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नसीरुद्दीन समेत 180 ने की निंदा

Posted On October - 9 - 2019

मुंबई, 8 अक्तूबर (एजेंसी)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला खत लिखने वाली 49 शख्सियतों के खिलाफ प्राथामिकी दर्ज किए जाने की निंदा हो रही है। सांस्कृतिक समुदाय के 180 से अधिक सदस्यों ने पूछा है कि खत लिखने को ‘राजद्रोह की गतिविधि’ कैसे मान लिया गया। निंदा करने वालों में अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, सिनेमेटोग्राफर आनंद पटवर्धन, इतिहासकार रोमिला थापर और कार्यकर्ता हर्ष मंदर शामिल हैं। निर्देशक अपर्णा सेन, अदूर गोपालकृष्णन और लेखक रामचंद्र गुहा समेत अन्य ने जुलाई में प्रधानमंत्री को खत लिख मॉब लिंचिंग (पीट-पीटकर हत्या) की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई थी। खत लिखने वालों के खिलाफ पिछले हफ्ते बिहार के मुजफ्फरपुर में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
अब एक नए पत्र में जानीमानी शख्सियतों ने लिखा, ‘सांस्कृतिक समुदाय के हमारे 49 साथियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई, केवल इसलिए क्योंकि उन्होंने नागरिक समाज का सम्मानित सदस्य होने की जिम्मेदारी निभाई। क्या इसे राजद्रोह की गतिविधि कहा जा सकता है? या नागरिकों की आवाज बंद करने के लिए अदालतों का दुरुपयोग कर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।’ इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों ने पहले पत्र के प्रति भी समर्थन जताया। प्राथमिकी 3 अक्तूबर को भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत दर्ज की गई। इसमें राजद्रोह, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना, लोक कार्य में बाधा पहुंचाना, शांति भंग करने के इरादे से अपमान करना समेत कई धाराएं शामिल हैं।
अदालती प्रक्रिया है, सरकार का कोई लेना-देना नहीं : जावड़ेकर
नयी दिल्ली : इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि इस मुद्दे पर मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराना गलत है। उन्होंने कहा कि एक याचिका के बाद बिहार की अदालत ने प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था। कोई सरकार ने प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई है। मंत्री ने कहा, ‘यह पूरी तरह से गलत है और यह निहित स्वार्थ वाले लोगों और टुकड़े-टुकड़े गिरोह द्वारा फैलाया जा रहा है।’ जावड़ेकर ने बिना किसी का नाम लिए हुए कहा कि मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए यह आलोचकों का पुराना तरीका है और इस मामले में भी यही हो रहा है।


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