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हिंदी मन को भाये

Posted On September - 15 - 2019

बाल कविता

अंग्रेजी विदेशी भाषा,
मुझको रास ना आये।
गणित के गुणा-भाग से,
सिर मेरा चकराए।
इतिहास सदा हमसे,
गड़े मुर्दे उखड़वाये।
विज्ञान निज प्रयोगों से,
मेरे भेजे को खाये।
संस्कृत है वैदिक भाषा,
जननी हिंदी की कहलाये।
हिंदी हमारी मातृभाषा,
हिंदी मन को भाये।
भूप सिंह ‘भारती’


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