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जानवरों से दूरी है ज़रूरी

Posted On October - 5 - 2019

मौसम में बदलाव के साथ बारिश जब आती है तो कई सारी बीमारियों को निमंत्रण देती है। लेप्टोस्पायरोसिस नाम का रोग भी इस मौसम में फैल सकता है। यह एक बैक्टीरियल इफेक्शन है जो जानवरों के माध्यम से फैलता है। विशेष रूप से कुत्तों, चूहों और खेत में मौजूद जीवों से। ये सभी जानवर इस बीमारी के वाहक होते हैं। हालांकि, इनमें बीमारी के कोई लक्षण नहीं हो सकते हैं। लेप्‍टोस्‍पायरोसिस के कारण छाती में दर्द और हाथ और पैर में सूजन आ सकती है।
कैसे होता है रोग
पानी के जमाव के कारण कई जानवर मर जाते हैं जो लेप्टोस्पायरोसिस लेप्टोस्पाइरा इंटरोगन्स नामक बैक्टीरिया पैदा करते हैं। यह बैक्टीरिया कई जानवरों में होता है, जो उनके गुर्दे में पनपता है। ये जानवर अपने पेशाब के जरिए इसे मिट्टी या फिर पानी में छोड़ देते हैं। अगर आप संक्रमित जानवर के पेशाब की हुई मिट्टी या पानी के संपर्क में आते हैं तो ये बैक्टीरिया आपके शरीर पर कटी हुई त्वचा, जख्म या फिर सूखे हुए स्थानों के जरिए हमारे शरीर में घुस जाता है। यह हमारे नाक या फिर मुंह के जरिए भी प्रवेश कर सकता है।
पेट्स को दूर रखें
पेट्स से हमेशा कुछ दूरी बनाकर रखें। अगर आप घर से बाहर बहुत सारा समय जानवरों के साथ बिताते हैं तो आप में संक्रमण फैलने का जोखिम रहता है। खेतों में काम करने वाले किसान, वेटरनरी डॉक्टर्स, सीवर या खदान में काम करने वाले, सैन्य कर्मचारी, जैसे पुलिस, सेना के जवान, बाढ़ या आपदा प्रबंधन कर्मी, बारिश के पानी में लगातार काम करने या खड़े रहने वाले व्‍यक्ति इसके शिकार बनते हैं। कभी-कभी यह नदी के पानी में भी पहुंच जाता है। ऐसी स्थिति में रॉफ्टिंग, स्विमिंग या कैंपिंग करने वालों में लेप्टोस्पायरोसिस होने की आशंका होती है।
लक्षण
इससे प्रभावित व्यक्ति को बुखार आ जाता है, सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द के अलावा उल्टी, दस्त, लाल चकत्ते और पीलिया रोग तक हो सकता है। हालांकि जांच के बाद ही इस रोग का पता लगाया जा सकता है।
बचाव
दूषित पानी से बचें
दूषित पानी न पीएं और न ही इसके संपर्क में रहें क्योंकि लेप्टोस्पायरोसिस शरीर में अन्‍य तरीकों से प्रवेश कर सकता है तो आप तैराकी, नौकायन या मछली पकड़ने से बचने की कोशिश करें। खारा पानी आमतौर पर सुरक्षित होता है।
संक्रमित जानवरों से दूर रखें
चूहे बैक्टीरिया के मुख्य वाहक हैं। पश्चिमी देशों में भी 20% जंगली चूहों में यह हो सकते हैं। ऐसे में आपको जंगली चूहों के संपर्क में आने से बचना होगा। लाइसोल, एसिड सॉल्‍यूशन,ब ्लीच और आयोडीन बैक्टीरिया के लिए घातक होते हैं। ऐसे में आप इनका प्रयोग करें।


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