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जिसने मुचलका भरा, वह हुआ रिहा

Posted On October - 11 - 2019

सुरेश डुग्गर/हप्र
जम्मू, 10 अक्तूबर
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने 5 अगस्त से हिरासत में लिए गए तीन नेताओं को बृहस्पतिवार को रिहा कर दिया। इन नेताओं में यावर मीर, नूर मोहम्मद और शोयब लोन शामिल हैं। अधिकारियों ने बुधवार देर रात इनकी रिहाई की घोषणा कर दी थी। मुचलका भरने के बाद इन्हें रिहा किया गया। बताया जा रहा है कि मुचलका भरने पर ही नजरबंद या हिरासत में रखे गए लोगों को छोड़ा रहा है। बताया जा रहा है कि राज्य के कद्दावर नेताओं फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, सज्जाद गनी लोन, उमर अब्दुल्ला बिना शर्त रिहाई पर अड़े हुए हैं। इसीलिए अभी वह नजरबंदी से बाहर नहीं आ पा रहे हैं।
बता दें कि गत 5 अगस्त से राज्य के पुनगर्ठन के बाद से ही करीब 5 हजार छोटे-बड़े राजनीतिज्ञों को हिरासत में रखा गया है। करीब 250 लोग जम्मू-कश्मीर के बाहर जेल भेजे गए। फारूक को बाद में लोक सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिया गया जबकि अन्य नेताओं को दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के तहत हिरासत में लिया गया। उल्लेखनीय है कि सरकार ने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को खत्म कर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया था। उस दौरान एहतियातन अनेक नेताओं को हिरासत में ले लिया गया था। अब धीरे-धीरे उनकी रिहाई संभव हो रही है।
बृहस्पतिवार को रिहा किए गए यावर मीर रफियाबाद विधानसभा सीट से पीडीपी के विधायक रह चुके हैं। शोयब लोन ने उत्तरी कश्मीर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा बाद में पार्टी छोड़ दी। लोन को पीपुल्स कांफ्रेंस के प्रमुख सज्जाद लोन का करीबी माना जाता था। तीसरे नेता नूर मोहम्मद नेशनल कांफ्रेंस कार्यकर्ता हैं और श्रीनगर शहर के आतंकवाद प्रभावित बटमालू क्षेत्र में पार्टी का चेहरा हैं। तीनों नेता शांति और अच्छा व्यवहार बनाए रखने का हलफनामा दे चुके हैं। इससे पहले 21 सितंबर को पीपुल्स कांफ्रेंस के इमरान अंसारी और सैयद अखून को स्वास्थ्य आधार पर राज्य प्रशासन ने रिहा किया था। इस बीच, पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने आरोप लगाया कि बृहस्पतिवा को रिहा किए गए नेताओं को बांड पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने नेताओं की हिरासत को ही अवैध बताया। नेताओं के ट्वीट से ही पता चला कि कई नेताओं ने बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया है।


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