुमार, चंद्रबाबू नायडू और रामविलास पासवान के साथ गठबंधन किया। इससे मुझे कांग्रेस और राकांपा को साथ लेकर चलने में आसानी होगी।’

सुप्रीमकोर्ट पहुंची शिवसेना
इस बीच, शिवसेना ने सुप्रीमकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। शिवसेना ने पर्याप्त समय न देने का आरोप लगाया है। शिवसेना ने राज्यपाल के निर्णय को असंवैधानिक, अनुचित और दुर्भावनापूर्ण करार दिया। शिवसेना ने याचिका में गृह मंत्रालय, महाराष्ट्र सरकार और शरद पवार नीत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) को प्रतिवादी बनाया है। बताया जा रहा है कि बुधवार को कोर्ट इस पर सुनवाई कर सकता है।

ऐसा पहली बार हुआ है 59 सालों में
मुंबई : महाराष्ट्र में यूं तो राष्ट्रपति शासन तीसरी बार लगा है, लेकिन चुनाव होने के बाद सरकार न बन पाने के कारण राज्य के 59 वर्ष के इतिहास में राष्ट्रपति शासन लगाने का यह पहला मामला है। प्रदेश में पहली बार राष्ट्रपति शासन फरवरी 1980 में लगाया गया था, जब तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार ने शरद पवार पीडीएफ सरकार बर्खास्त कर दी थी। उसी वर्ष जून में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस राज्य की सत्ता में वापस लौटी और एआर अंतुले मुख्यमंत्री बने। दूसरी बार राष्ट्रपति शासन तब लगा जब सहयोगी राकांपा द्वारा कांग्रेस नीत सरकार से 28 सितंबर 2014 को समर्थन वापस लेने के बाद पृथ्वीराज चव्हाण ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। दोनों सहयोगी दलों के बीच विधानसभा सीटें और मुख्यमंत्री पद बराबर-बराबर बांटे जाने को लेकर दरार आ गई थी। अक्तूबर 2014 के विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में सत्ता में आयी और बाद में शिवसेना उनकी सरकार में शामिल हुई।


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