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एकदा

Posted On October - 8 - 2019

बिखराव से बंधन

एक बार बोधिसत्व ने बटेर बनकर जन्म लिया और अन्य बटेरों के साथ वन में रहने लगे। वन में एक शिकारी आता और बटेरों जैसी आवाज़ निकालकर सभी बटेरों को एकत्र कर लेता। फिर उस झुंड पर जाल डालकर उन्हें फंसाता और बाजार में बेचकर अपनी जीविका चलाता था। एक दिन बोधि ने सबको बुलाकर कहा—इस तरह तो हमारी जाति ही समाप्त हो जाएगी। आगे से शिकारी जब जाल फेंके, तुम उसकी गांठों को कसकर पकड़ना और जाल लेकर उड़ जाना। फिर किसी झाड़ी पर उतरकर, नीचे से निकलकर अपनी प्राण रक्षा करना। अगली बार बटेरों ने ऐसा ही करके अपनी जान बचाई और शिकारी हाथ मलता रह गया। रोज-रोज उसको खाली हाथ आता देखकर उसकी पत्नी ने सुझाया—तुम उनमें किसी तरह फूट पैदा कर दो, वे तभी फंसेंगे। अगली बार शिकारी ने जाल फेंकने के बाद उन पर दाने भी फेंके, जिससे वह एक-दूसरे को लांघने लगे। इस कूदा फांदी में उनमें संघर्ष शुरू हो गया और वह एक-दूसरे पर आरोप भी लगाने लगे— तू तो ऐसे कर रहा है जैसे सारा जाल तू ही उठाता हो। इस बार जाल तू ही उठाना। इस तरह उनमें दो गुट बन गए। वे सब बोधि की शिक्षा भूल गए। शिकारी ने जाल उठाना शुरू किया तो सब आसानी से उसकी पकड़ में आ गए। आपसी फूट के कारण शिकारी को फिर से ढेर सारे बटेर रोज मिलने लगे।

प्रस्तुति : मुकेश कुमार जैन


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