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एकदा

Posted On October - 12 - 2019

दर्द का अहसास

नौशेरवां जब युवराज थे तब उनको कई उस्ताद तालीम दिया करते थे। तालीम पूरी होने पर बादशाह ने प्रमुख उस्ताद को बुलाया और कहा कि आप हमसे कल बाकी सभी उस्तादों के साथ मिलें ताकि हम सबको सम्मानित कर सकें। इस पर उस्ताद बोले—हुज़ूर, बस एक दिन की तालीम बाकी रह गई है। इसके बाद उस्ताद युवराज को लेकर अस्तबल में गए। एक घोड़ा लेकर स्वयं उस पर बैठ गए और नौशेरवां को उसकी लगाम देकर अपने पीछे आने को कहा। घोड़ा पहले धीरे-धीरे चला, फिर उसकी गति बढ़ती गई और युवराज उसकी गति के साथ न दौड़ सका और वहीं गिर पड़ा। उस्ताद उसे घोड़े पर लादकर राजमहल ले आए। युवराज को बेदम देखकर बादशाह गुस्से से लाल हो गया। इस पर उस्ताद ने कहा—हुज़ूर ने मुझे माफ़ फ़रमाया, शुक्रिया। आप कहें तो मैं यह मुल्क़ छोड़कर चला जाऊं। उस्ताद वहां से चले गए। होश में आने पर युवराज ने अपने उस्ताद के बारे में पूछा। युवराज बोला—आज अंतिम सबक के रूप में उस्ताद जी ने मुझे समझाया है कि किसी को भी तकलीफ़ देने से पहले स्वयं को उसकी जगह रखकर देखना। दर्द सभी को एक-सा होता है। नौशेरवां ने बादशाह बनने पर प्रजा का हमदर्द बनकर अलग पहचान बनाई।

प्रस्तुति : मुकेश कुमार जैन


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