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जब घर में हो जगह की दरकार

Posted On October - 12 - 2019

फेस्टिव सीज़न में अगर घर में और स्पेस की दरकार है तो मेकओवर तो करना ही होगा। शुरुआत करते हैं बालकनी से। न्यू कॉन्सेप्ट से बालकनी का मेकओवर करने के कई विकल्प हैं । आजकल नया ट्रेंड है-दो बालकनी का। एक घर के आगे की तरफ और एक पिछले हिस्से में।

दीप्ति अंगरीश

बड़े शहरों से लेकर कस्बाई शहरों में घूम आइए,तो पाएंगे कि अपार्टमेंट कल्चर खूब फल-फूल रहा है। बहुमंजिला इमारतों में बालकनी कॉन्सेप्ट खूब देखा जा रहा है। बालकनी केवल घर का स्पेस ही नहीं, बल्कि संबंधों को भी नया रूप देती है। बगल वाले अपार्टमेंट में जो सहेली या दोस्त हों, उनसे अपनी बालकनी में खड़े होकर आप घंटों बतियाते हैं। यदि थक गए तो कुछ देर दीवार के सहारे टिक गए या कुर्सी ले आए। इसलिए इंटीरियर ट्रेंड में बालकनी महत्वपूर्ण है। या यूं कहें कि सबसे ज़रूरी हो गया है। तभी तो आजकल एक की बजाय दो बालकनी का कॉन्सेप्ट ट्रेंड में है।
यानी एक आगे की तरफ से और एक घर के पीछे से। एक बालकनी का इस्तेमाल घरेलू कार्य के लिए किया जा सके और दूसरी बालकनी में आप अपने परिवार या अपने दोस्तों के संग बैठकर चाय या बातचीत का लुत्फ उठा सकें।
आजकल भागदौड़ भरे लाइफस्टाइल में हम घर जाकर ही सुकून की कुछ सांसें लेते हैं। मौजूदा दौर में इतना तनाव है कि हम अपनों के लिये वक्त नहीं निकाल पाते।
अपनों के साथ सुकून के कुछ पल बिताना चाहते हैं तो घर की बालकनी को पार्टी स्पेस के लिये इस्तेमाल करें। घर पर पार्टी हर कोई करना चाहता है इसलिये क्यों न घर के बचे हुए स्पेस को कायदे और करीने के साथ प्रयोग में लाया जाये। हाल ही में गोदरेज इंटेरियो ने एक सर्वेक्षण कराया है। सर्वे के नतीजों के अनुसार 61 प्रतिशत भारतीय अपने जुनून को पूरा नहीं कर पाते। घर पर लोग सुकून के पल बिता सकें इसके लिये गोदरेज इंटेरियो ने ‘मेक स्पेस फॉर लाइफ’ अभियान भी चलाया है।

खुलकर जिंदगी जीएं

हालांकि, बालकनी में बैठने का मज़ा तभी आता है जब आपकी बालकनी साफ-सुथरी और करीने से सजाई गई हो। यदि बालकनी को आपको सजाना है तो कई सारे ऑप्शंस हैं आपके पास। गोदरेज इंटेरियो के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुबोध मेहता कहते हैं कि काम, प्रौद्योगिकी और दैनिक जीवन की भागदौड़ व तनाव के कारण लोग अपने पारिवारिक रिश्तों-संबंधों और जुनून के लिए बहुत ही कम समय निकाल पाते हैं।
ऐसे में अगर बाहर के लिये वक्त नहीं निकाल पा रहे हैं तो घर पर ही कोशिश करें अपनों के साथ वक्त बिताने की।

फेस्टिव मेकओवर

इन परिस्थितियों के बीच इस फेस्टिव सीज़न में ज़रूरी है कि आप और हम खुलकर जीएं। इसलिए आगे वाली बालकनी में स्पेस के हिसाब से आप चेयर और टेबल अरेंजमेंट करें। अपनी पंसद के हिसाब से प्लास्टिक, वुडन, स्टील या फिर केन की चेयर का चुनाव कर सकते हैं ताकि चाय की चुस्की का मज़ा ले सकें। इतना ही नहीं, बालकनी में गमले फर्श पर रखने के बजाय बालकनी में बाहर की तरफ स्टैंड व रॉड वाले गमले लगवाएं ताकि आपकी बालकनी में पर्याप्त स्पेस हो और यहां रखे फर्नीचर से न टकराएं। यदि आप बालकनी में बैठकर अपने पड़ोसियों की नज़र से बचना चाहते हैं तो इसके लिए स्टाइलिश चिक बांस लगवाएं। इसे आप अपनी सुविधानुसार कवर करवा सकते हैं। चिक बांस का प्रयोग आप गर्मी की धूप या फिर सर्द भरी रातों से सुरक्षा पाने के लिए भी कर सकते हैं।

ग्रीनरी को साथ रखें

बालकनी में लगाए जाने वाले फूलों में लेंटाना, यूफोरबिया, फेंटास, बिगोनिया आदि खास हैं। बालकनी के कॉर्नर वाले स्पेस में क्रोटनस, पाम, फर्न, रबर प्लांट, मिरंटा, एगेलोनिया आदि पौधों को रख सकते हैं। लटकने वाले पौधों को लटकती टोकरियों में लगाकर बालकनी में थोड़ी-थोड़ी दूरी पर लगा सकते हैं। ऐसे पौधों में जेबरीना, पिलोनिया, क्लेरिफाइटम और पेपरोकिया खास हैं।

पीछे वाली बालकनी

आप बालकनी के पीछे वाले हिस्से को घरेलू कार्य के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। यहां पर आप कपड़े धोने की मशीन व सुखाने के लिए स्टैंड रख सकती हैं। जूतों का रैक, पुरानी अखबारें, सिलेंडर जैसे सामान भी यहां पर रखे जा सकते हैं। चूंकि महानगर कल्चर से आंगन जैसे शब्द बिल्कुल ही गायब हो गए हैं। इसलिए बालकनी के पिछले हिस्से को बतौर आंगन इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसके अलावा इस हिस्से को और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए आप यहां पर छोटी-मोटी चीजें, जैसे- नल, सेल्फ और ट्यूबलाइट लगवाना न भूलें। साथ ही हो सके तो यहां रखे सामान की सुरक्षा के लिए कुछ हिस्सों में शेड भी ज़रूर लगवाएं।


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