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बुरी संगत से बचना 

Posted On November - 10 - 2019

हरिन्दर सिंह गोगना

जीवन में कई मर्तबा नासमझी में ऐसी छोटी-छोटी घटनायें घट जाती हैं जो बड़ी सीख भी दे जाती हैं। ऐसी ही छोटी-सी घटना व सीख ने मेरे जीवन को डगमगाने से पहले ही संभाल लिया जो आज भी मेरे स्मरण में है।
बचपन में पांचवीं कक्षा तक आते -आते मेरी लिखावट ही सुंदर न थी बल्कि मैं काफी मेधावी छात्र था। अध्यापक अक्सर मेरी लिखावट और पढ़ाई की तारीफ कर दूसरे बच्चों को मिसाल दिया करते थे। जिससे मेरा सिर गर्व से ऊंचा हो जाता था। मगर एक बार दो सहपाठियों के बहकाने पर मैं आधी छुट्टी के समय ही स्कूल से उनके साथ भाग लिया और स्कूल के बाहर एक वृक्ष की छाया तले बैठ कर उनके साथ ताश खेलने लगा। मैं दिल ही दिल में घबराया भी हुआ था कि कल जब स्कूल जाऊंगा तो अध्यापक जी से क्या कहूंगा ? सहपाठियों से अपना डर जाहिर किया तो वह बोले-कह देना कि बुखार था, सो चला गया। यानी अब झूठ का सहारा भी लेना पड़ेगा।
एक अपराध के बाद दूसरा अपराध। यह सोच कर मन और बेचैन हो उठा। एक पल सोचा अभी कक्षा में लौट जाऊं मगर वापस जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। फिर अचानक मेरी नजर मेरे पापा पर पड़ी जो स्कूल के भीतर जा रहे थे। मेरे पापा पहली बार उस दिन स्कूल आये थे। यह तो मैंने कल्पना भी न की थी। उन्हें देख मेरी घबराहट और भी बढ़ गई। मैं मारे डर के वहां से उठा और तेज कदमों से घर की तरफ भाग लिया ताकि उनके घर पहुंचने से पहले ही मैं पहुंच जाऊं। बचाव के लिए सहपाठियों का सुझाया बहाना भी मेरे मन में था। मगर पापा के सामने मेरा बहाना न चला। उन्होंने मुझे खूब डांट पिलाई और स्कूल से नाम कटवाने तक की धमकी दे डाली। मैं मारे शर्मिंदगी के उनसे नजरें नहीं मिला पा रहा था। ऐसे में मां ने मुझे प्यार से एक ओर ले जाते हुए समझाया, ‘बेटा यह तुम्हें क्या हो गया है…मुझे तुमसे यह उम्मीद न थी। शिक्षक को बिना बताये तुम स्कूल से चले आये और फिर तुम्हें बुखार भी नहीं…यह भी झूठ बोला।’
मैंने मां को सारी बात बता दी तो वह प्यार से समझाते हुए बोली, ‘तुम इतने अच्छे होशियार छात्र हो। सब अध्यापक तुम्हारी तारीफ करते नहीं थकते और तुम हो कि बुरी संगत में शामिल हो गये। याद रखो, इज्जत कमाने में सालों लग जाते हैं और इज्जत गंवाने में एक पल। कल ही जाकर अपने अध्यापक जी से साफ-साफ पूरी बात बताना और आइंदा फिर कभी किसी की बातों में आकर गलत मार्ग अख्तियार न करना।’ मुझे भी अपनी गलती का अहसास था। मैंने उसी दिन से संकल्प कर लिया था कि जीवन में बुरी संगत से दूर ही रहूंगा।


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