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सियासी रण में ‘लाल परिवारों’ की प्रतिष्ठा दांव पर

Posted On October - 8 - 2019

दिनेश भारद्वाज/ ट्रिन्यू
चंडीगढ़, 7 अक्तूबर
हरियाणा की सियासत पर लंबे समय तक राज करने वाले तीनों ‘लाल परिवारों’ की प्रतिष्ठा दांव पर है। चौ. देवीलाल, बंसीलाल और भजनलाल के परिवार के सदस्य विधानसभा चुनाव में ताल ठोक रहे हैं। रोचक बात यह है कि इन परिवारों के सदस्य सत्तारूढ़ भाजपा से लेकर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस, जननायक जनता पार्टी और इंडियन नेशनल लोकदल ही नहीं, निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर भी चुनावी रण में हैं।
देवीलाल के पौत्र एवं इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला के छोटे बेटे अभय सिंह चौटाला ऐलनाबाद से चुनावी रण में हैं। अभय यहां से मौजूदा विधायक भी हैं और पिता व भाई के जेल जाने के बाद से पार्टी की कमान उन्हीं के हाथों में है। भाजपा ने उन्हें यहां बड़ी चुनौती देते हुए पवन बैनीवाल को मैदान में उतारा है। वहीं, ऐलनाबाद से सटे डबवाली हलके में देवीलाल के पुत्र चौ. जगदीश सिंह के बेटे आदित्य देवीलाल चौटाला भाजपा के टिकट पर चुनावी रण में हैं।
कांग्रेस ने उनके खिलाफ देवीलाल परिवार के ही डॉ. केवी सिंह के बेटे अमित सिहाग को चुनावी रण में उतारा है। यहां से 2014 में इनेलो के टिकट पर जीतीं देवीलाल परिवार की पुत्रवधू व अजय सिंह चौटाला की पत्नी नैना सिंह चौटाला इस बार डबवाली के बजाय दादरी जिले के बाढड़ा हलके से जननायक जनता पार्टी (जजपा) की तरफ से चुनाव लड़ रही हैं। ऐसा माना जा रहा है कि पंजाब के पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल ने परिवार के बड़े होने के नाते बीच-बचाव किया और एक शर्त के तहत नैना को डबवाली से शिफ्ट किया गया। नैना चाैटाला के बड़े बेटे और जजपा नेता दुष्यंत सिंह चौटाला ने बांगर बेल्ट के जींद जिले की उचाना कलां सीट से दावा ठोका है।
नैना के आने से बाढड़ा में मुकाबला रोचक हो गया है। यहां पर दो लाल परिवार भी आमने-सामने हैं। कांग्रेस ने बंसीलाल के बड़े बेटे रणबीर सिंह महेंद्रा को मैदान में उतारा है। वहीं, भाजपा से मौजूदा विधायक सुखविंद्र सिंह मांढी मैदान में हैं। मांढी भी इलाके के बड़े सियासी घराने से संबंध रखते हैं। वहीं, दुष्यंत के चुनाव लड़ने से उचाना कलां में भी मुकाबला कड़ा हो चुका है। उचाना कलां को पूर्व केंद्रीय मंत्री चौ. बीरेंद्र सिंह की परंपरागत सीट माना जाता है। हालांकि 2009 के विधानसभा चुनाव में इनेलो सुप्रीमो ओपी चौटाला ने उचाना से ही बीरेंद्र सिंह को शिकस्त दी थी। 2014 में यहां कड़े मुकाबले में दुष्यंत चौटाला को हरा चुकीं बीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेमलता भाजपा के टिकट पर फिर चुनावी मैदान में उनके सामने हैं।
वहीं, बंसीलाल की पुत्रवधू और स्वर्गीय सुरेंद्र सिंह की पत्नी किरण चौधरी लगातार चौथी बार भिवानी के तोशाम हलके से कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। किरण के मुकाबले भाजपा ने शशि परमार को चुनावी रण में उतारा है। माना जाता है कि परमार को टिकट दिलवाने में भिवानी-महेंद्रगढ़ के सांसद धर्मबीर सिंह की अहम भूमिका रही। इस सीट पर प्रदेशभर की नजरें लगी हैं। बंसीलाल के दामाद और पूर्व विधायक सोमबीर सिंह पर भी कांग्रेस ने भिवानी जिले के ही लोहारू हलके से दांव खेला है। लोहारू में भाजपा ने जेपी दलाल को प्रत्याशी बनाया है। वहीं, जजपा ने महिला कार्ड खेलते हुए अल्का आर्य को चुनावी मैदान में उतार कर मुकाबले को रोचक बनाने की कोशिश की है।
सिरसा जिले की रानियां सीट पर भी दिलचस्प मुकाबला होता नजर आ रहा है। देवीलाल के पुत्र और पूर्व सांसद चौ. रणजीत सिंह बतौर निर्दलीय प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। रणजीत सिंह लंबे समय से कांग्रेस में सक्रिय रहे, लेकिन टिकट न मिलने पर उन्होंने पार्टी छोड़ दी। कांग्रेस ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर के करीबी विनित काम्बोज को रानियां से टिकट दिया है। वहीं, भाजपा ने रानियां हलके में अपने पुराने वर्करों व नेताओं पर भरोसा करने के बजाय यहां से इनेलो विधायक रहे रामचंद्र काम्बोज पर दांव खेला है। उन्होंने करीब दो माह पहले ही विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर भाजपा ज्वाइन की थी।
प्रदेश के तीसरे और सबसे लंबे समय तक सीएम रहे भजनलाल के छोटे बेटे कुलदीप बिश्नोई परिवार की परंपरागत सीट आदमपुर से चुनाव लड़ रहे हैं। यह विधानसभा हलका 1968 से लगातार भजन परिवार को ही चुनाव जिताता आया है। भाजपा ने अपनी ‘टिक-टॉक स्टार’ एवं महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष सोनाली फौगाट को यहां से चुनाव में उतारा है। हालांकि, सोनाली नलवा हलके से टिकट मांग रहीं थी। कुलदीप के बड़े भाई एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन पंचकूला से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। यहां भाजपा के मौजूदा विधायक ज्ञानचंद गुप्ता चुनाव लड़ रहे हैं। भजन परिवार के ही चौ. दूड़ाराम फतेहाबाद से भाजपा टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। दूड़ाराम ने कुछ दिन पहले ही भाजपा ज्वाइन की थी।


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