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नानी से बचत की सीख

Posted On October - 6 - 2019

याद रही जो सीख

विकास बिश्नोई
जब मैं स्कूल में पढ़ा करता था तो लगभग हर तीन से चार महीने के बाद मैं और भाई मां के साथ नानी के पास जाया करते थे। नानी हमें बहुत प्यार करती थी। वहां जाते ही हम खूब खेलते थे और हर रोज शाम को खाने में नानी हम दोनों भाइयों के लिए चूरमा और खीर तैयार करके देती। इसके लिए वह हमारे आने से पहले ही घी और जरूरी सामान घर ले आती थी। साथ ही कभी गांव से कोई खाने की चीज के लिए 2-4 रुपए भी दे देती थी। मां कई बार नानी को मना भी करती कि हर रोज चूरमा खीर की क्या जरूरत है। नानी बस यही कहती, ‘मेरे बच्चे हैं, तू बीच मे मत बोल।’
हर छुटियों में यही चलता था । नानी कोई नौकरी नहीं करती थी, बस कुछ खेतीबाड़ी से आमदनी होती थी। इसके बावजूद वह हमारे लिए इतना करती थी तो हम सोचते थे कि नानी के पास इतने पैसे कहां से आते हैं ।
एक बार जब हम नानी के घर से वापिस लौट रहे थे तो नानी ने हमें आते वक्त हर बार की तरह 10-10 रुपये दिए। मैंने नानी से पूछ ही लिया, ‘नानी जी, आप इतने पैसे कहां से लाती हो, हम इतने दिन रुके तो भी इतना कुछ किया, अब यह भी।’
तब नानी जी ने बताया कि बेटा, जिंदगी में जो अपने पास आई लक्ष्मी को सोच समझकर उपयोग में लाता है, वह हमेशा जिंदगी में सफल होता है । आप मेरे बच्चे भी हमेशा यह याद रखना।’ साथ ही एक कहानी सुनाकर नानी जी ने इसका महत्व हमें समझाया ।
बस में वापिस आते वक्त पूरे रास्ते मैं यही सोचता रहा। उस दिन मैंने निर्णय लिया कि आज से मैं भी इसी राह पर चलूंगा। समय और पैसे का सदुपयोग करूंगा। नानी के दिए 10 रुपए से मैंने पैसे जमा करने शुरू कर दिए। धीरे-धीरे समय बीतता गया। मैं ना ज्यादा कहीं पैसे लगाता और साथ ही बचत कर पैसों को अपने पास संग्रहित भी करने लगा। अभी 1 वर्ष पहले मेरे बड़े भाई की शादी थी। उस समय मैं स्नातक की पढ़ाई कर रहा था । मेरा बड़ा मन था कि अपने भाई-भाभी के लिए कुछ उपहार अपनी तरफ से भी दूं। उस समय मैंने 15 वर्षों में एकत्रित किए वो पैसे निकाले और उससे ही उपहार लाने की सोची।
मैंने मां-पापा को कहा कि मैं भी अपने पैसे से इस शादी में उपहार स्वरूप एक एक अंगूठी लाऊंगा । पापा ने तुरंत कहा-तू कहां से लाएगा बेटा, तेरे पास पैसे कहां हैं । मैंने अपने एकत्रित किए पैसे लाकर दिखाए तो दोनों ने मुझे अचरज से देखा । मैंने उन्हें नानी की बात से लेकर पिछले वर्षों में संग्रहित की गई राशि की बात बताई तो मां-पापा बहुत खुश हुए । उसके बाद हम अंगूठी लेकर आए और शादी में भेंट की । आज नानी तो इस दुनिया में नहीं है लेकिन उनके द्वारा दी गयी सीख से उपहार लाकर बहुत खुश हुआ । शादी में दिया यह उपहार मेरे और नानी मां की तरफ से…


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