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रिबन वाली चोटी

Posted On October - 27 - 2019

मोनिका वर्मा

4 साल की उम्र में लखनऊ के सेंट मिराज इंटर कॉलेज में मुझे नर्सरी कक्षा में दाखिला मिला था। मेरी कजिन भी इसी स्कूल में पढ़ती थी। धुंधली सी याद है कि बड़े ताऊ जी की बेटी रिंपल जब स्कूल जाती थी तो हम दोनों बहनें भी उसके साथ जाने के लिये मचल जाती थीं। खासकर रिंपल की दो चोटियां और उनमें लगे सफेद रिबन मुझे बहुत भाते थे। बाल बचपन से ही लंबे थे क्योंकि घर पर बाल काटने की मनाही थी। लेकिन मम्मी केवल एक चोटी बनाकर, ढेर सारा तेल लगाकर बाल पीछे से बांध देती थी।
दो चोटयां बनाने की ज़िद पर कई बार मां एक-दो धौल भी जमा देती थी लेकिन चोटी फिर भी न बनाती थी। मैं पहले दिन पापा का हाथ पकड़कर स्कूटर पर बैठी थी और रिंपल दीदी की बस से पहले स्कूल जा पहुंची थी। उस दिन ड्रेस तो नहीं मिली थी लेकिन मम्मी ने दो चोटियां बना दी थीं ताकि मैं स्कूल जाने से मना न कर दूं।
छोटी थी तो मैं बहुत डरी-सहमी सी रहती थी। इसलिये पापा मेरा हाथ पकड़कर पहले प्रिंसिपल के दफ्तर साथ ले गये। फिर एडमिशन की प्रक्रिया पूरी कर उन्होंने मुझे मेरी नर्सरी क्लास में पहुंचाया। जहां मेरी क्लास टीचर किरण मिश्रा ने मेरे गोल-गोल गालों को पकड़कर मुझे एक टॉफी दी और अपने पास बिठाया। मैंने टीचर के सामने मुंह से आवाज़ तक नहीं निकाली। बहुत पूछने पर ही अपना नाम बता पाई थी। पापा ने ही सारा ब्योरा दिया था। उस दिन पापा मुझे अपने साथ ही ले आए। कहा कि कल से बाकी बच्चों के साथ स्कूल वैन में भेज देंगे। मैं बड़े कौतूहल से कभी टीचर, कभी हंसते-खेलते, रोते और उधम मचाते बच्चों को निहारती हुई बाहर निकल गई। रास्ते भर पापा ने बहुत कुछ पूछा और ढेर सारी टॉफियां भी दिलाई। अब मैं खुश होकर घर में दाखिल हुई और छोटी बहन को एक-एक कर सारी बातें बताने लगी। इसके बाद अगले दिन की तैयारी शुरू हुई। मम्मी ने बाज़ार से ड्रैस और शूज़ लाकर दिये तो पापा ने ढेर सारी पेंसिल्स, कलर बॉक्स और कॉपियां, किताबें। इसके बाद 12वीं तक की पढ़ाई मैंने इसी इंटर कॉ़लेज से पूरी की।


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