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मेमोरी न छीन ले मोबाइल

Posted On November - 17 - 2019

स्वाति गुप्ता

कुछ दिन पहले मैं ट्रेन से सफर कर रही थी। अपने सामान को व्यवस्थित करने के बाद जब मैंने अपने कोच में चारों तरफ नजर दौड़ायी तो हर इनसान मोबाइल में व्यस्त दिखा। सबसे ज्यादा अचरज मुझे तब हुआ जब मैंने करीब दो साल की बच्ची को मोबाइल हाथों में पकड़े और उसमें राइम्स देखते हुए पाया। अक्सर माता-पिता बच्चे के रोने या किसी तरह की ज़िद करने पर बहलाने के लिए उन्हें फोन दे देते हैं। ये उन्हें इस नयी लत का गुलाम बनाने का पहला कदम है। जब उनकी यह आदत बदलने की कोशिश की जाती है तो वो चिड़चिड़े, आक्रामक और कुंठाग्रस्त हो जाते हैं। आइए जानते हैं, क्या हैं मोबाइल से होने वाले नुकसान
स्वभाव में परिवर्तन
ज्यादातर बच्चे जिनको मोबाइल की लत लग चुकी है अगर आप उनकी तुलना उन बच्चों से करेंगे जो कि मोबाइल से दूर हैं तो पाएंगे कि मोबाइल उपयोग करने वाले बच्चे सिर्फ वर्चुअल वर्ल्ड में जी रहे हैं और घर वालों से उन्हें कोई मतलब नहीं है। साथ ही उनका स्वभाव भी चिड़चिड़ा हो चुका होता है। अगर आप उन्हें थोड़ी देर के लिए भी मोबाइल से दूर करेंगे तो वह गुस्से में आ जाएंगे या फिर चिल्लाना शुरू कर देंगे।
सेहत पर असर
बच्चा अगर लंबे वक्त तक मोबाइल का इस्तेमाल करता है तो उसका मानसिक विकास कम होगा व बच्चा मंदबुद्धि भी हो सकता है। वहीं लगातार मोबाइल पर नज़र लगाये रखने के कारण डिजिटल आई सिंड्रोम या ड्राई आई सिंड्रोम की शिकायत बच्चों में बढ़ रही है। इतना ही नहीं, इन दिनों कई बच्चों में वजन घटने या मोटापा बढ़ने का कारण भी यह है।
खाना खाते हुए फोन देखने और गेम्स खेलने की लत की वजह से अटेंशन डेफिसिट डिसऑर्डर, हाइपरएक्टिविटी और स्लीप डिसऑर्डर जैसी बीमारियां भी बच्चों को घेर रही हैं। स्टडी बताती है कि बच्चों में इसका प्रभाव किसी बड़े व्यक्ति के मुकाबले ज्यादा नुकसानदायक होता है।
हिंसक हो जाते हैं
कई ऐसी भी घटनाएं सामने आई हैं कि किसी कारण से बच्चा खुद को अकेला महसूस करता है और ऐसे किसी सोशल फोरम को ज्वॉइन कर लेता है जहां उसे अपनापन लगता है तो उसका गलत फायदा उठा लिया जाता है। ब्लू व्हेल गेम इसका सशक्त उदाहरण है जिसे खेलने वाले को खुद ही मौत को गले लगाना होता है। इसके अलावा बहुत से ऐसे गेम हैं जिनमें हिंसा हैं। इसे लगातार खेलते रहने से स्वभाव हिंसक हो जाता है।
उम्र से पहले हो रहे मेच्योर
इंटरनेट पर हर तरह की सामग्री उपलब्ध है। ऐसे में बच्चों को जो चीजें एक उम्र में जाननी चाहिए वह उन्हें कम उम्र में ही पता लगने लगती हैं, जिसका उनके दिमाग पर असर होता है। कई बार पढ़ने में आता है कि एक नाबालिग लड़के ने अपनी हमउम्र लड़की से बलात्कार किया। संभवतः मोबाइल फोन पर कोई क्लिप आदि देख कर ऐसा हुआ होगा।
स्मरण शक्ति को नुकसान
पहले लोग एक दूसरे का फोन नंबर बड़ी आसानी से याद कर लेते थे, कुछ जोड़ना या घटाना हो तो वह भी झट से उंगलियों पर कर लिया करते थे। लेकिन अब सब कुछ मोबाइल करता है और बच्चों को अपना दिमाग लगाने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती।
आत्मनिर्भरता खत्म
जिस उत्तर को खोजने के लिए उसे पुस्तक का पाठ पढ़ना चाहिए या फिर जिस शब्द का अर्थ जानने के लिए डिक्शनरी के पन्नों को पलटना चाहिए वह काम उसका झट से गूगल पर हो जाता है इसलिए बच्चों ने पुस्तकों को पढ़ना कम कर दिया है। बच्चे पूरी तरह से मोबाइल पर निर्भर होते जा रहे हैं।
आदत छुड़ाने के लिये क्या करें
इससे पहले की आपके बच्चे का बचपन मोबाइल में गुम हो जाये, आइये जानते हैं उसकी इस आदत को छुड़ाने के लिये आप क्या कर सकते हैं-
-अगर आप खुद भी दिन भर मोबाइल से चिपके रहते हैं तो अपनी इस आदत को बदलें और परिवार के साथ समय बिताएं। घर पर बच्चों से उनकी पढ़ाई के बारे में बात करें । इससे बच्चे धीरे-धीरे मोबाइल से दूर होते जाएंगे ।
– हर बच्चे की किसी ना किसी चीज में रुचि होती है। आप उसके मुताबिक उसे डांस क्लास, स्पोर्ट क्लास, म्यूजिक क्लास, पेंटिंग क्लास या अन्य कोई ज्वॉइन करवा सकते हैं।
-बच्चों को बाहर खेलने के लिए प्रोत्साहित करें और उनके साथ खुद भी खेलें।
– बच्चों का घर के रोजमर्रा के कामों में कुछ न कुछ योगदान लें। इससे उन्हें अपनी जिम्मेदारियों का भी अहसास होगा और चीजों का महत्व भी पता चलेगा। इससे बच्चे आत्मनिर्भर भी बनेंगे और खाली समय मोबाइल पर बिताने की बजाय कुछ व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त कर सकेंगे।


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