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एकदा

Posted On November - 5 - 2019

नजरिये के अहसास

एक आदमी अपने घर का सामान बैलगाड़ी में लादकर किसी गांव की तरफ जा रहा था। उस गांव के बाहर पहुंचने पर उसे पेड़ के नीचे एक वृद्ध बैठा दिखाई दिया। आदमी ने बैलगाड़ी को वृद्ध के पास रोककर पूछा—बाबा, मैं इस गांव का निवासी होना चाहता हूं। यहां के लोगों का चाल-चलन और व्यवहार कैसा है? वृद्ध ने कहा—आप इससे पूर्व जिस गांव में रहते थे, उस गांव के लोगों का व्यवहार कैसा था? आदमी ने जवाब दिया— उस गांव के लोग तो बहुत ही घटिया प्रवृत्ति के थे। वे झगड़ालू और बेप्रीत थे। यह जवाब सुनकर वृद्ध ने आदमी से कहा—इस गांव के लोग तो इससे भी अधिक घटिया, झगड़ालू और बेप्रीत हैं। वृद्ध का उत्तर सुनकर उस आदमी ने अपनी बैलगाड़ी हांक दी और आगे बढ़ गया। थोड़ी देर बाद वृद्ध के पास एक घुड़सवार आकर रुका। उसने पूछा—बाबा, मैं इस गांव में अपना घर बनाना चाहता हूं, इस गांव के लोग कैसे हैं? वृद्ध ने पूछा—बन्धु, आप जिस गांव मंे रहते हैं, उस गांव के लोग कैसे हैं? घुड़सवार ने जवाब दिया—बाबा, वहां के लोग बहुत ही मधुरभाषी, सद‍्व्यवहारी और सहयोगी हैं। वृद्ध ने घुड़सवार का उत्तर सुनकर चेहरे पर मुस्कान लाते हुए कहा—भाई मेरे, इस गांव के लोग तो उनसे भी अधिक मधुरभाषी, सद‍्व्यवहारी और सहयोगी हैं, आप खुशी-खुशी इस गांव में अपना घर बनाकर रह सकते हैं।

प्रस्तुति : सुरेन्द्र सिंह ‘बागी’


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