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दस साल में क, ख, ग

Posted On November - 10 - 2019

सीमा

जब मैं अपना बचपन याद करती हूं तो स्कूल और पढ़ाई को लेकर बहुत अच्छी यादें सामने नहीं आती। हम तीन बहनें और एक भाई हैं। मैं सबसे छोटी हूं। पुराने दिन याद करती हूं तो आज से 30 साल पुरानी कई बातें तरोताज़ा हो जती हैं। हमारा परिवार बिहार का रहने वाला है। मेरा पापा बिहार सरकार में अच्छे पद पर तैनात थे। सो उनकी सोच मेरी दादी और अन्य रिश्तेदार व आस-पड़ोस वालों से अलग थी। पापा ने दो बहन और एक भाई को अच्छे स्कूल में दाखिला दिलाया था। उन्होंने कभी सोचा नहीं था कि लड़की नहीं पढ़े और लड़का पढ़े। शायद इसका कारण था अच्छा पद और शहर में रिहाइश। लेकिन मेरे समय ऐसा कुछ नहीं हुआ। आज भी याद है मेरी पढ़ाई पर लड़ाई और तीखे व्यंग्यों की बारिश। मेरी बहनें और भाई मुझसे बड़े थे। जब मैं चार साल की थी, पापा की पोस्टिंग गांव में हो गई थी। पापा मुझे लेकर गांव आ गए और भाई-बहन के साथ मम्मी शहर में रह गईं। उनकी पढ़ाई के कारण मम्मी का आना मुश्किल था। तब शुरू हुई थी मेरी पढ़ाई की जंग। सब याद है मुझे। पापा ने स्कूल में मेरी एडमिशन की बात की, तो दादी, दादा बहुत बिखर गए थे। वो नहीं चाहते थे कि घर की लड़कियां पढ़ें। मेरे बाकी भाई-बहन शहर में रहकर पढ़ रहे थे। उनके साथ मां रह रही थी। उस दौर में लड़कियों को पढ़ाया नहीं जाता था। गांव में दसवीं तक एक स्कूल था। जो मेरे गांव से 2 किलोमीटर दूर था। मम्मी-पापा ने जब मुझे पढ़ाने की बात दादा-दादी को बताई तो दादी ने उन्हें बहुत फटकारा। पापा को भी बहुत कुछ सुनना पड़ा था, क्योंकि दादी की मर्जी के खिलाफ पापा बाकी बेटियों को पढ़ा रहे थे। पापा ने मेरी पढ़ाई के लिए कई लड़ाई लड़ी। अंत में वह और मैं यह जंग जीत गये लेकिन इस बीच मेरा आधा बचपन निकल गया। आखिरकार घर के बड़े चुप हो गए और मेरा स्कूल में दाखिला 10 साल की उम्र में हुआ। अमूमन इस उम्र में बच्चे पांचवीं क्लास में होते हैं। और मैं पहली कक्षा में, जिसे आज की नर्सरी कहा जाता है। जहां बच्चे आज एबीसीडी सीखते हैं। सोचिए स्कूल जाने की वह जंग कितनी व्यापक होगी जो दस की उम्र में मुझे क, ख, ग सीखना पड़ा। वाकई स्कूल की शुरूआत ही मेरे लिए स्कूल का पहला  दिन था।


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