उड़ान भरते समय विमान में लगी आग, यात्री सुरक्षित !    वैध वीजा न होने की पुष्टि !    पाकिस्तानी सेना की पुंछ में गोलीबारी !    मदरसा ढहा, 4 बच्चों की मौत !    लुटेरों की सूचना देने वालों को 5 लाख के इनाम की घोषणा !    सरकार उठाएगी घायल छात्रों के इलाज का खर्च !    खाने के लिए मची भगदड़, 20 मरे !    शिमला में भूकंप के झटके, जान-माल का नुकसान नहीं !    रक्षा अध्ययन संस्थान को पर्रिकर का नाम !    पंजाब मंत्रियों ने कहा अफसर लगा रहे अड़ंगा !    

शत्रु मर्दन और शस्त्र पूजन

Posted On October - 9 - 2019

तिरछी नज़र

रमेश जोशी
आज तोताराम सुबह की बजाय शाम को चार बजे आया तो माथे पर बड़ा-सा लाल तिलक, हाथ पर बंधा हुआ मोटा-सा कलावा, केसरिया बाना और नाक के नीचे पृथ्वीराज चौहान जैसी घनी-काली मूंछें।
हमने कहा—तोताराम हम तो समझ रहे थे शायद तुझे रामलीला में कोई रोल मिल गया है, इसलिए सुबह से मेकअप करवाने पहुंच गया है। आखिर बंदर-भालू बनाने में दो-पांच घंटे तो चाहिये ही। राजनीति की बात और है। वह तो दो-चार जुमलों से ही अच्छे-भले आदमी को बन्दर-भालू ही क्या, मानव-बम तक बना देती है।
बोला—अब राजनीति के बन्दर बनने की उम्र गुज़र गई।
हमने कहा—लालसा और तृष्णा मरते दम तक आदमी का पीछा नहीं छोड़ती। निर्देशक मंडल में बैठा बूढ़ा भी खुद नहीं तो बेटे, पोते, बीवी किसी को ही टिकट दिलाने के लिए बन्दर का मुखौटा और पूंछ लगाकर उछलने लगता है। तूने आज अपनी सजावट, छवि, आन-बान और शान बलिदानी राजपूत की-सी बना रखी है? एक छोटा-सा चाकू, एक लाठी और ढीली मूठ की आधी टूट चुकी तलवार रखते हुए बोला— शस्त्र-पूजा की तैयारी में कुछ तो समय लगता ही है। हमने कहा—तो यह है तेरा शस्त्र-भण्डार? इस सामग्री से तो एक मुर्गी को हलाल करना भी संभव नहीं है।
बोला—यह तो प्रतीकात्मक है।
हमने कहा—वास्तविक युद्ध में प्रतीकों से काम नहीं चलता। वास्तविक महिषासुर का वध वातानुकूलित पंडाल में डांडिया रास रमने से नहीं हो सकता। उसके लिए पीछे के सत्य को समझना पड़ता है। दुर्गा और महिषासुर का सत्य यह है कि सब नि:स्वार्थ भाव से मिलें, संगठित हों और शत्रु से निपटें। यदि शस्त्र-पूजा ही करनी थी तो सुबह आता। यह कोई पूजा का समय है? बोला—इस समय फ्रांस में पूजा का ही समय हुआ है। हमने कहा—तुझे फ्रांस से क्या मतलब है? हम तो भारत में हैं। बोला—इस समय राजनाथ जी फ्रांस में राफाल विमान की पूजा कर रहे होंगे। यही शस्त्र-पूजा का सर्वोत्तम मुहूर्त है।
हमने कहा—पैसों से तो हथियार कोई भी खरीद सकता है। असली अस्त्र-शस्त्र तो अभ्यास, तपस्या, गुरु और देवों के आशीर्वाद से पाए जाते हैं। पिछले दो हजार साल में इस देश ने क्या कर लिया? जो भी आया काबिज़ हो गया। फिर हथियारों को चलाना भी तो आना चाहिए। शिव ने त्रिशूल, विष्णु ने सुदर्शन, अर्जुन ने गांडीव, हनुमान ने गदा किसी फ्रांस-अमेरिका से नहीं ख़रीदे थे, अपने तप व चरित्र-बल से हासिल किए थे। बोला— जैसे भी हैं, ये मेरे शस्त्र हैं।
हमने कहा—शास्त्रों में तो कहा गया है – क्षमा वीरस्य भूषणम
बोला—क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो
उसको क्या जो दंतहीन विषहीन विनीत सरल हो।
क्षमा के बारे में जीत के बाद सोचा जाता है। देश-दुनिया में जो वातावरण बन रहा है उसमें जिसे देखो वही ‘मार दूंगा, काट दूंगा’ से कम पर बात ही नहीं कर रहा है। ऐसे में शस्त्र-पूजा तो करेंगे ही।


Comments Off on शत्रु मर्दन और शस्त्र पूजन
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
Both comments and pings are currently closed.

Comments are closed.

Manav Mangal Smart School
Powered by : Mediology Software Pvt Ltd.