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हनुमान जन्मभूमि, ऋषि कपिलमुनि की तपोभूमि में छिड़ी ‘इमेज वार’

Posted On October - 17 - 2019

दिनेश भारद्वाज
ट्रिब्यून न्यूज सर्विस
कैथल : शहर के बड़े बाजार हों या फिर अनाजमंडी में आढ़तियों की दुकान। गांव की गलियां हों या फिर चौक-चौराहों पर बैठे बुजुर्गों के ताश खेलने के ठिकाने। हर तरफ एक ही चर्चा है कि युधिष्ठिर की नगरी कहे जाने वाले कैथल का ‘सिकंदर’ इस बार कौन होगा। लोग बोलते तो हैं लेकिन पहले तोलते हैं। ऋषि कपिलमुनि की तपोभूमि भी इसे कहते हैं। कपिलमुनि के नाम पर ही इसका नाम कैथल बना। किंवदंतियों को सही मानें तो यह हनुमान की जन्मस्थली भी रहा। बहरहाल, इन पौराणिक बातों और घटनाओं के बीच कैथल में चुनावी संग्राम छिड़ा है। कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में शुमार रणदीप सिंह सुरजेवाला अपनी जीत की हैट्रिक के लिए सियासी रण में जुटे हैं। वहीं सत्तारूढ़ भाजपा ने चौटाला सरकार में विधायक रहे लीलाराम गुर्जर पर दांव खेला है। इलाके में गुर्जर वोट बैंक को नज़र में रखते हुए भाजपा ने कैथल में सुरजेवाला को हराने के लिए ‘चक्रव्यूह’ रचा है। चुनावों में माइक्रो मैनेजमेंट के माहिर माने जाते सुरजेवाला इस चक्रव्यूह को तोड़ पाएंगे या नहीं, इस पर सभी की नज़रें हैं। रोचक बात यह है कि कैथल में राष्ट्रीय मुद्दों के साथ स्थानीय मुद्दों को जोर-शोर से उठाया जा रहा है। विकास भी मुद्दा है। नौकरियों को लेकर भी बात हो रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि कैथल का चुनाव धीरे-धीरे ‘इमेज वार’ में बदल रहा है। ऐसे में भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी जैसे मुद्दे और आरोप-प्रत्यारोप भी सुर्खियों में हैं। कांग्रेस सरकार में लगातार 10 वर्षों तक कैबिनेट मंत्री रहे सुरजेवाला अब कांग्रेस के मीडिया विभाग के चेयरमैन हैं। राष्ट्रीय राजनीति में भी सुरजेवाला बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं। पिछले लगभग पंद्रह वर्षों से कैथल पर सुरजेवाला परिवार का ही दबदबा है। 2005 में उनके पिता शमशेर सिंह सुरजेवाला ने यहां से चुनाव लड़ा और जीते। इसके बाद 2009 में खुद रणदीप मैदान में आये और 2014 में लगातार दूसरी बार चुनाव जीता। मतदाताओं का मन टटोला गया तो एक बात स्पष्ट थी कि वोट डालने से पहले वोटर दोनों प्रत्याशियों के बारे में अच्छे से समझ रहे हैं। दोनों प्रत्याशी सत्ता में रहे हैं। ऐसे में उनके कार्यकाल और काम करने के तौर-तरीकों को जांचा-परखा जा रहा है। चंदाना गेट के रमेश कुमार का कहना है कि सुरजेवाला ने मंत्री रहते हुए शहर में बहुत विकास करवाया। वहीं शक्ति नगर के राकेश का कहना है कि भाजपा में कई युवाओं को बिना सिफारिश के नौकरी लगी है। उनका कहना है, बेरोजगारी बहुत है। इसे दूर करने के लिए बड़े कदम उठाने होंगे। बुढ़ाखेड़ा गांव के हरभगवान कहने लगे, अब हवा बदल रही है। लोकसभा और विधानसभा चुनावों में अंतर है। किसी को भी वोट देने से पहले मतदाता बहुत सोचेंगे। ग्योंग गांव के रामकिशन और नैना के राहुल का कहना है कि आर्टिकल-370 खत्म करने से गांव के लोग खुश हैं लेकिन अब सरकार को हरियाणा के मुद्दों पर बात करनी चाहिए।
भाजपा के टारगेट वाली अहम सीटों में टॉप पर
सत्तारूढ़ भाजपा के टारगेट वाली अहम सीटों में कैथल भी टॉप पर है। इसीलिए भाजपा ने इस सीट पर विजयी हासिल करने के लिए पूरा जोर लगाया हुआ है। 2000 से 2005 की चौटाला सरकार में भाजपा के मौजूदा प्रत्याशी लीलाराम गुर्जर ही यहां से विधायक थे। 2 लाख 2 हजार मतदाताओं वाले इस हलके में सबसे अधिक 45 हजार के करीब जाट वोटर माने जाते हैं। इसके बाद पंजाबी, बनिया, ब्राह्मण, सैनी व गुर्जर वोटर हैं, जो चुनावों में हार-जीत तय करते हैं।


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