पराली से धुआं नहीं अब बिजली बनेगी !    विवाद : पत्नी को पीट कर मार डाला !    हरियाणा : कांग्रेस पहुंची चुनाव आयोग !    बाबर की ऐतिहासिक भूल सुधारने की जरूरत : हिन्दू पक्ष !    आतंकियों की घुसपैठ कराने की कोशिश में पाकिस्तान !    आस्ट्रेलियाई महिला टी20 टीम को पुरुष टीम के बराबर मिलेगी इनामी राशि !    पनामा लीक : दिल्ली हाईकोर्ट ने मांगी स्टेटस रिपोर्ट !    हादसे में परिवार के 3 सदस्यों समेत 5 की मौत !    पुलिस स्टेट नहीं बन रहा हांगकांग : कैरी लैम !    प्रदर्शन के बाद खाताधारक की हार्ट अटैक से मौत !    

अपनी-अपनी सुविधाओं के बापू

Posted On October - 11 - 2019

अरुण अर्णव खरे

बापू हम आपकी 150वीं सालगिरह मना रहे हैं इस साल। पहले भी मनाते रहे हैं और आगे भी मनाते रहेंगे। मनाना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि दुनिया को दिखाने के लिए आपसे बड़ा कोई चेहरा फिलहाल हमारे पास नहीं है। सो पिछले सालों की तरह इस साल भी मना रहे हैं। आपका चेहरा सामने रखकर हम आसानी से दुनिया को अपने शांतिप्रिय होने का भरोसा दिलाने में सफल हो जाते हैं।
बापू आप तो महान हैं। आपको क्या फर्क पड़ता है इन बातों से, हम मन से मनाएं या मजबूरी में। हम न भी मनाएंगे तो दुनिया तो आपको आपके कामों के लिए याद करती ही है और करती रहेगी। बस यही हमारी मजबूरी है बापू, हम आपके लिए भले ही न मनाएं पर दुनिया में अपनी लाज रखने के लिए हम मनाएंगे। आप तो जानते ही हैं बापू हमारी मजबूरी को।
गांधी होने से अच्छा और सुविधाजनक बापू आपको याद करते रहना है, जो हम साल में दो बार बिना नागा करते हैं। आपके जन्मदिन और निर्वाण दिवस के आगे अथवा पीछे शनिवार और रविवार आ जाए तो कहना ही क्या, हममें से अधिकांश आपको याद करते हुए लांग वीकेंड की पिकनिक पर निकल लेते हैं। बापू आपको तो हम याद करते ही हैं, आपके प्रतीकों को भी हमने काम पर लगा रखा है। आप जिस चश्मे से सबको समभाव से देखने के आदि थे उसे हमने सफाई में लगा दिया है। चरखा आजकल काम का रहा नहीं, फिर भी हम उसे फिल्मी गीतों और कैलेण्डर में गाहे-बगाहे स्थान देते रहते हैं।
आपकी लाठी भी हमने रक्षकों के हाथ में थमा दी है जो बिना भेदभाव इसका भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं। आपके तीनों बंदर भी हमारे बहुत काम आ रहे हैं। हमने जनता को उन्हीं की तरह निरीह बना दिया है। जनता न सच देखने के काबिल रही न बोलने के। उसके सुनने का अधिकार हमने नहीं छीना है, केवल उस बंदर के कान उमेठे हैं।
बापू केवल सत्य के प्रयोग हम नहीं कर पा रहे हैं और आपके अहिंसा के सिद्धांत हमें रास नहीं आ रहे हैं। दरअसल हमें लगता है, जो सत्य है उसका प्रयोग क्या करना, इसलिए हम झूठ को सच में बदलने का प्रयोग कर रहे हैं। सच और झूठ एक सिक्के के दो पहलू हैं। आपने एक पहलू को देखा, अब हम उसका दूसरा पहलू देख रहे हैं और सिक्के को पूर्णता दे रहे हैं। रही अहिंसा की बात, तो हम सदा अहिंसा की ही बात करते हैं, अशोक और बुद्ध को भी इस सिलसिले में याद करने लगे हैं। मानवता की रक्षा के लिए जिस तरह मानव या महामानव होना जरूरी है बापू, उसी तरह पशुधन की रक्षा के लिए थोड़ा पशु होना भी जरूरी है।
आपके जाने के बाद चौथी पीढ़ी आ गई है, देश में और जब हम उनको आपके सिद्धांतों के बारे में बताते हैं तो वह घोर विस्मय से मुंह देखती है। हमें आपकी बहुत याद आती है बापू और अब तो आपकी जरूरत भी महसूस होने लगी है।


Comments Off on अपनी-अपनी सुविधाओं के बापू
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
Both comments and pings are currently closed.

Comments are closed.

Powered by : Mediology Software Pvt Ltd.