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एकदा

Posted On October - 9 - 2019

अपनों से हार-जीत

रावण जब रणभूमि में अंतिम सांसें ले रहा था, तब उसने श्रीराम से कहा—राम, मैं तुमसे हर बात में श्रेष्ठ हूं। जाति, मेरी ब्राह्मण है। आयु में भी तुमसे बड़ा हूं। मेरा, कुटुम्ब तुम्हारे कुटुम्ब से बड़ा है। मेरा वैभव तुमसे अधिक है। तुम्हारा महल, स्वर्ण जड़ित है परन्तु मेरी पूरी लंका ही, स्वर्ण नगरी है। मैं बल और पराक्रम में भी तुमसे श्रेष्ठ हूं। मेरा राज्य तुम्हारे राज्य से बड़ा है। ज्ञान और तपस्या में तुमसे श्रेष्ठ हूं। इतनी श्रेष्ठताओं के होने पर भी रणभूमि में मैं तुमसे परास्त हो, जानते हो क्यों? सिर्फ इसलिये कि तुम्हारा भाई तुम्हारे साथ है, और मेरा भाई मेरे खिलाफ।

प्रस्तुति : सुभाष बुड़ावनवाला


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