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कड़े मुकाबले में फंसे भाजपा के 4 दिग्गज जाट

Posted On October - 10 - 2019

दिनेश भारद्वाज/ट्रिन्यू
चंडीगढ़, 9 अक्तूबर

ओपी धनखड़

हरियाणा की सत्तारूढ़ भाजपा के चारों जाट दिग्गज कड़े चुनावी मुकाबले में फंसे हैं। भाजपा के ये चारों ही बड़े जाट चेहरे लगातार दूसरी बार चुनावी रण में हैं। इनमें से दो कैबिनेट मंत्री तो मुख्यमंत्री पद के भी दावेदार रहे हैं। पार्टी प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला और पूर्व केंद्रीय मंत्री चौ. बीरेंद्र सिंह की भी प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। इन चारों ही सीटों-नारनौंद, उचाना कलां, टोहाना व बादली पर प्रदेशभर के लोगों की नज़रें लगी हैं। रोचक बात यह है कि तीन सीटों पर भाजपा के इन दिग्गजों को करीब नौ माह पूर्व अस्तित्व में आई जननायक जनता पार्टी (जजपा) के उम्मीदवारों से ‘खतरा’ है।
बादली में ओपी धनखड़ को कांग्रेस प्रत्याशी कुलदीप वत्स चुनौती दे रहे हैं। यहां भी जजपा प्रत्याशी संजय कबलाना के अलावा निर्दलीय प्रत्याशी राव धर्मपाल आदि जातिगत समीकरण बिगाड़ने में अहम भूमिका निभाते दिख रहे हैं। धनखड़, खट्टर सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। बादली हलके को पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के प्रभाव वाला इलाका माना जाता है। लोकसभा चुनावों में भी यहां से कांग्रेस उम्मीदवार दीपेंद्र सिंह हुड्डा को 12 हजार ज्यादा मत मिले थे। देखना होगा कि ‘चुनावी चक्रव्यूह’ रचकर तैयार खनखड़ विपक्षी घेरे को कैसे भेदते हैं।
वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु नारनौंद से चुनावी रण में हैं। लोकसभा चुनावों में उनके हलके से भाजपा सांसद बृजेंद्र सिंह अन्य उम्मीदवारों से पिछड़ गए थे। जजपा ने यहां से पूर्व विधायक रामकुमार गौतम पर दांव खेला हुआ है। नारनौंद में दुष्यंत का भी अच्छा प्रभाव माना जाता है। वहीं कांग्रेस व इनेलो के भी जाट उम्मीदवार मैदान में होने से वोट बंटने की आशंका है। मुकाबला कड़ा बना हुआ है।
भारतीय जनता पार्टी प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला त्रिकोणीय मुकाबले में फंसे नज़र आ रहे हैं। जजपा ने उनके मुकाबले कांग्रेस छोड़कर आए युवा नेता देवेंद्र बबली को मैदान में उतारा है। वर्ष 2014 में बबली ने बतौर निर्दलीय अच्छा प्रदर्शन किया था। जजपा प्रदेशाध्यक्ष सरदार निशान सिंह का भी यह निर्वाचन क्षेत्र है। उनका भी समर्थन बबली को मिल रहा है। कांग्रेस ने पूर्व कृषि मंत्री सरदार परमवीर सिंह पर फिर से भरोसा किया है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री चौ. बीरेंद्र सिंह का पूरा परिवार उचाना कलां से बाहर नहीं निकल पा रहा है। यहां से जजपा नेता और पूर्व सांसद दुष्यंत सिंह चौटाला खुद चुनावी रण में डटे हैं। 2014 में भी दुष्यंत ने कांग्रेस प्रत्याशी प्रेमलता को कड़ी टक्कर दी थी। बीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेमलता को भाजपा ने फिर से मैदान में उतारा है। उनके बेटे व हिसार से सांसद बृजेंद्र सिंह भी डोर-टू-डोर प्रचार में जुटे हैं। फिलहाल जजपा और भाजपा में ही सीधा मुकाबला दिख रहा है।
बहरहाल, मिश्न-75 प्लस का नारा देकर चल रही सत्तारूढ़ भाजपा के चारों दिग्गज अपने-अपने हलकों में फंसे हुए हैं। माना जा रहा है कि इसी वजह से पार्टी ने पीएम नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के अलावा कई केंद्रीय मंत्रियों की रैलियां इन हलकों में रखवाई हैं। बराला की गिनती सीएम के सबसे नजदीकियों में होती है। राजनीति के जानकारों का कहना है कि चुनाव प्रचार के साथ-साथ चुनावी समीकरण भी बदलेंगे।


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