पराली से धुआं नहीं अब बिजली बनेगी !    विवाद : पत्नी को पीट कर मार डाला !    हरियाणा : कांग्रेस पहुंची चुनाव आयोग !    बाबर की ऐतिहासिक भूल सुधारने की जरूरत : हिन्दू पक्ष !    आतंकियों की घुसपैठ कराने की कोशिश में पाकिस्तान !    आस्ट्रेलियाई महिला टी20 टीम को पुरुष टीम के बराबर मिलेगी इनामी राशि !    पनामा लीक : दिल्ली हाईकोर्ट ने मांगी स्टेटस रिपोर्ट !    हादसे में परिवार के 3 सदस्यों समेत 5 की मौत !    पुलिस स्टेट नहीं बन रहा हांगकांग : कैरी लैम !    प्रदर्शन के बाद खाताधारक की हार्ट अटैक से मौत !    

हरियाणा की चुनावी जंग में एक-दूसरे पर तलवारें भांजते वामदल

Posted On October - 9 - 2019

हरीश लखेड़ा / ट्रिन्यू
नयी दिल्ली, 8 अक्तूबर
हरियाणा में वाम दल जनाधार बढ़ाने के संघर्ष में असली-नकली वामपंथ के विवाद में उलझी हैं। अब विधानसभा चुनाव में भी यह आंतरिक विवाद कायम है। यहां भाकपा और माकपा के अलावा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) और सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट) भी ताल ठोक रही हैं। प्रदेश विधानसभा की 90 सीटों में से भाकपा (माले) मात्र 2 हलकों रतिया और सफीदों से मैदान में हैं, जबकि एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) ने 18 सीटों सोनीपत, गोहाना, राई, बहादुरगढ़, बेरी, गुरुग्राम, बादशाहपुर, भिवानी, तोशाम, कोसली, रेवाड़ी, अटेली, नारनौल, नांगल चौधरी, हांसी, पुंडरी, थानेसर, और असंध में प्रत्याशी उतारे हैं। अन्य दल भी लंबे समय से हरियाणा में सक्रिय हैं।
चुनाव में ये दोनों अलग-अलग ही मैदान में डटे हैं। जबकि दो अन्य कम्युनिस्ट पार्टियां भाकपा और माकपा गठबंधन के तहत 7-7 सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं। खास बात यह है कि प्रदेश के ये चारों प्रमुख वामदल विभिन्न जन आंदोलनों में तो एक साथ संघर्ष करते नजर आते हैं, लेकिन चुनावी जंग में एक-दूसरे के खिलाफ तलवारें भांज रहे हैैं। भाकपा (माले) और एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) चुनाव मैदान में भी भाकपा और माकपा को सरकारी वामदल कह रहे हैं। भाकपा (माले) के प्रदेश सचिव प्रेम सिंह गहलावत कहते हैं कि भाकपा और माकपा सरकारी वामदल हैं, क्योंकि वे कांग्रेस को सरकार बनाने में मदद करते रहते हैं। अहलावत ने कहा कि असली वामपंथी दल (भाकपा माले) है। माकपा ने खुद को वामदलों का बड़ा भाई घोषित कर रखा है, जबकि वामपंथ में सभी बराबर होते हैं, यह माकपा की सामंती सोच है। वहीं एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) के प्रदेश सचिव सत्यवान के अनुसार भाकपा और माकपा अब लोकतांत्रिक और वामपंथी सोच से हट गए हैं। वे कांग्रेस के पीछे चलते हैं। वे जन आंदोलन का रास्ता छोड़कर वामपंथ से मुंह मोड़ चुकी हैं। इसलिए हम चुनाव में भाकपा और माकपा की असलियत भी जनता को बता रहे हैं।
हालांकि दूसरी ओर माकपा के हरियाणा प्रदेश सचिव सुरेंद्र मलिक कहते हैं कि हमारी प्राथमिकता भाजपा को हराना है। इसलिए जहां भी कोई दल भाजपा को हराने की स्थिति में होता है, हम साथ देते हैैं। कांग्रेस के साथ हमने कभी भी घोषित चुनाव गठबंधन नहीं किया। उन्होंने कहा कि माकपा की मेहनत से ही 1987 के चुनाव में टोहाना से पार्टी के हरपाल सिंह जीत कर विधानसभा पहुंचे थे। मलिक ने कहा कि टोहाना से इसी नाम के एक अन्य नेता हरपाल सिंह भी विधायक बने, लेकिन वे कांग्रेस से थे। उन्होंने कहा कि माकपा के हरपाल सिंह हमेशा ही अपने दल में रहे।

वामपंथी पार्टियों का वोट प्रतिशत 2 अंकों तक भी नहीं पहुंच पाता
बहरहाल, 3 दशक से विधानसभा की दहलीज तक पहुंचने की बाट जो रहे वामदल अब असली और नकली के विवाद में उलझे हैं। खुद को असली और दूसरे को नकली बताते हुए वे भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए मैदान में हैं, हालांकि उनको मिले वोटों का प्रतिशत 2 अंकों तक भी नहीं पहुंच पाता है। भाकपा (माले) और एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) ने भाजपा और कांग्रेस से समान दूरी बनाए रखी है, जबकि भाकपा और माकपा का पहला लक्ष्य भाजपा को हराना है, इसके लिए वे अप्रत्यक्ष तौर पर कांग्रेस की मदद भी करते रहते हैं। इस बार भी वे प्रदेश की बाकी 76 सीटों पर उन दलों को समर्थन देने की तैयारी में हैं जो भाजपा को हराने की स्थिति में होंगे। जबकि बाकी दो वामदल चुनाव में कांग्रेस समेत किसी को भी समर्थन नहीं दे रहे हैं।

 


Comments Off on हरियाणा की चुनावी जंग में एक-दूसरे पर तलवारें भांजते वामदल
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
Both comments and pings are currently closed.

Comments are closed.

Powered by : Mediology Software Pvt Ltd.