दो गुरुओं के चरणों से पावन अमर यादगार !    व्रत-पर्व !    ऊंचा आशियाना... आएंगी ढेर सारी खुशियां !    आत्मज्ञान की डगर !    झूठ से कर लें तौबा !    इस समोसे में आलू नहीं !    पुस्तकों से करें प्रेम !    बिना पानी के स्प्रे से नहाएंगे अंतरिक्ष यात्री !    मास्टर जी की मुस्कान !    अविस्मरणीय सबक !    

स्थाई समाधान तलाशें

Posted On October - 14 - 2019

ब्लॉग चर्चा

नवीन वर्मा
देश साल में चार महीने सूखे की चपेट में रहता है तो चार महीने बाढ़ में डूबता है। हर बर्ष हजारों करोड़ का नुकसान होता है। लाखों लोग प्रभावित होते हैं और हजारों लोग मारे जाते हैं। सूखे के समय टैंकर से पानी पहुंचाकर और बाढ़ के समय हेलीकाप्टर से खाना फेंककर सरकारें यह समझ लेती हैं कि उसने बहुत महान काम कर दिया है। बाढ़ और सूखे की यह समस्या हर साल की समस्या है और इसका स्थायी हल निकालना बहुत जरूरी है। बरसात में इतना पानी बरसता है कि अगर उसका 5 फीसदी भी स्टोर कर लिया जाए तो सालभर पानी की कमी नहीं होगी, लेकिन हम उस पानी को ऐसे ही नदियों में बह जाने देते हैं और नदियां भयावह अंदाज में उफनती हैं। अब समस्या तो बता दी, समाधान भी तो चाहिए। असल में बाढ़ और सूखे की समस्या का स्थायी हल यही है कि एक तो वर्षा के जल को संग्रह किया जाए और दूसरा, देश की सभी नदियों को नहरों के माध्यम से जोड़ दिया जाए। वर्षा जल को संग्रह करने के दो उपाय हैं- एक तो पारंपरिक तालाब, जिनमें पानी भर जाये और धीरे-धीरे रिसते हुए भूजल में मिल जाए। जमीन घिर जाने के कारण तालाब के लिए स्थान नहीं बचा, लेकिन सड़क तथा बड़ी छतों पर गिरने वाले पानी को वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के द्वारा ग्राउंड वाटर को रीचार्ज किया जा सकता है। ऐसा करने से धरती में भूजल का स्तर ऊपर आ जाएगा, जो सालभर काम आएगा।
दूसरा उपाय है नदियों को जोड़ना। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने इस अभियान की शुरुआत की थी। उनका विचार था कि यदि देश की नदियों पर डैम बनाकर उनको नहरों के माध्यम से आपस में मिला दिया जाए तो बाढ़ और सूखे का हल किया जा सकता है। देश में एक साथ बाढ़ और सूखा नहीं पड़ता। बाढ़ आने पर पानी को नहरों के माध्यम से दूर भेजा जा सकता है तथा सूखा पड़ने पर उन इलाकों से पानी मंगवाया जा सकता है जहां पर पानी उपलब्ध हो। इस वक्त जम्मू-कश्मीर में किशनगंगा प्रोजेक्ट चल रहा है। इसके अलावा सिंधु, झेलम, रावी तथा कुछ छोटी नदियों को जोड़कर उनका पानी पंजाब में और पंजाब से राजस्थान, गुजरात तथा महारष्ट्र तक ले जाने का बिचार है। नदी जोड़ो अभियान को मुकाम तक पहुंचाया जाना चाहिए। संविधान में संशोधन कर नदियों एवं उनके जल पर किसी राज्य का नहीं बल्कि सारे देश का अधिकार माना जाए. नदियों को जोड़ने की व्यापक और सुरक्षित प्रणाली को विकसित कर सारे देश में नहरों का जाल बिछाया जाए।

साभार : नवीनएलडीएच डॉट ब्लॉगस्पॉट डॉट कॉम


Comments Off on स्थाई समाधान तलाशें
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
Both comments and pings are currently closed.

Comments are closed.

Powered by : Mediology Software Pvt Ltd.