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विदेशी हीरोइन फीकी होती चमक

Posted On October - 12 - 2019

विदेशों से कई नायिकाएं बॉलीवुड में अच्छी तरह से स्थापित तो हो गई हैं लेकिन फिर भी हिन्दी फिल्मों में उन्हें कभी बेहतरीन एक्ट्रेस का तमगा हासिल नहीं हो पाया। कारण है भाषायी भिन्नता, हिन्दी में डायलॉग न बोल पाना। कड़े प्रशिक्षण के बावजूद ये अभिनेत्रियां अपना लहज़ा नहीं सुधार पाईं। शुरुआत में इनके लिये दर्शकों में भी दीवानगी देखी जाती थी लेकिन बीते कुछ सालों में उनकी पसंद बदल गई है। यही वजह है कि ज्यादातर फिल्मों में विदेशी अभिनेत्रियां केवल आइटम गर्ल्स बनकर रह गई हैं। फिल्म हीरो के दम पर चल भी जाये लेकिन इन एक्ट्रेस का काम फिल्मों में केवल ग्लैमर भरना रह गया है। लगता है अब देसी फिल्मों में विदेशी हीरोइनों का क्रेज़ घटने लगा है।

असीम चक्रवर्ती

अब कनाडा में जन्मी और पली-बढ़ी डांसर-अभिनेत्री नोरा फतेही ने आहिस्ता-आहिस्ता भारतीय फिल्मों में अपने पैर जमाने शुरू कर दिये हैं। वह शायद इस बात को अच्छी तरह से समझ गई हैं कि हिंदी फिल्मों में यदि अपना मुकाम बनाना है तो यहां के तौर-तरीके उन्हें जल्द से जल्द सीखने होंगे। इसलिए इन दिनों नोरा फतेही अपनी तरफ से ज़ोरदार तैयारी कर रही है। उन्होंने अब ठीक-ठाक हिंदी बोलना शुरू कर दिया है। वैसे कुछेक अपवादों को छोड़ दें तो ज्यादातर अभिनेत्रियां प्राथमिक तैयारी के साथ फिल्मों में आती हैं, जिसमें एक्टिंग की थोड़ी -बहुत समझ के साथ ही हिंदी का समुचित ज्ञान और नृत्य शिक्षा शामिल होती है। स्क्रीन प्रेज़ेंस के लिए बाकी दूसरी बातें वह शूटिंग के दौरान सीखती हैं।

सिर्फ ग्लैमर पर भरोसा
जहां तक विदेशी तारिकाओं का सवाल है, ज्यादातर हीरोइनें पैसे कमाने के उद्देश्य से सिर्फ अपने ग्लैमर के भरोसे रहती हैं। यह बात ठीक है कि भारतीय हीरोइन की तुलना में उन्हें हर मामले में यहां कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है क्योंकि हिंदी फिल्मों का सारा सेटअप उनके लिए बहुत अनजान होता है। ऐसे में हिंदी टीचर के अलावा सहयोगी कलाकार और निर्देशक की मदद से वह हिंदी के साथ-साथ बालीवुड के सारे तौर-तरीके सीखने की कोशिश करती हैं। इसके एक अच्छे उदाहरण के तौर पर उम्रदराज अभिनेत्री हेलेन का नाम लिया जा सकता है। कभी बर्मा में जन्मी हेलन का फिल्मी ज्ञान बहुत शून्य था। हेलन बताती है, ‘मैंने शुरू-शुरू में हिंदी के एक पंडित जी की सेवाएं लीं, अपने सीनियर कलाकारों से यह सीखा कि कैमरे के सामने कैसे आया जाता है। दादामुनि ने मुझे समझाया कि हिंदी सीखना बहुत आसान है। मैंने जल्द ही टूटी-फूटी हिंदी बोलना शुरू कर दिया। उन दिनों मैं हिंदी सीखने के लिए ही लोगों से हिंदी में ही बात करती थी।’

सिखाने वाले कई

अधेरी के बैरिस्टा में अक्सर मिल जाने वाले हिंदी-उर्दू के अच्छे जानकार जमाल हैदर पिछले कई वर्षों से विदेश से आयी अभिनेत्रियों को हिंदी-उर्दू का पाठ पढ़ा रहे हैं। जब उनसे मिला तो वह कनाडा से आयी एक गायिका-अभिनेत्री नताली को हिंदी सिखा रहे थे। दूसरी ओर उनकी एक स्टूडेंट एली एबराम काफी सीखने के बावजूद हिंदी फिल्मों में कोई जगह नहीं बना पाई है। वैसे सलमान खान के स्पाेर्ट के चलते उन्हें थोड़ा-बहुत काम मिलता रहता है। एली बताती है, ‘विदेश में रहने के दौरान ही इंडिया और यहां की हिंदी फिल्मों के प्रति मेरा एक खास झुकाव रहा है। मैंने अपनी सारी तैयारी उसी ढंग से की है। बहुत कम उम्र से ही मैंने स्टॉकहोम में हिंदी फिल्में देखना शुरू कर दिया था। इसलिए तभी से हिंदी फिल्मों की सारी स्टाइल को मैंने एडॉप्ट करना शुरू कर दिया था। फिर जब मुंबइया फिल्मों में काम करने का मन बनाया तो बाकायदा तभी से लैंग्वेज, एक्टिंग और डांस की क्लासेज शुरू कर दी। इसलिए मैं अभी तक हिंदी फिल्मों में काम कर रही हूं।

फिल्मी शिक्षा से बात नहीं बनी

कटरीना, जैकलीन आदि कुछेक विदेशी तारिकाएं सलमान खान की तमाम गाइडेंस और स्पोर्ट के बावजूद हिंदी फिल्मों में अपना कोई आधार नहीं बना पाई हैं। अभी भी इन्हें सिर्फ शो पीस समझा जाता है। वैसे फिल्म इंडस्ट्री में एक्टिंग और डांस के अलावा शिक्षा देने के लिए कई टीचर मौजूद हैं। सही संवाद अदायगी सिखाने वाले विकास कुमार, आनंद मिश्रा जैसे टीचर भी मौजूद हैं। ये टीचर पार्ट टाइम हिंदी की क्लास लेने के साथ ही सितारों को सही ढंग से डायलाॅग बोलना भी सिखाते हैं। ऐसे ही एक टीचर वीपी सर की क्लास बहुत मशहूर है। ज़रूरत पड़ने पर वह इन विदेशी तारिकाओं को घर में जाकर भी सिखाते हैं। वीपी कहते हैं, ‘मैंने रोमन में सारे कठिन संवाद तैयार कर रखे हैं। जिसका अर्थ अंग्रेजी में भी लिखा होता है। पहले मैं उन्हें सलाह देता हूं कि वह ध्यान से इसे एक-दो बार पढ़ लें। इसके बाद मेरी शिक्षा शुरू होगी। इससे उन्हें परफोर्म करने में सुविधा होती है। मैं बोलचाल की भाषा का ज्यादा उपयोग करता हूं। असल में इन सभी के लिए सबसे पहले हिंदी के चालू डायलाॅग बोलना-सीखना बहुत ज़रूरी होता है।’

संकोच रहता है

डांस के मामले में प्रसिद्ध कोरियोग्राफर गणेश आचार्य की डांस क्लासेज़ बहुत मशहूर हैं। कटरीना, सनी लियोन, जैकलीन कई विदेशी तारिकाएं भी उनकी स्टूडेंट रह चुकी हैं। उन्होंने पांच ट्यूशन सेशन में कटरीना कैफ को कई महत्वपूर्ण डांस स्टेप सिखा दिये थे। गणेश बताते हैं, ‘कैट बहुत अच्छी स्टूडेंट है। उसे तो ज्यादा से ज्यादा डांस के अवसर मिलने चाहिए।’ दूसरी ओर गणेश आचार्य का मानना है कि आत्मविश्वास से भरी होने के बावजूद सिर्फ कैट ही नहीं, जैकलीन फर्नांडिज, याना गुप्ता, सनी लियोन, नरगिस फाखरी, एमी जैक्सन आदि विदेशी तारिकाओं के अंदर की हिचकिचाहट थोड़ी देर से जाती है। अभिनेत्री सनी लियोन का जवाब बहुत दिलचस्प होता है, ‘शुरू- शुरू में मैंने पढ़-पढ़ कर जिस्म-2 की पूरी स्िक्रप्ट याद कर ली थी। अब अपनी दूसरी हिंदी फिल्मों की स्िक्रप्ट को लेकर भी मैं ऐसा कर रही हूं। लेकिन मेरी बातचीत में इंग्लिश एक्सेंट बहुत ज्यादा है। शायद यह शायद ही कभी सुधरे। इसका मुझे सख्त अफसोस है। असल में मैं एक्टिंग और डांस क्लासेज़ को लेकर इस कदर व्यस्त थी कि हिंदी सीखने के प्रति मेरा ज्यादा ध्यान ही नहीं गया। वैसे जिस आर्टिस्ट ने मेरी डबिंग की है, उसने बहुत अच्छा काम किया है। मैंने भी हार नहीं मानी है। यहां के बाद अमेरिका जाकर भी मैं अपनी हिंदी क्लास को जारी रखूंगी।’ पर दुर्भाग्य से ज्यादातर इस शिक्षा को ज्यादा तवज्जो नहीं देतीं।

सीखना तो पड़ेगा ही

वैसे विदेशी तारिकाएं इस बात का ढिंढोरा बराबर पीटती रहती हैं कि वे अपनी ट्रेनिंग को लेकर बहुत सजग हैं। पर कैटरीना, जैकलीन, नरगिस फाखरी की उपलब्धियों से तो ऐसा लगता नहीं है। श्रीलंका से आयी जैकलीन फर्नांडिज कहती है, ‘रेगुलर डांस प्रैक्टिस और सीनियर को-स्टार से एक्टिंग टिप्स लेना मैं कभी नहीं भूलती हूं। सीखने की इच्छा है, इसलिए रितेश देशमुख की मदद से मैंने काफी मराठी सीखी थी। मैं अब मराठी भाषी लोगों से अक्सर मराठी में ही बात करती हूं। हिंदी के मामले में मैं शुरू से ही बहुत सजग थी। क्लास न हो तो मैं इंग्लिश टू हिंदी किताब ज़रूर पढ़ती हूं। सलमान ने भी इस मामले में मेरी काफी मदद की है।’

जैकलीन की विदाई

पर ताजा स्थिति यह है कि हिंदी फिल्मों से उनको लाल सिग्नल मिलने लगा है। साहो के एक आइटम नंबर के बाद वह जल्द ही ‘ड्राइव’ में सुशांत सिह राजपूत के साथ दिखाई पड़ेंगी। कुछ यही हाल कैटरीना का भी है। वह इस मामले में लॅकी है कि सलमान का स्पोर्ट उन्हें अब भी मिल रहा है। पर उन्हें कोई ज्यादा नोटिस नहीं कर रहा है। निर्देशक महेश भट्ट कहते हैं, ‘बाॅलीवुड की फिल्मों के प्रति सनी लियोन के लगाव को देखते हुए मैंने खुद उसे बहुत कुछ समझाया। फिर भी संवादों की बेहतरी के लिए हमने सनी की कुछ डबिंग की है। मगर मैंने सनी से वादा कर रखा है कि अगली बार जब उसके साथ काम करूंगा तो अपनी सारी डबिंग वही करेगी।’ असल में सीखने की ललक भी होनी चाहिए। इसी वजह से नरगिस फाखरी की विदाई हो गई। नरगिस मानती है कि इस मामले में फिल्मी क्लासेज के अलावा कई डायरेक्टरों ने भी उनकी काफी मदद की है। पर वह कभी अपनी एक्टिंग को लेकर ज्यादा संजीदा नहीं हो पाई। अभिनय से ज्यादा अफेयर को वक्त दिया। कभी उनके दोस्त और निर्देशक अयान मुखर्जी ने उनकी काफी मदद की थी। बाद में उन्होंने उनके रवैये से दुखी होकर उनका दामन छोड़ दिया। इससे एक बात साबित होती है कि हीरोइन देश की हो या विदेश की जो लगातार स्ट्रगल करेगी, उसे ही बतौर एक्ट्रेस मान्यता मिलेगी। कंगना, दीपिका, प्रियंका सहित कई हीरोइनें इस बात की एक अच्छे उदाहरण के तौर पर सामने आती हैं।


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