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एकदा

Posted On November - 9 - 2019

राष्ट्रभक्ति का जुनून
16 दिसंबर, 1929 को अमर शहीद रामप्रसाद ´बिस्मिल ‘वंदे मातरम‍्’ और ´‘भारत माता की जय’ के नारे लगाते हुए बड़ी शान से फांसी के तख्ते तक गए। वे गरज उठे, मैं अंग्रेजी हुकूमत का विनाश चाहता हूं। फिर ‘´विश्वानि देव सवितर दुरीतानि’ मंत्र पढ़कर फंदे पर झूल गये। फांसी पर चढ़ने से पूर्व बिस्मिल मुस्तैदी से दंड बैठक लगा रहे थे कि अंग्रेज अफसर ने टोका, ‘अब इसकी क्या आवश्यकता है, अब तो तुम फांसी पर चढ़ जाओगे।’ बिस्मिल बोले थे, ‘´मैं चाहता हूं कि मरते दम तक मेरा शरीर मजबूत रहे, ताकि मैं दोबारा जब भी जन्म लूं, इसी बल व ऊर्जा के सहारे देश की सेवा में जुटा रहूं।’ वास्तव में बिस्मिल के ऐसे विचार अविस्मरणीय हैं।
प्रस्तुति : मुकेश शर्मा


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