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पंजाब, हरियाणा, हिमाचल के 3 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

Posted On November - 11 - 2019

यमुनानगर में कपालमाेचन मेले में रविवार को पहुंचे श्रद्धालु। -हप्र

सुरेंद्र मेहता/हप्र
यमुनानगर, 10 नवंबर
उत्तर भारत के सबसे बड़े कपालमोचन मेले में अब तक पंजाब, हरियाणा और हिमाचल सहित अन्य राज्यों से करीब तीन लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। अभी मेले में लोगों का आना जारी है। मुख्य स्नान 12 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा व गुरु नानक जयंती पर होगा। मेले में आने वाले श्रद्धालुओं का मानना है कि मेले में लगातार 5 दिन तक रहने और पूजा अर्चना करने से हर तरह की मनोकामना पूर्ण होती हैं। यह मेला किराए की जमीन पर चलता है, क्योंकि श्राइन बोर्ड की अपनी जमीन नहीं है।
एसजीपीसी की कुछ अपनी जमीन है, लेकिन उसमें लाखों की संख्या में आए श्रद्धालु नहीं रुक पाते। इसलिए प्रशासन किसानों की जमीन को मेले के लिए लेता है। किसानों के लिए मेले में स्थिति ऐसी होती है कि वे अपनी जमीन पर होते तो हैं, लेकिन उनकी जमीन का अस्थाई मालिक प्रशासन होता है। प्रशासन प्रति एकड़ के हिसाब से जमीन किराए पर लेता है। इसके बाद, स्क्वेयर फीट के हिसाब से आगे प्रशासन लोगों व दुकानदारों को देता है। किसान को पांच से छह हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से किराया मिलता है। आगे प्रशासन को एक लाख रुपये तक की आमदनी इस जमीन से होती है।

कपालमाेचन मेले के दौरान सरोवर का दृश्य। -हप्र

किसान रुलदा रामए राजेश कुमारए प्रताप सिंह और जगतार ने बताया कि यह तीर्थसथल है। हमें खुद पर गर्व है कि वे इस एरिया में रहते हैं। लेकिन इस बात का दर्द है कि उन्हें प्रशासन द्वारा मेले के लिए ली गई जमीन का रेट कम दिया जाता है। लेकिन वे इसका विरोध नहीं करते। उनका कहना है कि वे भी मेले के लिए पहले से तैयारी में लग जाते हैं। किसान फसल को समय पर काट लेता है, और मेले में कोई न कोई दुकान कर बैठ जाता है, जिससे किसान भी पैैसे कमा सकें।
100 एकड़ जमीन में लगे मेले में 474 दुकानें हैं। मेला करीब पांच किलोमीटर के एरिया में लगा हुआ है। किसानों से करीब 100 एकड़ जमीन ली गई है। इसके अलावा, वहां पर सोसाइटी की जमीन को भी प्रशासन ने लिया है। पूरे मेला एरिया को 4 सेक्टरों में बांटा गया है। इन चारों सेक्टर में 474 दुकानों के लिए जमीन दी गई है, जबकि इससे कहीं ज्यादा दुकानें बिना जमीन अलॉटमेंट के लगी हैं। यहां पर ज्यादातर जमीन पर प्रशासन को पार्किंग, टॉयलेट, अधिकारियों के रुकने की व्यवस्था या अन्य सरकारी इंतजाम करने पड़ते हैं।

पराली बेच रहे किसान
मेला किसान के लिए भी कमाई का साधन है। जिस पराली को किसान आग लगाकर खेत में जला देते हैं और दिल्ली वालों को सांस लेने में तकलीफ होती है, वह कपालमोचन मेले में पैसों में बिक रही। एक किलो पराली 5 रुपये में किसान बेच रहे हैं। मेले में जगह-जगह पराली की भी दुकाने हैं। करीब 45 किसान यहां पर पराली बेच रहे हैं, जो दो से तीन दिन में ही हजारों की पराली बेच देंगे। किसान फूल सिंह ने एडमिन ब्लॉक के ठीक सामने खाली पड़ी जगह पर पराली का ढेर लगाया हुआ है। उनका कहना है कि वे पांच रुपये में एक पुलिया बेच रहे हैं, जो करीब एक किलो की है। उनका कहना है कि जब से वे मेले में आने लगे हैं, पराली जलाने की जरूरत नहीं पड़ती। उनके अनुसार सात हजार रुपये की पराली वे यहां पर बेच देते हैं।


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