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हिंदी फीचर फिल्म : फूल और पत्थर

Posted On September - 14 - 2019

शारा

जिस तरह फिल्म ‘आराधना’ ने राजेश खन्ना को रातोंरात सुपरस्टार बना दिया था, वैसे ही ‘फूल और पत्थर’ फिल्म ने धर्मेंद्र को ही-मैन के रूप में लोकप्रियता दिलायी। यह फिल्म 1966 में रिलीज हुई थी। ओ.पी. रल्हन की इस फिल्म ने उस वक्त ही बॉक्स ऑफिस पर 17 करोड़ रुपये की कमाई की थी। धर्मेंद्र के शारीरिक सौष्ठव का जलवा दर्शकों के दिलोदिमाग पर इतना चढ़कर बोला कि विदेशों में भी इस फिल्म ने खूब विदेशी मुद्रा अर्जित की। खासकर तब जब फिल्म में धर्मेंद्र अपनी शर्ट उतारता है। धर्मेंद्र युवा वर्ग के लिए तब सलमान खान बन गये थे। इस फिल्म ने सबसे ज्यादा कमाई रूसी देशों में, फिर अमेरिका में की। अकेले सोवियत यूनियन में ही 464 लाख रुपये की टिकटें बिकीं। राजकपूर की फिल्मों के बाद यह सबसे बड़ी हिट थी। उस साल धर्मेंद्र अपने रोल के लिए सर्वोत्तम अभिनेता के तौर पर फिल्म फेयर पुरस्कार हेतु भी नामांकित हुए थे लेकिन फिल्म ‘गाइड’ में बेहतरीन अभिनय के लिए यह पुरस्कार देवानंद की झोली में गया। हालांकि, फिल्म में धर्मेंद्र ने कोई भी गीत नहीं गाया तथा हीरो के तौर पर उनकी एक्टिंग का हर कोई दीवाना बन गया था। हालांकि, यह एक ऐसा दौर था कि हीरो को गीत गाना जरूर आना चाहिए। इस फिल्म ने ही धर्मेंद्र के साथ मीना कुमारी की फिल्मी जोड़ी को बाकी फिल्मों ‘बहारों की मंज़िल’, ‘चंदन का पालना’, ‘मझली दीदी’ आदि के लिए रास्ते खोले। इसी फिल्म के बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं। शुरू में ओ.पी. रल्हन इस रोल के लिए सुनील दत्त को लेना चाहते थे और धर्मेंद्र के प्रति जगजाहिर निर्देशक के व्यवहार ने उन्हें फिल्म को बीच में छोड़ने के लिए विवश कर दिया। लेकिन हालात कुछ ऐसे बने कि धर्मेंद्र वापस लौट आये। इस फिल्म को बाद में एम.जी. रामचंद्रन के साथ तमिल में ‘ओलिविलाकू’ के नाम से बनाया गया। तेलुगू में एन.टी. रामाराव के साथ फिर इसे मलयालम में भी बनाया गया। इतनी भाषाओं में निर्माण होना फिल्म की कामयाबी का सबसे बड़ा पैमाना कहा जा सकता है। इस फिल्म के बेहतर कला निर्देशन के लिए शांतिदास को तथा बेहतर संपादन के लिए वसन्त बोर्कर को फिल्मफेयर का सर्वोत्तम पुरस्कार मिला। धर्मेंद्र, मीना कुमारी और शशिकला क्रमश: सर्वोत्तम अभिनेता, अभिनेत्री तथा स्पोर्टिंग एक्ट्रेस के लिए नामांकित हुए। रवि द्वारा दिए गए संगीत और आशा भोसले के गीत दर्शकों और श्रोताओं की जुबान पर खूब चढ़े। इस फिल्म में सड़कराम जो गुंडा बना है, वह ओ.पी. रल्हन ही हैं। ओ.पी. रल्हन के बारे में बताते चलें कि उन्होंने ‘तलाश’, ‘बंधे हाथ’, ‘हलचल’, ‘गहरा दाग’ जैसी फिल्में बनाई थीं और उनकी शादी राजेंद्र कुमार की बहन मनोरमा से हुई थी। भैरों नामक कुत्ते ने दर्शकों की काफी वाहवाही लूटी। जीवन के सरोकारों से जुड़ी इस फिल्म में भी मीना कुमारी ने वैसा ही रोल किया है जैसे किरदारों के लिए वे जानी जाती हैं। पत्थर जैसे इनसान के दिल में प्रेम-रस का संचार करना, उसकी देखभाल, फिक्र करना—यही सब है इस फिल्म में। गोल्डन जुबली हिट इस फिल्म में शाका (धर्मेंद्र) बना है। हालात ने उसे अपराधी बना दिया है। जब शहर में प्लेग का रोग फैलता है तो लोग घर-बार छोड़कर भागते हैं लेकिन शाका ऐसे में किसी आलीशान बंगले में लूटमार करने की गरज से दाखिल होता है। जहां उसे बीमार कराहती हुई घर की बहू शांति (मीना कुमारी) मिलती है, जिसे उसके ससुराल वाले इस हालत में छोड़ गए हैं ताकि वह मर जाये। शाका उसकी देखभाल करता है, उसकी दवा-दारू करता है कि वह ठीक हो जाती है। शहर में प्लेग का प्रकोप खत्म होने पर शांति के ससुराल वाले भी वापस घर लौटते हैं। वे शांति को जिंदा देखकर हैरान व दुखी हो जाते हैं। शांति के देवर के हाथों से पिटने के बाद शाका फिर सीन में आ जाता है और शांति को अपने घर ले आता है, जहां शाका के पड़ोसी उनको गलत निगाह से देखते हैं, फिर दोस्ताना हो जाते हैं। शांति शाका को सुधारने की कोशिश करती है, जिसमें पड़ोसी सहयोग देते हैं। उधर, जब शांति के ससुराल वालों को वकील के जरिए पता चलता है कि शांति के नाम लाखों की जायदाद है तो वे उसे मनाने आते हैं। शाका का अतीत उसके वर्तमान में आड़े आता है। अपराध जगत से जुड़े उसके साथी उसे नहीं छोड़ते। लिहाजा शांति भी फंस जाती है। शाका उनसे कैसे निपटता है, उसका कुत्ता क्या-क्या करता है, धर्मेंद्र के मुक्के की आवाज कैसी है? यह सब फिल्म देखने पर ही पता चलेगा।

गीत
लाई है हजारों रंग होली पे : आशा भोसले
शीशे से पी पैमाने से पी : आशा भोसले
जिंदगी से प्यार करना सीख : आशा भोसले
मेरे दिल के अंदर : मोहम्मद रफी
सुन ले पुकार आई : आशा भोसले
तुम कौन : मोहम्मद रफी
निर्माण टीम
प्रोड्यूसर एवं निर्देशक : ओ.पी. रल्हन
मूलकथा : अख्तर-उल-रहमान
पटकथा : ओ.पी. रल्हन
संवाद : एहसान रिज़्वी

संगीतकार : रवि
गीतकार : शकील बदायूंनी
सिनेमैटोग्राफी : नारीमन ईरानी
सितारे : धर्मेंद्र, मीना कुमारी, शशिकला, ओ.पी. रल्हन, ललिता पवार, लीला चिटनिस आदि।


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