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इतना भी न बचाएं कि सुकून से जी न पाएं

Posted On November - 17 - 2019

शिखर चंद जैन

कहीं आपको भी तो ज़रूरत से ज्यादा बचाने की आदत नहीं पड़ गई है? अगर आप में हैं ऐसी कुछ आदतें, तो अभी बदल दीजिए।
हमेशा एक्सचेंज ऑफर का इंतज़ार
आपका फ्रिज बेकार हो चुका है, टीवी की पिक्चर क्वालिटी का भट्ठा बैठ चुका है, वाशिंग मशीन की खड़खड़ परेशान कर रही है और स्मार्टफोन के कई फीचर काम नहीं कर रहे या बार-बार हैंग कर रहा है। लेकिन आप इन्हें लंबे समय से बदल नहीं रहीं क्योंकि आपको किसी एक्सचेंज ऑफर या बड़े डिस्काउंट का इंतज़ार है, जो अभी दूर-दूर तक नज़र नहीं आ रहा। अपनी इस आदत से आप खुद को तो परेशान करती ही हैं, आपसे जुड़े परिवार के सदस्य या अन्य लोगों को भी इससे असुविधा होती है। चीजों को जब जरूरत हो तब खरीदिए वरना कई बार नुकसान उठाना पड़ जाता है। खराब इलेक्ट्रॉनिक चीजें खतरे का सबब बन सकती हैं और खराब सेलफोन इमरजेंसी में धोखा दे सकता है।
जीभ पर ताला!
माना कि बाज़ार की चीजें खाना सेहत के लिए ज्यादा ठीक नहीं, घर में भी व्यंजन आदि की बजाय दाल-रोटी-सब्जी आदि खाना सही है। लेकिन महीने में एकाध बार स्वाद बदलने के लिए घर के दूसरे सदस्य किसी अच्छे रेस्तरां में नाश्ता, लंच या डिनर लेना चाहें तो सिर्फ खर्च की बात सोचकर आपका ना-नुकुर करना ठीक बात नहीं। अगर आप सब्जियां और फल भी सबसे सस्ते ही प्रेफर करती हैं तो समझ लें कि यह बचत की सनक या कंजूसी ही है।
कहीं घूमने नहीं निकलतीं
बच्चे प्रायः जिद करते हैं, ‘मम्मा, चलो ना आज फलां अम्यूजमेंट पार्क चलते हैं। या अमुक मूवी देखने चलते हैं।’ और आप हैं कि कोई न कोई बहाना बनाकर मना कर देती हैं ताकि पैसे खर्च न हो जाएं। यह एक बुरी आदत है। ध्यान रहे एक अंतराल के बाद रुटीन से हटकर कहीं मनोरंजन के लिए निकलना सेहत के लिए अच्छा माना जाता है। इससे मूड ठीक होता है और नई मानसिक ऊर्जा का संचार होकर आपकी प्रोडक्टिविटी बढ़ती है। यह बात कई वैज्ञानिक अध्ययनों में भी साबित हो चुकी है।
चीजें थोड़ी-थोड़ी खरीदती हैं
कुछ महिलाएं पैसे हाथ में होने के बावजूद हर चीज थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खरीदती हैं ताकि एक साथ ज्यादा पैसे खर्च न हों। दरअसल यह एक नासमझी है। इसमें अनजाने में ही आपके पैसे ज्यादा खर्च हो जाते हैं। इसलिए ऐसी नासमझी वाली बचत से बचें। जो चीजें नित्य उपयोग की हैं, उन्हें थोक बाजार से या अपने दुकानदार से मोलभाव करके ज्यादा मात्रा में लें।
छोटे-छोटे खर्च भी नहीं करतीं
आपकी कुर्ती या सलवार का रंग उड़ चला है, साड़ी बदरंग होने लगी है, चप्पल पहले ही चार बार रिपेयर हो चुकी है और आप इन्हें बदलने का नाम नहीं लेतीं। आप सोचती हैं कि जब तक काम चल रहा है, चलाओ। इससे आपके व्यक्तित्व पर बुरा असर पड़ता है। लोग आपको दीन हीन या कंजूस समझने लगते हैं। ऐसी छोटी-मोटी चीजों पर खर्च करने में ज़रा भी न सोचें। अच्छा और साफ सुथरा पहनावा व्यक्तित्व का अहम हिस्सा होता है।
सेल के चक्कर में फंसती हैं
कंजूस लोग अक्सर सेल के खेल में फंस जाते हैं। उन्हें लगता है कि वहां चीजें सस्ती मिलती हैं। ध्यान रहे, अपना नुकसान करके आपको कोई सामान नहीं बेचता। वहां रिजेक्टेड, घटिया, पुराना माल मिलेगा या फिर बाजार मूल्य पर ही मिलेगा। ये डिस्काउंट वगैरा सिर्फ नज़रों का धोखा है।
थोड़ी-सी बचत के लिए समय की बर्बादी
फर्ज कीजिए कि आपको दो किलो आलू लेने हैं। आपकी कॉलोनी में इनकी कीमत 22 रु. किलो है। लेकिन सब्जी मंडी में 20 रु.। अब 2 रुपये बचाने के लिए 3-4 किलोमीटर जाकर जितना समय बर्बाद करेंगी, उसमें कई काम होंगे।
उपहार नहीं देतीं
किसी ने आपको अपने बच्चे के जन्मदिन पर बुलाया, अपनी शादी की वर्षगांठ पर बुलाया या किसी अन्य खुशी के मौके पर आमंत्रित किया और आप खाली हाथ चली गईं। यह सामाजिक शिष्टता के खिलाफ है। इससे आपकी इमेज खराब होती है।


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