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अजित की पावर से फड़नवीस फिर सीएम

Posted On November - 24 - 2019

मुंबई में शनिवार को राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी का अभिवादन करते नवनियुक्त सीएम देवेंद्र फड़नवीस और डिप्टी सीएम अजित पवार। – प्रेट्र

मुंबई, 23 नवंबर (एजेंसी)
विधानसभा चुनाव के बाद से मंझधार में फंसे महाराष्ट्र में शनिवार को बड़ा सियासी उलटफेर हुआ। शुक्रवार रात तक शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और कांग्रेस मिलकर सरकार बनाने की तैयारी में थे, लेकिन सबको चौंकाते हुए भाजपा के देवेंद्र फड़नवीस दोबारा मुख्यमंत्री बन गये। सरकार बनाने में भाजपा का साथ दिया महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटाला मामले में नामजद राकांपा के विधायक दल के नेता अजित पवार ने। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने सुबह करीब 7:50 बजे राजभवन में फड़नवीस को मुख्यमंत्री और अजित पवार को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। इससे पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हस्ताक्षर के बाद शनिवार तड़के 5:47 बजे राष्ट्रपति शासन हटाने की अधिसूचना जारी की गयी। राज्य में 12 नवंबर से राष्ट्रपति शासन लागू था।
दिनभर सियासी वार-पलटवार के बीच रात को मामला सुप्रीमकोर्ट पहुंच गया। शिवसेना, राकांपा, कांग्रेस की याचिका पर रविवार सुबह 11:30 बजे सुनवाई होगी। वहीं, राकांपा ने विधायक दल के नेता अजित पवार को पद से बर्खास्त कर दिया। व्हिप जारी करने का उनका अधिकार भी वापस ले लिया गया। सूत्रों ने बताया कि राकांपा विधायक दल की बैठक में कुल 54 में से 49 विधायक मौजूद रहे।
शपथ ग्रहण ऐसे समय में हुआ है, जब एक दिन पहले शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस के बीच मुख्यमंत्री पद के लिए शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के नाम पर सहमति बनी थी। तीनों पार्टियों ने नयी सरकार के गठन के लिए न्यूनतम साझा कार्यक्रम का मसौदा भी तैयार कर लिया था। राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने भाजपा से हाथ मिलाने के अजित पवार के फैसले को अनुशासनहीनता करार दिया। उन्होंने कहा कि उनके भतीजे और पाला बदलने वाले पार्टी के अन्य विधायकों पर दल-बदल विरोधी कानून के प्रावधान लागू होंगे। राकांपा प्रमुख ने दावा किया कि भाजपा नीत नयी सरकार विधानसभा में बहुमत साबित नहीं कर पाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस के पास संयुक्त रूप से संख्या बल है और तीनों दल सरकार बनाएंगे। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस, राकांपा और शिवसेना को निर्दलीय और छोटे दलों के विधायकों के साथ 169-170 विधायकों का समर्थन हासिल है। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी तीनों दलों के साथ मिलकर सरकार बनाने की बात दोहराई। पवार के साथ संवाददाता सम्मेलन में उद्धव ने कहा, ‘पहले ईवीएम का खेल चल रहा था और अब यह एक नया खेल है। अब मुझे नहीं लगता कि चुनाव कराने की भी कोई जरूरत है।’ पवार ने कहा मुझे नहीं पता कि अजित ने ईडी के डर से भाजपा का समर्थन करने का फैसला लिया। पार्टी और परिवार में बिखराव के बारे में पवार ने कहा, ‘मैं इन चीजों से पहले भी गुजर चुका हूं। 1980 में उन सभी को शिकस्त देने में सफल रहा था जिन्होंने मुझे अकेला कर दिया था।’
गौर हो कि महाराष्ट्र विधानसभा का चुनाव मिलकर लड़ने वाली भाजपा और शिवसेना ने 288 सदस्यीय सदन में क्रमश: 105 और 56 सीटें जीती थीं। मुख्यमंत्री पद साझा करने से भाजपा के इनकार के बाद शिवसेना ने उससे नाता तोड़ लिया। दूसरी ओर, चुनाव पूर्व गठबंधन करने वाली कांग्रेस और राकांपा ने क्रमश: 44 और 54 सीटें जीतीं।
शरद पवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, राकांपा के जो 10 से 11 विधायक राजभवन में अजित के साथ उपस्थित थे, उनमें से 3 पार्टी में लौट आए। दो और लौट रहे हैं। उन्होंने कहा, राकांपा का विधायक दल का नेता होने के नाते अजित पवार के पास आंतरिक उद्देश्यों के लिए सभी 54 विधायकों के नाम, हस्ताक्षर और निर्वाचन क्षेत्रों के साथ सूची थी।
शरद पवार ने कहा, मुझे लगता है कि उन्होंने यह सूची समर्थन पत्र के रूप में राज्यपाल को सौंपी होगी। यदि यह सच है तो राज्यपाल को भी गुमराह किया गया है। संवाददाता सम्मेलन में मौजूद विधायकों- राजेंद्र शिंगणे और संदीप क्षीरसागर ने कहा कि रात 12 बजे उन्हें अजित पवार का फोन आया, जिसमें उनसे पार्टी के नेता धनंजय मुंडे के आवास पर सुबह 7 बजे आने को कहा गया। दोनों विधायकों ने कहा कि इसके बाद उन्हें राजभवन ले जाया गया। उन्होंने बताया, ‘इससे पहले कि उन्हें कुछ आभास हो पाता, हमने देखा कि देवेंद्र फड़नवीस और अजित पवार को राज्यपाल शपथ ग्रहण करा रहे हैं।’ शिंगणे ने कहा, ‘जब मैं राजभवन पहुंचा, तो 8-10 विधायक पहले से वहां मौजूद हैं। हममें से किसी ने महसूस नहीं किया कि हमें वहां क्यों लाया गया। शपथ ग्रहण के बाद हम (शरद) पवार साहेब से मिलने गये।’ उन्होंने कहा, ‘अजित पवार के बुलाने के बाद कुछ गलतफहमी के चलते यह सब हुआ।’
देवेंद्र बचपन से जुड़े हैं आरएसएस से
देवेंद्र फड़नवीस 2014 में पहली बार मुख्यमंत्री बने थे। वे ऐसे पहले गैर कांग्रेस मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने राज्य में दूसरी बार सीएम पद की शपथ ली है और केवल दूसरे मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया है। वे नागपुर विश्वविद्यालय से लॉ ग्रेजुएट हैं और बिजनेस मैनेजमेंट में उनके पास परास्नातक की डिग्री है। उनका जन्म और पालन-पोषण नागपुर में हुआ, जहां आरएसएस का मुख्यालय है। उनके पिता गंगाधर फड़नवीस आरएसएस से जुड़े हुए थे, इसलिए वे भी बचपन से आरएसएस की विचारधारा से प्रभावित रहे। उन्होंने राजनीतिक कॅरिअर की शुरुआत 1990 के दशक में की। वह 1992 तथा 1997 में 2 बार नागपुर नगर निगम से चुनाव जीते। वह नागपुर के सबसे युवा महापौर बने और भारत के दूसरे सबसे युवा महापौर रहे। फड़नवीस 1999 से ही विधानसभा में नागपुर दक्षिण पश्चिम सीट का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं।
अजित सियासी गुर सीखे शरद पवार से
अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को अहमदनगर के देवलाली प्रवरा में एक किसान परिवार में हुआ। अजित एक सख्त प्रशासक हैं और अपने विधानसभा क्षेत्र बारामती में बेहद लोकप्रिय हैं। दादा के नाम से मशहूर अजित ने 1980 के दशक में शरद पवार से राजनीति के गुर सीखे। उन्होंने 1991 में बारामती विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़कर चुनावी राजनीति में कदम रखा। तब से वह लगातार 7 बार इस सीट से जीत रहे हैं। इस बार वह सबसे अधिक 1.65 लाख वोटों से जीते। वह जून 1991 में सुधाकर राव नाइक की सरकार में पहली बार राज्यमंत्री बने। तीन दशक में वे विभिन्न मंत्रालय संभाल चुके हैं। नवंबर 2010 में पहली बार राज्य के उपमुख्यमंत्री बने। उन पर सिंचाई घोटाले के आरोप भी लगे। उनका विवाह महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री पद्मसिंह पाटिल की बहन सुनेत्रा से हुआ। उनके 2 बेटे पार्थ और जय हैं।

“लोगों ने हमें स्पष्ट जनादेश दिया था, लेकिन शिवसेना ने अन्य दलों के साथ गठबंधन करने की कोशिश की, जिसके बाद राष्ट्रपति शासन लगा। महाराष्ट्र को स्थायी सरकार की जरूरत है न कि ‘खिचड़ी’ सरकार की। – देवेंद्र फड़नवीस, मुख्यमंत्री

“24 अक्तूबर को नतीजे आने से लेकर अब तक कोई पार्टी सरकार नहीं बना पा रही थी। महाराष्ट्र में किसानों के मुद्दों समेत कई दिक्कतें थी, इसलिए हमने एक स्थायी सरकार बनाने का फैसला किया।
– अजित पवार, उपमुख्यमंत्री

महाराष्ट्र पर सर्जिकल स्ट्राइक
‘शिवसेना जो कुछ करती है वह सामने होता है, खुल कर करती है। हमारी राजनीति ‘रात्रि खेल चाले’ (रात में खेल) नहीं है। पाकिस्तान के खिलाफ जिस तरह सर्जिकल स्ट्राइक की गई, उसी तरह यह महाराष्ट्र के लोगों पर सर्जिकल स्ट्राइक है और वे इसका जवाब देंगे। सब जानते हैं कि जब छत्रपति शिवाजी महाराज के साथ विश्वासघात किया गया था और पीछे से हमला किया गया था तब उन्होंने क्या किया था। शिवसेना कार्यकर्ता दल बदल की कोशिशें नाकाम कर देंगे।’
-उद्धव ठाकरे, शिवसेना प्रमुख

राज्यपाल शाह के हिटमैन : कांग्रेस
नयी दिल्ली (ट्रिन्यू): कांग्रेस ने कहा कि राज्यपाल ने संविधान के रक्षक के तौर पर नहीं, बल्कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के हिटमैन के तौर पर काम किया। कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि भाजपा ने अवसरवादी अजित पवार को जेल की सलाखों का डर दिखाकर, प्रजातंत्र की सुपारी ले हत्या कर डाली। भाजपा और अजित पवार ने मिलकर दुर्योधन व शकुनि की तरह महाराष्ट्र के जनादेश का चीरहरण कर दिया है। सुरजेवाला ने कहा यह पहला अवसर है कि जब किसी मुख्यमंत्री को चोरी-छुपे शपथ दिलाई गई।

संविधान के अनुसार फैसला : भाजपा
नयी दिल्ली (ट्रिन्यू) : भाजपा ने महाराष्ट्र में राज्यपाल की भूमिका को सही ठहराया है। केंद्रीय मंत्री व भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि राज्यपाल ने संविधान के अनुसार ही फैसला किया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने महाराष्ट्र की जनभावना का सम्मान करते हुए सरकार बनाने की पहल की। उन्होंने कहा कि शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस चोर दरवाजे से देश की वित्तीय राजधानी पर कब्जा करने की साजिश कर रहे थे।


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