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हरियाणा के ‘दंगल’ से पहलवानों की तौबा

Posted On October - 12 - 2019

सुनीत धवन/ट्रिन्यू
रोहतक, 1 1 अक्तूबर
हरियाणा के पहलवानों ने चुनावी ‘दंगल’ में नेताओं के साथ उनका बॉडीगार्ड या बाहुबली बनकर जाने से तौबा कर ली है। उनका कहना है कि वे चुनाव में बाहुबली या लठैत के तौर पर किसी पार्टी या नेता की चाकरी नहीं करेंगे। सरकार, मीडिया और जनता द्वारा प्रसिद्ध अखाड़ों के पहलवानों को एक खिलाड़ी के तौर पर मान्यता देने और सम्मान दिये जाने पर वे सभी के आभारी हैं। पहले नेता लोग चुनाव में ‘ताकत’ दिखाने के लिये पहलवानों को यहां रोजगार पर रख लेते थे मगर अब पहलवान अपने खेल पर ही फोकस करना चाहते हैं।
मेहर सिंह अखाड़े के कोच रणबीर ढाका का कहना है कि खिलाड़ियों को बड़े मुकाबलों में मेडल जीतने पर अच्छे-खासे पैसे मिलते हैं। सरकारी नौकरी मिल जाती है और समाज में सोहरत मिलती है।
मीडिया उनको इतनी पब्लिशिटी देता है कि वे युवाओं और उभरते नये खिलाड़ियों के रोल मॉडल बन जाते हैं। ढाका का कहना है कि पिछले 12 साल में उनके अखाड़े से ही 170 पहलवान पुलिस, रेलवे, सेना, नौसेना, वायु सेना और अन्य सरकारी विभागों में नौकरियां पा चुके हैं। उन्होंने माना कि पहले नेता लोग पहलवानों को अपने यहां रख लेते थे और आज भी जो पहलवान खेल में अच्छा नहीं कर पाते वे सेलिब्रिटी या नेता के बॉडीगार्ड बन जाते हैं।

12 राज्यों के 200 पहलवान है मेहर सिंह अखाड़े में
मेहर सिंह अखाड़े की लोकप्रियता का अंदाजा इसी ले लगाया जा सकता है कि यहां करीब 12 राज्यों के 200 पहलवान ट्रेनिंग ले रहे हैं जिसमें पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश शामिल हैं। सहारनपुर के 21 वर्षीय भारत वीर का कहना है कि हाल ही में उसने अंडर-23 में कांस्य जीता है और उसका लक्ष्य विश्व चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करना है। पुणे (महाराष्ट्र) के संग्राम साहुके और पोपट गोड़खे ने भी कहा कि उनकी निगाहें महाराष्ट्र केसरी खिताब पर हैं, किसी नेता का बॉडीगार्ड बनने में नहीं।


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