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सुप्रीम कोर्ट ने और पेड़ काटने से रोका

Posted On October - 8 - 2019

मुंबई में सोमवार को आरे कालोनी जाने वाले लोगों के पहचान पत्र जांचते पुलिस कर्मी। -प्रेट्र

नयी दिल्ली, 7 अक्तूबर (एजेंसी)
सुप्रीमकोर्ट ने मुंबई की आरे कॉलोनी में ‘मेट्रो कार शेड’ बनाने के लिए पेड़ काटे जाने पर फिलहाल रोक लगा दी है। जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस अशोक भूषण की विशेष पीठ ने कहा कि वह पूरी स्थिति की समीक्षा करेंगे । साथ ही पीठ ने इस संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई के लिए 21 अक्टूबर की तारीख तय की। पीठ ने कहा, ‘अब कुछ भी न काटें।’ पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यकर्ता और स्थानीय निवासी पेड़ों को काटे जाने का विरोध कर रहे हैं। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि अगर कोई गिरफ्तारी के बाद अब तक रिहा नहीं किया गया है तो उसे निजी मुचलका भरने के बाद रिहा कर दिया जाए। सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार ने पीठ से कहा था कि आरे में पेड़ों की कटाई के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए सभी लोगों को रिहा कर दिया गया। पूरे रिकॉर्ड की जानकारी न होने की सॉलिसिटर जनरल की अपील पर गौर करते हुए न्यायालय ने कहा कि मामले पर फैसले तक आरे में कुछ भी काटा नहीं जाएगा।
बहरहाल, महाराष्ट्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना पर विचार करने के बाद पीठ ने कहा कि आरे कोई विकास क्षेत्र नहीं है और न ही पर्यावरण के प्रति संवेदनशील क्षेत्र है, जैसा कि याचिकाकर्ता ने दावा किया है। कोर्ट ने रविवार को फैसला किया था कि पेड़ों को काटे जाने के खिलाफ विधि के छात्र रिषव रंजन द्वारा प्चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को लिखे खत को जनहित याचिका के तौर पर पंजीकृत किया जाए। बंबई हाईकोर्ट ने 4 अक्तूबर को ‘मेट्रो कार शेड’ के लिए 2,600 से अधिक पेड़ों को काटने की मंजूरी दे दी थी।
धारा 144 में ढील
मुम्बई : पेड़ों की कटाई के दौरान पुलिस कर्मियों को रोकने और उनपर हमला करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए 29 प्रदर्शनकारियों को जमानत मिलने के बाद सोमवार को रिहा कर दिया गया। मुम्बई पुलिस ने आरे कॉलोनी और उसके आसपास के इलाके में लगी निषेधाज्ञा में भी ढील दी है।
परियोजना प्रमुख को जिम्मेदार ठहराएं
सुप्रीमकोर्ट द्वारा आरे कॉलोनी में पेड़ काटने पर रोक के कुछ घंटों बाद एक कार्यकर्ता ने मांग की है कि पिछले सप्ताह रात में पेड़ों की कटाई करने के लिए मेट्रो परियोजना के प्रमुख को जिम्मेदार ठहराया जाए। शहर स्थित काश फाउंडेशन के न्यासी प्रो. अवकाश जाधव ने कहा कि जहां पेड़ काटे गए हैं, उस जगह के निरीक्षण के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया जाना चाहिए और वास्तविक नुकसान का पता लगाना चाहिए।


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