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एकदा

Posted On November - 12 - 2019

जीवन का संदेश

एक बार एक संत ने अपने दो भक्तों को बुलाया और कहा आपको यहां से पचास कोस जाना है। एक भक्त को एक बोरी खाने के समान से भर कर दी और कहा जो लायक मिले उसे देते जाना और एक को ख़ाली बोरी दी उससे कहा रास्ते में जो उसे अच्छा मिले, उसे बोरी में भर कर ले जाए। दोनों निकल पड़े, जिसके कंधे पर समान था वह धीरे चल पा रहा था। ख़ाली बोरी वाला भक्त आराम से जा रहा था। थोड़ी दूर उसको एक सोने की ईंट मिली उसने उसे बोरी मे डाल लिया। थोड़ी दूर चला फिर ईंट मिली उसे भी उठा लिया। जैसे-जैसे चलता गया उसे सोना मिलता गया और वह बोरी में भरता हुआ चल रहा था। बोरी का वज़न बढ़ता गया। उसका चलना मुश्किल होता गया और फिर सांस भी चढ़ने लग गई। एक एक क़दम मुश्किल होता गया। दूसरा भक्त जैसे-जैसे चलता गया रास्ते में जो भी मिलता उसको बोरी में से खाने का कुछ समान देता गया। धीरे-धीरे बोरी का वज़न कम होता गया और उसका चलना आसान होता गया। जो बांटता गया उसका मंज़िल तक पहुंचना आसान होता गया जो इकट्ठा करता रहा, वह रास्ते में ही दम तोड़ गया।                         प्रस्तुति : सुभाष बुड़ावन वाला


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