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दूसरी धरती की तलाश के लिए जद्दोजहद

Posted On October - 14 - 2019

भौतिकी का नोबेल

अभिषेक कुमार सिंह
इस साल के लिए भौतिकी में नोबेल पुरस्कार हासिल करने वाले तीनों साइंटिस्टों कनाडाई मूल के अमेरिकी जेम्स पीबल्स और स्विट‍्ज़रलैंड के माइकल मेयर व डिडियर क्वेलोज की खोजें, असल में इस कायनात में इंसानियत की जगह की खोज पर केंद्रित हैं। जहां पीबल्स एक ओर अपनी थ्योरी से साढ़े 14 अरब साल पहले हुई बिग बैंग यानी महाविस्फोट की घटना के बाद ब्रह्मांड के विकास के बारे में इंसानी समझ में नए अध्याय जोड़ती है, तो दूसरी ओर स्विस वैज्ञानिकों मेयर और क्वेलोज ने सूर्य की तरह एक तारे की परिक्रमा करने वाले एक जिस एक्सोप्लैनेट (परा-ग्रह) को खोजा है, उससे पृथ्वी की तरह माहौल वाले ग्रह पर जीवन की संभावनाओं को बल मिलता है। समग्रता में देखें तो तीनों वैज्ञानिकों की कवायद यूनिवर्स की ऐसी खोजबीन के बारे में है, जो समूचे ब्रह्मांड में मानव के अकेलेपन के जवाब की खोज पर जाकर ठहरती है।
सनातन सवाल है कि क्या इस कायनात में कुछ और ऐसी पृथ्वियां हैं, जो जिंदगी से लबरेज़ हों? सदियों से इंसान पृथ्वी के पार जीवन की तलाश में लगा है। लेकिन पिछले कुछ अरसे में इस खोजबीन में ज्यादा तेजी आई है और ब्रह्मांड में, खास तौर से हमारे सौरमंडल के नजदीकी इलाके में ऐसे कई ग्रह खोज लिए गए हैं, जिन्हें आकार-प्रकार के मामले में हमारी पृथ्वी जैसा ही बताया जा रहा है। इनमें भी ज्यादा नजर उन ग्रहों पर है, जहां जीवन के लिए जरूरी वातावरण का थोड़ा-बहुत संकेत मिलता हो।
असल में, वैज्ञानिकों ने ठीक वैसे ग्रहों पर ध्यान लगाया है जो संरचना यानी आकार-प्रकार में पृथ्वी जैसे ही हैं और जिनका हमारी तरह कोई सौरमंडल भी है। वर्ष 2015 में भी यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ वेल्स के खगोलविदों ने ऐसी ही एक सुपरअर्थ का पता लगाया था। यह हमसे महज 14 प्रकाशवर्ष दूर स्थित है। ‘वुल्फ 1061-सी’ नामक इस ग्रह के बारे में भी दावा किया गया था कि जीवन की संभावना के मामले में यह हमारी पृथ्वी के करीब हो सकता है। वुल्फ 1061-सी पृथ्वी से सिर्फ चार गुना बड़ा है और इस पर पृथ्वी के मुकाबले 1.8 गुना ज्यादा गुरुत्वाकर्षण है। अपने तारे (उस सौरमंडल का मुखिया यानी सूरज) की तरफ रहने वाला इसका एक पक्ष भयानक रूप से तपता रहता है, लेकिन दूसरी तरफ काफी ठंड है। इन दोनों के बीच कुछ स्थान ऐसा है, जहां जीवन पनपने की संभावना बनती है।
हालांकि, अभी तक जिन सुपर-पृथ्वियों का पता चला है, वे हमसे सैकड़ों-हजारों प्रकाशवर्ष दूर हैं। इस मामले में कुछ समय पहले खोजे गए गलीज-667-सीसी (22 प्रकाशवर्ष दूर) और वल्कैन कहलाने वाली 16 प्रकाशवर्ष दूर स्थित नई सुपरअर्थ से ही कुछ उम्मीदें बंधती हैं क्योंकि ये अपेक्षाकृत हमारे काफी नजदीक हैं। वैसे इसके संकेत 90 के दशक में ही मिलने लगे थे कि सुदूर ब्रह्मांड में कहीं और धरती जैसा ग्रह हो सकता है। वर्ष 1992 में पहली बार एक पल्सर के आसपास ग्रह जैसा कुछ होने का अनुमान लगाया गया और इसके अगले 25-30 सालों में हाल यह है कि अब तक 2,675 स्टार सिस्टम्स में फैले हुए पृथ्वी जैसे करीब 3900 ग्रहों की सूची जारी हो चुकी है, हालांकि इनमें से ज्यादातर ग्रह बहुत अजीब हैं। कोई बहुत ज्यादा ठंडा है तो कोई गर्म। कहीं जहरीली गैसों की भरमार है तो कोई सूर्य के अत्यधिक दूर है, जिससे वहां जीवन की संभावना की कोई सूरत नहीं बनती। फिर भी इनमें करीब 350 ग्रहों को धरती से मिलता-जुलता माना जा सकता है। संभावना है कि इनमें से किसी में जीवन हो सकता है।
यहां एक अजब विरोधाभास यह है कि अब से पांच सौ साल पहले तक सूरज, चांद, सितारों को एक साथ दिखाने वाला जो भी मॉडल तैयार किया जाता था, उसके केंद्र में पृथ्वी ही हुआ करती थी। फिर कॉपरनिकस ने पृथ्वी को धकियाकर सूरज को इस मॉडल के केंद्र में ला दिया और उनके कोई सौ साल बाद गैलिलियो ने इस तस्वीर को इतना बदल दिया कि पृथ्वी का ब्रह्मांड की धुरी होना तो दूर, बड़ी तस्वीर में इसका मुकाम ही खोजना मुश्किल हो गया। लेकिन पर्यावरण-त्रासदियों के चलते अंतरिक्ष में जीवन के लिए उपयुक्त स्थितियों वाला ग्रह ढूंढ़ निकालना हमारी दिलचस्पी के केंद्र में आ गया है।
स्पेस में जीवन की तलाश के अभियान इधर इतने जोरों पर हैं कि सिर्फ सुपरअर्थ ही नहीं, वैज्ञानिकों ने बाह्य अंतरिक्ष में पूरे-पूरे सौरमंडल भी खोज लिए हैं जो तकरीबन हमारे सोलर सिस्टम जैसे हैं। जैसे, वर्ष 2017 में वैज्ञानिकों ने 39 प्रकाशवर्ष दूर स्थित एक ऐसा नया सोलर सिस्टम ढूंढ़ निकाला, जिसमें ठीक हमारे सौरमंडल की तरह ही सात ग्रह (प्लैनेट) हैं। वैज्ञानिकों ने इसके सूर्य को ‘ट्रैपिस्ट-1’ का नाम दिया था। इस सौरमंडल के ग्रह भी दिखने में धरती से काफी मिलते-जुलते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यहां जीवन के लिए अनुकूल हालात हो सकते हैं।
बहरहाल, इस बात से ज्यादातर वैज्ञानिक सहमत हैं कि बाहरी अंतरिक्ष में जीवन की खोजबीन करनी है, तो सबसे पहले पृथ्वी जैसे ग्रहों का पता लगाना होगा। यदि बाह्य अंतरिक्ष में कोई पृथ्वी जैसे आकार-प्रकार व संरचना वाला ग्रह मिल जाता है, तो उसकी सूक्ष्म पड़ताल करके जीवन की संभावना का पता किया जा सकता है। यदि ऐसा हुआ तो मुमकिन है कि हम तब कह सकेंगे कि इस कायनात में हम अकेले तो नहीं।


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