अभी नहीं बताया-परिवार से कब मिलेंगे अंतिम बार !    भाजपा को सत्ता से बाहर चाहते थे अल्पसंख्यक : पवार !    सीएए समर्थक जुलूस पर पथराव, हिंसा !    टेरर फंडिंग : पाक के प्रयासों को चीन ने सराहा !    177 हथियारों के साथ 644 उग्रवादियों का आत्मसमर्पण !    चुनाव को कपिल मिश्र ने बताया भारत-पाक मुकाबला !    रोहिंग्या का जनसंहार रोके म्यांमार : आईसीजे !    डेमोक्रेट्स ने राष्ट्रपति ट्रम्प के खिलाफ रखा पक्ष !    आईएस से जुड़े होने के आरोप में 3 गिरफ्तार !    आग बुझाने में जुटा विमान क्रैश, 3 की मौत !    

सच बोलने का इनाम

Posted On October - 20 - 2019

मधु

मेरा नये स्कूल में पहला दिन था। मेरा मन बहुत घबराया हुआ था क्योंकि नया माहौल, नये बच्चे, नयी क्लास और नये शिक्षक व शिक्षिकायें। जाने सब कैसे होंगे? स्कूल की बस में बैठते समय मां ने हिदायत दी थी, ‘शांत रहना! कम बातें करना! कोई शैतानी मत करना! देखो पहला इंप्रेशन हमेशा बना रहता है।’ मैंने हां कह के सिर हिलाया और बस में डरते हुए बैठ गई। जब क्लास में पहुंची तो थोड़ी देर में ही समझ आ गया था कि यह क्लास काफी शैतान बच्चों से भरी पड़ी है। बार-बार शोर होने पर सब टीचर बच्चों को डांट लगा रही थी। मैं खाली सीट पर बैठ गई। फर्स्ट हाॅफ तक मेरे काफी फ्रेंड्स बन गए थे। तभी प्रिंसिपल मैम ने हमारी सब्जेक्ट टीचर को किसी काम से बुलाया। हिदायत देकर वह चली गई। लेकिन पूरी क्लास शोर करने लगी और कुछ बच्चे बॉल से खेलने लगे। एक बच्चे ने मजाक-मजाक में वह बॉल मेरी तरफ उछाल दी और मुझसे वापस करने के लिए कहा। उसे बॉल वापिस दे रही थी कि वह बॉल उसके हाथ में जाने की जगह खिड़की पर लग गई। जिससे खिड़की का शीशा टूट गया। कांच के टूटने की आवाज से मैम भागी -भागी आई और सबको डांटने लगी, ‘बताओ यह कांच किसने तोड़ा? सच-सच बताओ। वरना आज मैं किसी को भी घर नहीं जाने दूंगी।’ उनको इतना गुस्सा करते हुए देख, सभी डर गए। किसी में भी सच बोलने की हिम्मत नहीं थी। इसी बीच मैंने कहा -मैम! यह शीशा मुझसे टूटा है। और उनको सारी बात बता दी। मैम क्लास में रखी हुई किताबों की अलमारी की तरफ गई और वहां से एक बॉक्स निकाल कर लायीं।

उस बॉक्स देखते ही मैैं डर गयी कि आज मेरा पहला दिन है, उसकी शुरुआत मार से होगी तो क्या होगा? तभी मैम ने मेरे हाथ में वह बाॅक्स देते हुए कहा, ‘ये लो तुम्हारा इनाम! यह शीशा तोड़ने की सजा नहीं है; यह सच बोलने का इनाम है।’ उस दिन मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वह दिन आज भी मुझे याद है। उस दिन की याद आते ही मेरे चेहरे पर अपने आप मुस्कुराहट आ जाती है। स्कूल का पहला दिन भुलाए नहीं भूलता।


Comments Off on सच बोलने का इनाम
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
Both comments and pings are currently closed.

Comments are closed.

Powered by : Mediology Software Pvt Ltd.