कांगड़ा जिला में 15000 लोगों को क्वारंटाइन के निर्देश !    ‘नवलखा, तेल्तुम्बडे हफ्ते में करें सरेंडर’ !    सोपोर में जैश का कमांडर ढेर, एक जवान जख्मी !    राहत सामग्री देते वक्त फोटो न खींचें !    राहत सामग्री देते वक्त फोटो न खींचें !    अफगानिस्तान में अगवा कर 7 लोगों की हत्या !    हरियाणा के हर जिले में होंगे रैंडम टेस्ट !    5 लाख तक की लंबित आयकर राशि की वापसी तुरंत !    किसानों से सीधी खरीद की दें अनुमति : केंद्र !    11 दिन में हिंसा, उत्पीड़न की आईं 92 हजार शिकायतें !    

कोर्ट ने मांगे राज्यपाल के पत्र

Posted On November - 25 - 2019

नयी दिल्ली, 24 नवंबर (एजेंसी)

नयी दिल्ली में रविवार को सुप्रीमकोर्ट के बाहर मंत्रणा करते कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला, पृथ्वीराज चव्हाण आैर अभिषेक मनु सिंघवी। -प्रेट्र

महाराष्ट्र की सत्ता के लिए छिड़े संघर्ष में रविवार को मुंबई से दिल्ली तक सियासी और कानूनी जंग जारी रही। सुप्रीमकोर्ट ने छुट्टी के दिन विशेष सुनवाई के दौरान सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता को महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन हटाने की सिफारिश और देवेंद्र फड़नवीस को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने वाली राज्यपाल की चिट्ठी सोमवार सुबह तक अदालत में पेश करने का निर्देश दिया। जस्टिस एनवी रमन, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने केंद्र, महाराष्ट्र सरकार, मुख्यमंत्री फड़नवीस और उप मुख्यमंत्री अजित पवार को नोटिस भी  जारी किये।
राज्य में 12 नवंबर से लागू राष्ट्रपति शासन शनिवार तड़के अचानक हटाने के बाद राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने फड़नवीस को मुख्यमंत्री और अजित पवार को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलायी थी। इसके खिलाफ शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस ने सुप्रीमकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस संयुक्त गठबंधन की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और एएम सिंघवी ने कहा कि शक्ति परीक्षण आज ही कराया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि चुनाव के बाद हुए शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस गठबंधन के पास बहुमत के लिए जरूरी संख्याबल है। वहीं, शीर्ष अदालत ने कहा कि इसमें दो राय नहीं है कि शक्ति परीक्षण बहुमत साबित करने का सबसे अच्छा तरीका है।
अदालत में सुनवाई के बाद भाजपा नेता आशीष शेलार ने कहा, ‘कांग्रेस, राकांपा और शिवसेना का खेल खत्म हो गया है। अजित पवार राकांपा विधायकों को व्हिप जारी कर सकते हैं।’ वहीं, राकांपा ने दावा किया कि देवेंद्र फड़नवीस सरकार 30 नवंबर को सदन में विश्वास मत के दौरान हार जाएगी। राकांपा नेता नवाब मलिक ने कहा, ‘शपथ ग्रहण फर्जी दस्तावेज पर हुए। देवेंद्र फड़नवीस के पास संख्या बल नहीं है।’

लोकतंत्र के साथ धोखा : सिब्बल
सिब्बल ने मंत्रिमंडल की बैठक के बिना राष्ट्रपति शासन हटाए जाने को अजीब बताया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने सत्तारूढ़ पार्टी को बहुमत साबित करने के लिए 30 नवंबर तक का जो समय दिया, उसका मतलब ‘कुछ और’ है। उन्होंने कहा, ‘सरकार बनाने की मंजूरी तब दे दी गई जब राकांपा के 41 विधायक उनके (भाजपा और अजित पवार) के साथ नहीं हैं, यह लोकतंत्र के साथ धोखा और उसकी हत्या है।’ सिंघवी ने कहा कि राकांपा के 41 विधायक शरद पवार के साथ हैं।

राज्यपाल को छूट : रोहतगी

भाजपा के दो विधायकों और कुछ निर्दलीय विधायकों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि यह याचिका हाईकोर्ट में दायर होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि कोई राजनीतिक पार्टी मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के लिए अनुच्छेद-32 के तहत याचिका कैसे दायर कर सकती है? रोहतगी ने कहा कि संयुक्त गठबंधन की याचिका बिना किसी दस्तावेज की है, राज्यपाल का आदेश दायर नहीं किया गया। राज्यपाल के फैसले को सही ठहराते हुए रोहतगी ने कहा कि राज्यपाल या राष्ट्रपति के पास अनुच्छेद 361 के तहत कुछ कार्य स्वतंत्रता और छूट होती है, जिसके तहत वह दावा करने वाले व्यक्ति को मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री चयनित कर सकते हैं।


Comments Off on कोर्ट ने मांगे राज्यपाल के पत्र
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
Both comments and pings are currently closed.

Comments are closed.

Manav Mangal Smart School
Powered by : Mediology Software Pvt Ltd.