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एकदा

Posted On November - 19 - 2019

मौन साधना में समाधान
सुखन नामक जिज्ञासु बुद्ध की सभा में आया और पूछ बैठा- प्रभु, ईश्वर है क्या? बुद्ध ने पूछा- सच में जानना चाहता है या सिर्फ दुनिया को दिखाना चाहता है। सुखन तनिक रोष से बोला- इतनी दूर से दुनिया के लिए नहीं, अपनी आत्मा की शांति के लिए आया हूं। आप बस उपाय बताएं। मैं उसके लिए कुछ भी करने के लिए तैयार हूं। बुद्ध मुस्कुराए-तू इतना ही उत्सुक है तो दो वर्ष मेरे पास आसन जमा ले। इस अवधि में कुछ बोलना नहीं, कुछ सुनना नहीं। दो वर्ष बाद जो चाहेगा, वह सब बताऊंगा। सुखन इतना अधीर था कि तुरंत हां कर दी और एक वृक्ष के नीचे आसन जमा लिया। तभी एक दूसरे वृक्ष के नीचे बैठा भिक्षु जोरों से हंसा और बोला-दो वर्ष पहले मेरे साथ भी यही हुआ था। दो वर्ष शांत रहकर मेरा दिमाग भी शांत हो गया और किसी प्रश्न को जानने की जिज्ञासा ही न रही, अतः जो पूछना हो अभी पूछ लो। मगर सुखन न माना और बैठ गया। दो वर्ष बाद बुद्ध ने पूछा- पूछ, क्या पूछना चाहता है। सुखन उनके चरणों में गिरकर बोला- प्रभु, इन दो वर्षों में तो मैं अपने भीतर ही इतना उतर गया कि सारे विचार ही शांत हो गए और कुछ जानने की जिज्ञासा ही न रही। हमारी मौन साधना ही हमारी सब समस्याओं का समाधान कर देती है।
प्रस्तुति : मुकेश कुमार जैन


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