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33 साल बाद निपटा तलाक का मामला

Posted On September - 10 - 2019

मानस दासगुप्ता
अहमदाबाद, 9 सितंबर
गुजरात हाईकोर्ट में तलाक के एक मामले और दूसरी शादी से हुए 3 बच्चों के कानूनी हक पर फैसला आने में 28 साल लग गये। इंश्योरेंस कंपनी से रिटायर हो चुके व्यक्ति को इस फैसले के तहत अब अपनी तलाकशुदा पत्नी को 17 लाख रुपये देने होंगे। अब 65 साल के हो चुके धन्जीभाई परमार ने 1978 में इंदिराबेन से शादी की थी। पांच साल की शादी के दौरान उनका एक बेटा हुआ, लेकिन इसके बाद रिश्ते में कड़वाहट आने पर धन्जीभाई ने 1986 में सिटी सिविल कोर्ट में तलाक की याचिका दायर कर दी। इस बीच, इंदिराबेन ने ‘घरेलु हिंसा’ के चलते घर छोड़ दिया। वह सुनवाई के लिए नहीं पहुंची, तो अदालत ने फरवरी 1988 में धन्जीभाई का एकपक्षीय तलाक मंजूर कर दिया। इसके एक महीने के भीतर ही धन्जीभाई ने रमीलाबेन से शादी कर ली। वहीं, 7 महीने बाद इंदिराबेन ने तलाक को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी। केस दोबारा खुला। इस दौरान धन्जीभाई 3 और बच्चों के पिता बन गये।
साल 1991 में सिटी सिविल कोर्ट ने अपना फैसला बदलते हुए उनका तलाक रद्द कर दिया, जिससे धन्जीभाई की दूसरी पत्नी और 3 बच्चों की कानूनी वैधता पर सवालिया निशान लग गया। धन्जीभाई हाईकोर्ट पहुंचे। उनका केस पिछले हफ्ते तक पेडिंग रहा। आखिरकार जब केस सुनवाई के लिए आया तो अदालत ने माना कि इतने वर्षों बाद तलाक की कानूनी वैधता परखने के कोई मायने नहीं होंगे।
रजामंदी से मामला निपटाने की अदालत की राय मानते हुए इंदिरबेन केस न लड़ने पर सहमत हो गयीं, इसके एवज में उन्होंने मकान खरीदने के लिए 17 लाख रुपये की मांग रखी।


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