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हेल्थ और सिक्योरिटी के इनोवेटिव रास्ते

Posted On October - 6 - 2019

कुमार गौरव अजीतेन्दु

दिल की बीमारियां हमेशा खतरनाक होती हैं, इसलिए अब इनसे लड़ने के लिए भी टेक्नोलॉजी ने अपने कदम आगे बढ़ा दिए हैं जो भविष्य में होने वाले हार्ट अटैक की जानकारी दे रही है। थी-डी प्रिंटिंग हार्ट से ट्रांसप्लांट के लिए लगी कतार को कम करने की कोशिश जारी है। इतना ही नहीं, सर्च इंजन गूगल भी आंखों के जरिए हृदय रोगियों को पहले ही सचेत करने की तैयारी कर रहा है। बता दें कि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से ऐसी तकनीक का विकास कर लिया है जो पांच साल पहले ही हार्ट अटैक के संभावित खतरे के बारे में बता देगी। इस तकनीक में एक बायोमार्कर फिंगर प्रिंट का विकास किया गया है जिसे फैट रेडियोमिक प्रोफाइल (एफआरपी) नाम दिया गया है। एफआरपी, रक्त धमनियों में मौजूद फैट का जेनेटिक एनालिसिस कर भविष्य में पैदा होने वाले खतरों को चिन्हित करेगा। इससे इस बात का पता चल सकेगा कि व्यक्ति को भविष्य में हार्ट अटैक का खतरा हो सकता है या नहीं। इसके अलावा इस्राइल में तेल अवीव यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं को 3डी प्रिंटर के जरिए ऐसा मिनी दिल तैयार करने में सफलता मिली है, जो हूबहू वैसा ही है जो किसी प्राणी का होता है। इसके निर्माण में मानव की कोशिकाओं और बायोलॉजिकल सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि इसका आकार अभी सिर्फ 2.5 सेंटीमीटर है। इनसानों के दिल का आकार लगभग 12 सेंटीमीटर होता है। भविष्य में इस आकार के दिल को प्रिंट करने की तैयारी चल रही है। इससे पहले भी कृत्रिम दिल बनाए गए हैं, लेकिन ये हृदय साधारण ऊतकों (टिशूज) से बनाए गए थे और उनमें रक्त धमनियां भी नहीं थीं। सबसे खास बात तो यह कि गूगल ऐसी योजना पर काम कर रहा है जिसमें आंखों में झांकने भर से इस बात का पता चल सकेगा कि आने वाले सालों में व्यक्ति को दिल की बीमारी हो सकती है या नहीं। इस योजना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल हो रहा है। इसमें रेटिना की तस्वीरों के जरिए व्यक्ति की उम्र, ब्लड प्रेशर और बॉडी मास इंडेक्स का तो पता चलेगा ही, इस बात की भी जानकारी हो सकेगी कि दिल के लिए घातक आदतों (जैसे धूम्रपान) से उसके दिल को कितना खतरा हो सकता है। ऐसे व्यक्ति को हार्ट अटैक होने की कितनी आशंका होगी। करीब कई जानकारियों के आधार पर गूगल का डीप लर्निंग एल्गोरिद्म 3 लाख मरीजों पर इसका सफल ट्रायल भी हो चुका है।
हाथों की नसों से 0.3 सेकेंड में होगी इनसान की पहचान
चीनी कंपनी मीलक्स ने ऐसी तकनीक विकसित है, जिससे अब हाथों की धमनियों से इनसान की पहचान हो सकेगी। यह तकनीक फेस रिकग्निशन से भी तेज परिणाम देती है। इसमें 0.3 सेकेंड में ही धमनियों से इनसान की पहचान हो जाती है। कंपनी ने तकनीक का नाम एयरवेव रखा है। कंपनी का दावा है कि यह दूसरी बायोमीट्रिक प्रणाली से बेहतर और सुरक्षित है। कंपनी के अनुसार, जब फेस रिकग्निशन तकनीक से इनसान की पहचान की जाती है तो चेहरे पर मौजूद 80 से 280 फीचर पॉइंट्स की जांच होती है। लेकिन एयरवेव 0.3 सेकंड में हाथ की हथेली में मौजूद एक मिलियन से ज्यादा माइक्रो-फीचर पॉइंट्स को स्कैन कर लेगा। इसके जरिए व्यक्ति को कोई दूसरा इनसान नकली पहचान बनाकर धोखा नहीं दे सकता।
कंपनी के फाउंडर जेल क्यूंगलू ने बताया कि त्वचा के ठीक नीचे की प्रमुख नसें और कोशिकाएं व्यक्तिगत रूप से सभी में अलग-अलग होती हैं जो एयरवेव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर ही आधारित है। यह हाथ की हथेली के जरिए सूक्ष्म और प्रमुख धमनियों से लेकर कोशिकाओं को स्कैन करने में सक्षम है। स्कैनर पर हाथ रखते ही एक बार में ही इन्हें स्कैन कर लिया जाता है। एयरवेव को 2018 में पेश किया गया था। पिछले एक साल में चीन में ट्रायल चल रहा था और इसे काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिला है।
दक्षिण चीन के गुआंगडोंग प्रांत में कई कैफेटेरिया और सरकारी-सार्वजनिक क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल बढ़ा है। मीलक्स अब इस प्रणाली को जल्द ही मेट्रो ऑपरेटर्स के लिए लाने की तैयारी कर रही है। चीन में इन दिनों ज्यादातर काम कैशलेस और फेस रिकग्निशन तकनीक के जरिए किए जा रहे हैं। ज्यादातर जगहों पर चेहरे की पहचान, क्यूआर कोड और पासवर्ड सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है लेकिन एयरवेव इनसे अधिक बेहतर और सुरक्षित बताया जा रहा है।


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