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टालमटोल की आदत बुरी

Posted On October - 20 - 2019

दिशा

मुझे शुरू से ही लेखन में रुचि रही थी। कॉलेज में होने वाली हर लेखन कला जैसे पोस्टर मेकिंग, स्लोगन लेखन, निबन्ध लेखन आदि में मैं बढ़-चढ़ कर भाग लेती। और ये बात भी पक्की रहती कि हर बार मुझे कोई न कोई पुरस्कार तो मिलता ही था। उस दिन स्लोगन लेखन प्रतियोगिता होनी थी। सभी को घर से ही चार्ट पेपर बना के ले जाना था। अभी चार्ट लेकर जाने में 5 पांच दिन बाकी थे। मेरे मन में यही था कि अभी तो पांच दिन बाकी हैं, आराम से लिख लूंगी। तीन दिन पता ही नहीं चले कि कैसे निकल गए और चौथा दिन आ गया। मैंने सोचा अब एक ही दिन बाकी है तो अपना चार्ट तैयार कर लिया जाए। जैसे ही मैं चार्ट बनाने बैठी तो मुझसे लिखने में एक गलती हो गई। मैंने गलती सुधारने के लिए रबड़ ढूंढ़ी तो मेरे पास रबड़ नहीं थी। बाजार मेरे घर से थोड़ा दूर था तो मैंने सोचा अभी तो बाजार जाना होगा नहीं, मैं कल बाजार जाकर रबड़ ले आउंगी और चार्ट भी कल ही बना लूंगी। बात कल पर टालना मेरी पहली गलती रही। अगले दिन जब मैं बाजार गई तो बाकी का सामान ले आई पर अपना रबड़ लाना भूल गई। जब दोपहर में चार्ट बनाने बैठी तो याद आया कि रबड़ तो फिर रह गया। मैंने थोड़ा अफसोस मनाया और फिर बात कल पर टाल दी। अगले दिन ही दोपहर में चार्ट लेकर जाना था। मेरे मन में फिर आया कि सुबह जल्दी उठकर रबड़ ले आउंगी और अपना चार्ट भी बना दूंगी। यही सोच कर मैं उस दिन भी रह गई। आज वो दिन था जब चार्ट लेकर जाना था और जल्दबाज़ी में मैं पहले ही सुबह उठने में लेट हो गई। चार्ट लेकर बैठी तो फिर से रबड़ की याद आई। दूर वाले बड़े बाजार जाने का अब समय नहीं बचा था तो पास वाले बाजार ही रबड़ लेने चली गई। बाजार पहुंची तो पाया कि आज महीने का आखिरी सोमवार है और इस दिन बाजार बंद रहता है। मुझे खुद पर बड़ा गुस्सा आया और पछतावा भी हुआ। मैंने घर जाकर जैसे-तैसे अपना चार्ट तैयार किया पर वो गलती मेरी आंखों में खटकती रही। कॉलेज पहुंचते ही बड़ी उत्सुकता से मैम ने मेरा चार्ट लिया। उन्होंने जैसे ही मेरा चार्ट खोला तो उन्हें पहले जैसी खुशी नहीं हुई। मैं समझ गई थी कि मेरी गलती मैम की नज़र में आ गई है। मैम मेरा मन रखने के लिए हल्की-सी मुस्कान के साथ चार्ट लेकर चली गई। और पहली बार ऐसा हुआ कि मेरी छोटी-सी गलती के कारण मुझे कोई पुरस्कार नहीं मिला। मुझे मन ही मन निराशा हुई और अपनी सारी गलतियां याद आने लगीं। थोड़ा-सा आलस्य और काम कल पर टालना मुझे भारी पड़ गया। मुझे अपनी गलती का अहसास हुआ। तब से मैंने अपने सभी काम समय पर पूरे करने और आलस्य त्यागने का प्रण लिया।


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