कांगड़ा जिला में 15000 लोगों को क्वारंटाइन के निर्देश !    ‘नवलखा, तेल्तुम्बडे हफ्ते में करें सरेंडर’ !    सोपोर में जैश का कमांडर ढेर, एक जवान जख्मी !    राहत सामग्री देते वक्त फोटो न खींचें !    राहत सामग्री देते वक्त फोटो न खींचें !    अफगानिस्तान में अगवा कर 7 लोगों की हत्या !    हरियाणा के हर जिले में होंगे रैंडम टेस्ट !    5 लाख तक की लंबित आयकर राशि की वापसी तुरंत !    किसानों से सीधी खरीद की दें अनुमति : केंद्र !    11 दिन में हिंसा, उत्पीड़न की आईं 92 हजार शिकायतें !    

एकदा

Posted On October - 10 - 2019

जीवन अनमोल
एक व्यक्ति ने अपने घर में प्रतिदिन होने वाली कलह से तंग आकर आत्महत्या करने की सोची। किन्तु आत्महत्या का निर्णय लेना इतना आसान भी नहीं था। परिवार के भविष्य को लेकर वह चिंतित हो गया। असमंजस की स्थिति में वह महर्षि रमण के आश्रम में गया। महर्षि को अपनी स्थिति की सारी जानकारी देकर आत्महत्या के बारे में उनकी राय जाननी चाही। महर्षि उस समय आश्रमवासियों के भोजन के लिए पत्तलें बनाने में व्यस्त थे। पत्तल बनाने में महर्षि की तल्लीनता और परिश्रम को देख उसे आश्चर्य हुआ। उसने पूछा, ‘स्वामी जी! आप इन पत्तलों को इतने परिश्रम से बना रहे हैं, लेकिन थोड़ी देर में भोजन के बाद ये पत्तलें कूड़े में फेंक दी जाएंगी।’ महर्षि बोले, ‘सही कहा तुमने, मगर किसी वस्तु का पूरा उपयोग करके उसे फेंकना बुरा नहीं है। गलत तो तब है जब उपयोग किए बिना उसे अच्छी अवस्था में ही फेंक दिया जाए। आप सुविज्ञ हैं, मेरे कहने का आशय समझ गये होंगे।’ व्यक्ति को समझ आ गया कि जब तक जान है, जीने का उत्साह बने रहना चाहिए। मानव जीवन दुर्लभ है और उसने आत्महत्या का विचार त्याग दिया। प्रस्तुति : शशि सिंघल


Comments Off on एकदा
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
Both comments and pings are currently closed.

Comments are closed.

Manav Mangal Smart School
Powered by : Mediology Software Pvt Ltd.