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बार-बार की पारी और मार्गदर्शक मंडल

Posted On November - 6 - 2019

रमेश जोशी

तोताराम कभी-कभी ऐसे प्रश्न करता है, जिनका कोई निश्चित संक्षिप्त उत्तर नहीं हो सकता है।
आज बोला—मोदी जी में क्या कमी है?
बचने के लिए हमने पूछा—कौन कहता है उनमें कोई कमी है?
बोला—कह भी कौन सकता है लेकिन तू बुद्धिजीवी बना फिरता है इसलिए तुझे ही पूछ रहा हूं। कुछ है तो साफ़-साफ़ बता।
हमने कहा—हमें तो कोई कमी नज़र नहीं आती। स्वस्थ, बहुश्रुत, प्रभावशाली वक्ता, सबसे निःसंकोच अपने ‘मन की बात’ साझा करने वाले, सक्रिय, प्रत्युत्पन्नमति, संयमित, जन-जन में प्रिय, तन-मन-धन से राष्ट्र-सेवा को समर्पित, अपनी साधना से एक मेहनतकश परिवार से प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे, सबको साथ लेकर चलने वाले, सभी धर्मों-भाषाओं, जातियों और यहां तक कि प्रतिपक्षी के प्रति भी प्रेम-भाव रखने वाले महान व्यक्ति में किसी को क्या कमी मिल सकती है। फिर भी…
बोला—बस, आ गया न अपने वाली पर। मुझे तेरे ये अगर, मगर, लेकिन किन्तु, परन्तु बड़े अजीब लगते हैं। अच्छे-भले हलवे में ऐसा कंकड़ गिरा देता है कि बस…।
फिर भी क्या?
हमने कहा—फिर भी जब चुनाव आते हैं तो पता नहीं इन्हें क्या हो जाता है? आस्था चैनल से सीधे ‘बिग-बॉस’ और ‘चुटकुला सम्मेलन’ पर उतर आते हैं।
बोला—इस देश में सेवा करने के लिए चुनाव जीतना बहुत ज़रूरी है। और चुनाव जीतने के लिए ये सब प्रपंच करने बहुत ज़रूरी हैं। वैसे आज देश में मोदी जी का कोई विकल्प दिखाई नहीं देता। दुनिया के बड़े-बड़े नेता उनसे हाथ मिलाने, गले मिलने के लिए, उनके साथ सेल्फी लेने के लिए लहालोट हो रहे हैं। उनके साथ झूला झूलने और चाय पीने के लिए तरस रहे हैं। इसलिए कभी ये जाते हैं तो कभी वे चले आते हैं। और देश के तो सभी चुनाव उनके नाम पर ही लड़े और जीते जा रहे हैं।
हमने कहा—वैसे अपने यहां प्रधानमंत्री के लिए कोई बंधन नहीं है। एक व्यक्ति आजीवन प्रधानमंत्री रह सकता है जैसे नेहरू जी रहे। इसलिए वे अपने अनुसार इस देश को चला सके। अब मोदी जी पिछली कमियों को सुधारकर इस देश को दुनिया का सिरमौर बनाना चाहते हैं तो उन्हें लाइफ टाइम प्रधानमंत्री घोषित कर दिया जाना चाहिए, जिससे वे निश्चिंत होकर, जैसे चाहें, इस देश का विकास कर उसे दुनिया में नंबर वन बना सकें। लेकिन…
बोल—लेकिन अब फिर तेरा यह ‘लेकिन’ कहां से आ गया ?
हमने कहा— मोदी जी ने खुद ही 75 पार वालों को मार्गदर्शक मंडल में बैठाने की प्रथा शुरू कर दी तो उन्हें भी अमल करन पड़ेगा।
बोला—देशहित में जब उन्होंने और भी बहुत से साहसिक कदम उठाए हैं तो मार्गदर्शक मंडल वाली इस शर्त में भी ढील दी जा सकती है लेकिन…।


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