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अविस्मरणीय यादें

Posted On October - 6 - 2019

स्कूल में पहला दिन

शोभा गोयल
जीवन की अविस्मरणीय यादों में एक होती है स्कूल में पहले दिन की याद। उस जमाने में 5-6 साल के बच्चे को प्रथम कक्षा में एडमिशन मिलता था। पहले दिन मेरी मम्मी मुझे स्कूल छोड़ कर चली गयी। पहला दिन और अजनबी स्कूल में अजनबी बच्चे। एक कमरे में हमें छोटी-छोटी दरियों पर बिठाया गया।
थोड़ी देर में एक सूती साड़ी पहने हुए आंखों पर चोकोर चश्मा लगाये हुए एक महिला आयी। इन्हें हमें बहनजी कहने को कहा गया। बहनजी एक रजिस्टर में से सबके नाम बोलने लगी। जब सबके नाम हो चुके तब उन्होंने पूछा कि किसी का नाम रह तो नहीं गया। मैंने हाथ उठाया। तब उन्होंने मुझे उनके पास जाकर अपना नाम बताने को कहा। मैं जैसे ही आगे निकलने लगी तभी एक बच्चे के हाथ पर मेरा पैर पड़ गया। उस बच्चे ने जमीन पर हाथ टिका रखे थे। वह जोर से चिल्लाया।
मैं बहनजी के पास पहुंची तो उन्होंने नाम पूछने के साथ ही मुझे डांटना शुरू कर दिया कि तुम देख कर नहीं चल सकती। मैंने ओम शांति कहा तो वे और गुस्से में उबल गयी। उन्होंने मुझे कक्षा से बाहर भेज दिया। मुझे समझ नहीं आया। मेरी दादीजी जब कोई व्यक्ति गुस्से में होता है तो उन्हें ओम शांति कहती ताकि वो गुस्सा न करे और शांत हो जाये। यही मैंने किया था। कुछ देर में स्कूल की छुट्टी हो गयी। तब एक बच्चे ने बताया कि बहनजी का नाम शांति है। तब मैं उनके गुस्से का मतलब समझ पायी और मेरी हंसी रोके न रुकी।


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