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दशहरा-दीवाली की सेल कथाओं का ज्ञान

Posted On October - 8 - 2019

उलटवांसी

आलोक पुराणिक
कथा एक, शापिंग सिर्फ शापिंग : एक समय की बात है—लंका नामक राज्य में लोग सिर्फ दो ही काम करते थे। एक ईएमआई के लिए कर्ज लेते थे और दूसरा हर तरह की चीज खरीदते थे। जरूरत भर की चीजें खरीदने वाले गरीब होते हैं और हीरों की चड्ढी पहनने को भी जरूरत बनाने वाले ही सभ्य इनसान होते हैं, ऐसा विचार लंकावासियों के दिमाग में घर कर गया था।
फलस्वरूप लंका में धुआंधार कर्ज लिये जाने लगे और हर आइटम की धुआंधार बिक्री होने लगी। लंका में एक-एक टीवी सीरियल दस-दस साल चलता था, पर मोबाइल दस महीने भी न चलने देती थीं मोबाइल कंपनियां, नये मोबाइल लेकर आ जाती थीं। जबकि होना उल्टा चाहिए था। यानी सीरियलों को चार महीने में निपट लेना चाहिए था और मोबाइल फोन दस साल चलने चाहिए थे। खैर, कर्ज देने को कंपनियां तैयार बैठी थीं। लंका में नागरिकों के पास सोना बहुत होता था। गनपुरम फाइनेंस कंपनी सोना लेकर कर्ज देती थी। धीमे-धीमे लंकावासियों का सारा सोना गनपुरम फाइनेंस कंपनी के पास आ गया। अब लंकावासियों के पास सोना भी न बचा गिरवी रखने को। ऐसे में लंका पर आक्रमण हुआ। बंदरों-भालुओं ने आक्रमण किया लंका पर। गनपुरम फाइनेंस कंपनी ने बंदरों से कहा—तुम भी कर्ज लो मोबाइल के लिए। बंदरों ने फाइनेंस कंपनी के सेल्समैनों को खौंखिया कर दौड़ा दिया। यूं ये काम इनसानों करना चाहिए था पर बंदर कुछ मामलों में इनसानों से ज्यादा समझदार निकलते हैं।
खैर, लंका के राजा ने पब्लिक से कहा—तुम सब आक्रमण का जवाब दो।
इसके प्रत्युत्तर में पब्लिक ने कहा—हमारी लाइफ में अब बचा क्या है, सिर्फ मोबाइल और शापिंग। हमारी सारी रकम मोबाइल कंपनियां ले जाती हैं, गोल्ड फाइनेंस कंपनियां हमारा सारा सोना ले गयी हैं, ऐसे में हम जीतकर भी क्या करेंगे। पब्लिक के ऐसे वचन सुनकर लंका का राजा अति ही हतप्रभ रह गया और उसने मोबाइल कंपनियों और लोन कंपनियों पर सम्यक नियंत्रण न रख पाने के लिए खुद को कोसा। खैर लंका का राजा युद्ध हार गया।
शिक्षा मिली कि हमें फिजूल की चीजों में रकम नहीं खर्च करनी चाहिए और मोबाइल के लिए सोने को गिरवी नहीं रखना चाहिए।
कथा नंबर दो, कुंभकर्ण की माडलिंग : कुंभकर्ण अति ही ताकतवर योद्धा था लंका की सेना में, पर वह युद्ध के वक्त सोता पाया गया। इसकी कथा यूं है कि कुंभकर्ण ने एक गद्दा कंपनी से मॉडलिंग कांट्रेक्ट लिया था, जिसमें लिखा था कि वह महीनों-महीनों गद्दे पर सोता पड़ा रहेगा और इश्तिहार में टैगलाइन बोलेगा—गद्दे ऐसे कि उठने का दिल ही न करे। युद्ध के समय कुंभकर्ण से कहा गया कि भईया उठ लो, लंका की इज्जत का सवाल है। पर कुंभकर्ण महीनों सोने के कांट्रेक्ट के चलते वह युद्ध करने में सक्षम ही न बचा। परिणाम लंका की हार के रूप में सामने आया।
शिक्षा : ज्यादा माडलिंग से परफारमेंस खराब हो जाती है। यह शिक्षा वर्तमान क्रिकेटरों को जरूर समझनी चाहिए।


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