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सिल्वर स्क्रीन

Posted On September - 21 - 2019

ए. चक्रवर्ती

पुरानी बातों से अर्जुन को परहेज़
अभिनेता अर्जुन रामपाल इन दिनों काफी खुश हैं। अपनी विदेशी गर्लफ्रेंड गैबरिला और पुत्र अरीक के साथ वह एक नई जिंदगी जी रहे हैं। पत्नी मेहर जेसिया से उनका अलगाव हो चुका है। पर अपनी दो बेटियों के संपर्क में वह लगातार रहते हैं। बहुमुखी प्रतिभा के धनी अर्जुन मूलतः माॅडलिंग की देन हैं। कभी वे आला दर्जे के माॅडल थे। अब 46 की इस उम्र में भी माॅडलिंग को लेकर सक्रिय हैं। जहां तक फिल्मों का सवाल है, इस समय उनके पास न के बराबर फिल्में हैं। कुछ माह पहले खत्म हुई वेब सीरीज़ द फाइनल काॅल में कैप्टन करण सचदेव के उनके किरदार को खूब पसंद किया गया था। माध्यम कुछ भी हो, अर्जुन अब कुछ ऐसे दमदार किरदार करना चाहते हैं। कहानी-2 में उन्हें एक हैंडसम इंस्पेक्टर के रोल में काफी पसंद किया गया था। वह बताते हैं, ‘आगे भी पुलिस ऑफिसर का ऐसा रोल आता है तो मैं बहुत शौक से करूंगा। खास तौर से मेरी महिला प्रशंसक मुझे इस तरह के हैडसम इंस्पेक्टर के रोल में बहुत पसंद करती हैं। फिर थाने में हैंडसम इंस्पेक्टर हो ही सकते हैं। पर मेरी एक मुश्किल है, उम्र बढ़ रही है तो यह तो नहीं कह सकता हूं कि उम्र घट रही है। खैर अब भी महिलाओं का साथ पसंद है। ऊपरवाले ने मुझे खूबसूरत बनाया है तो महिला फैन रहना नेचुरल है। उनके साथ गप्पे मारना अच्छा ही लगता है। आई हैव नो कंप्लेन्स…’
लिज़ा रे का बंगाल प्रेम……
चर्चित माॅडल और अभिनेत्री लिज़ा रे अभी कुछ दिनों पहले अपने एक टीवी शो के लिए भारत आई थी। उन्होंने कई साल पहले कैंसर जैसी बड़ी बीमारी को परास्त कर सबके सामने एक उदाहरण पेश किया था। अब वह अपने अंग्रेजी टीवी शो या माॅडलिंग को लेकर कुछ-न-कुछ करती रहती हैं। अभी कुछ माह पहले उन्होंने एमेज़न प्राइम ओरिजिनल के लिए टीवी सीरीज़ ‘फोर मोर शाॅट’ प्लीज में काम किया था। इन दिनों भी वह कुछेक टीवी शो को लेकर व्यस्त हैं। मूलतः कनाडावासी लिज़ा का बंगाली संस्कृति के प्रति एक खास लगाव है। इसलिए भारत आने पर वह कोलकाता जाना कभी नहीं भूलती हैं। वह इसकी वजह बताती है, ‘मेरे पिता बंगभाषी हैं। इसलिए बाई-हार्ट मैं भी कंप्लीट बंगाली हूं। मेरी मां पौलेंड की है, पर बचपन से ही मुझ पर पापा का प्रभाव कुछ ज्यादा था। अभी भी कोलकाता के श्याम बाज़ार में हमारा पुश्तैनी मकान मौजूद है। पापा यहां नियमित रूप से आते हैं। मैं भी मौका मिलने पर वहां जाती हूं। असल में इस पुश्तैनी मकान के साथ बचपन की कई मधुर स्मृतियां जुड़ी हुई हैं। छत पर खड़े होकर पड़ोसियों काे पंतग उड़ाना देखना, मोहल्ले के बच्चों के साथ चाट-पकौड़ी खाना, राॅक पर बैठकर मिट्टी के कुल्हड़ में चाय की चुस्की लेना…ये सब बातें आज भी अच्छी तरह से याद आती हैं। सबसे अच्छा यह लगता है कि हमारी जिंदगी में इन वर्षों में इतने बदलाव आए पर श्याम बाजार मोहल्ला वैसा ही रह गया है। आज भी वहा जाने पर बचपन के उसी रोमांच को महसूस करती हूं।’
आलिया की नाराज़गी…
26 की हो चुकी अभिनेत्री आलिया भट्ट में एक मैच्योरिटी तो आनी ही थी। इन दिनों वह अफेयर और करियर दोनों ही ट्रैक पर बेहद संजीदा चल रही हैं। अभिनेता रणबीर कपूर से उनका एक साल से ज्यादा पुराना रिश्ता तेजी से स्थायित्व की ओर बढ़ रहा है। और जहां तक करियर का सवाल है, वह बहुत गंभीर होकर फिल्में कर रही हैं। अब वह अपने पिता महेश भट्ट की सड़क के रीमेक ‘सड़क-2’ को लेकर पूरी तरह से मशगूल हैं। दूसरी ओर राजमौली की तेलुगू में बनने वाली फिल्म आरआरआर की वह लीड एक्ट्रेस हैं। इसमें तेलुुगू फिल्मों के सुपरस्टार रामचरण और एनटी रामाराव जूनियर के अलावा हिंदी फिल्मों के सुपर अजय देवगन भी एक अहम रोल कर रहे हैं। उनकी भव्य फिल्म ब्रह्मास्त्र संभवतः इसी साल रिलीज होगी। वैसे ‘सड़क-2’ को लेकर आलिया कुछ ज्यादा ही गंभीर हैं। इसमें कुछ गलत भी नहीं है। अब भी ढेर सारे लोगों का मानना है कि उनकी सफलता में भट्ट परिवार का बड़ा योगदान रहा है। एक संक्षिप्त मुलाकात में इस तरह का सवाल पूछने पर वह लगभग बिफर पड़ती हैं, ‘यह बहुत गलत सोच है। मैं ऐसे सवालों को हंसकर टाल देती हूं।’
प्रियंका की अनकही बातें
अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने फिर से बाॅलीवुड की फिल्मों में काम करने का मन बना लिया है। जल्द ही उनकी नई फिल्म की घोषणा होगी। शायद बहुत कम लोगों को पता हो कि प्रियंका ने कभी भी बाॅलीवुड में आने का सपना नहीं बुना था। असल में वह बचपन से ही एक इंजीनियर बनना चाहती थीं। फिर मन बदला तो क्रिमिनल साइकॉलोजिस्ट बनना चाहा। यदि वह मिस वर्ल्ड न बनती तो संभवत: यही बनती। वह मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग कभी भी मिस नहीं करती। उनका खानपान बहुत सादा है। यह देसी गर्ल आज भी मां मधु चोपड़ा के हाथ की खिचड़ी और अचार खाना सबसे ज्यादा पसंद करती हैं। दूसरी ओर वह मिठाई खाना बहुत पसंद करती हंै, इसलिए उनके बैग में चाॅकलेट ज़रूर होती है। जहां तक उनके निजी जीवन का सवाल है, कभी हाॅलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता जेरार्ड बटलर ने पूरी शिद्दत से प्रियंका को अपनी पत्नी बनाना चाहा था लेकिन प्रियंका ने उन्हें दोस्त से ज्यादा कभी कुछ नहीं समझा।
भूमि के साहस का जवाब नहीं
भूमि के साहस का कोई जवाब नहीं। अपनी पहली फिल्म में ही उन्होंने फिल्म के किरदार की खातिर अपना वज़न पूरे तीस किलो बढ़ा लिया था। फिर वह पूरे मोटापे के साथ दम लगा के हइसा में नज़र आई थी। इसके बाद अपनी अगली फिल्म के लिए एक चैलेंज लेते हुए अपने वज़न को काफी घटा कर सबको चौंका दिया। अब फिर यह सुनने को मिल रहा है कि वह अपनी अगली किसी फिल्म के लिए वज़न बढ़ा रही हैं। वाकई में भूमि के इस आत्मबल और साहस का जवाब नहीं। भूमि इस समय ‘सांड की आंख’, ‘भूत-वन’, ‘द हंटेड शिप’,‘बाला’,‘पति पत्नी और वह’ जैसी कई फिल्मों को लेकर व्यस्त हैं। उनकी फिल्म सांड की आंख जल्द रिलीज़ होगी। वह बताती हैं, ‘देखिए, यदि आपको एक्टिंग करनी है तो इस तरह के साहस का सामना तो आपको गाह-बगाहे करना ही पड़ेगा।’
राव की निराली बातें…
वह जिस तरह की फिल्में करते हैं, उनका हश्र अमूमन बुरा ही होता है। इसमें कोई शक नहीं है कि अलग तरह के फिल्म मेकर्स के बीच वह खासे लोकप्रिय हैं। पर 2017 की ‘न्यूटन’ के बाद से उनकी ऐसी फिल्में दर्शकों के बीच कुछ ज़मीन नहीं बना पा रही हैं। इसके बाद से उनकी लगभग आधा दर्जन ऐसी फिल्में बाक्स आॅफिस पर बलि चढ़ चुकी हैं। इस साल ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’ के बाद उनकी फिल्म ‘जजमेंटल है क्या’ की हालत बहुत ही पस्त रही। ‘जजमेंटल है क्या’ में तो कंगना रनौत जैसी बड़ी हीरोइन का साथ भी उनके कुछ काम नहीं आया। वैसे इस समय भी वह तुर्रम खान, रूह आफ्जा, मेड इन चाइना जैसी चार-पांच फिल्मों को लेकर व्यस्त हैं। लेकिन आयुष्मान खुराना, कार्तिक आर्यन आदि हीरो की धमाकेदार एंट्री से उन्हें बड़ी चुनौती मिल रही है। बावजूद इसके उनका अपना एक स्टाइल है।
नाॅनवेज खाना उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं है। उनके इस शााकाहारी प्रेम के चलते ही 2017 में पेटा की तरफ से उन्हें हाॅटेस्ट वेजिटेरियन सेलिब्रिटी के तौर पर मनोनीत किया गया था।

कई पड़ाव पार कर चुके हैं जिमी
जिमी हिंदी और पंजाबी फिल्मों को लेकर लगातार सक्रिय हैं। उनकी पिछली फिल्म ‘जजमेंटल है क्या’ बॉक्स ऑफिस में एक बुरी दास्तां बन चुकी है। अब वह जल्द ‘पी से प्यार’, ‘एफ से फरार’ में नज़र आएंगे। यही नहीं, 2005 से पंजाबी फिल्मों में भी उनकी जबरदस्त एंट्री हुई है। लगभग हर साल वह एक पंजाबी फिल्म ज़रूर करते हैं। इसके साथ ही पंजाबी की तीन-चार फिल्मों का उन्होंने निर्माण भी किया है। 1996 में अपनी पहली फिल्म ‘माचिस’ के बाद से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अब तक पचास से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके जिमी के पास ‘मोहब्बतें’, ‘दिल है तुम्हारा’, ‘हासिल’, ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’, ‘स्पेशल 26’,‘तनु वेड्स मनु’ जैसी एक दर्जन से ज्यादा ऐसी फिल्में हैं, जिनमें वे बेहद सशक्त अभिनेता के तौर पर सामने आते हैं। खासतौर से पुलिसिया किरदार उन पर खूब फबता है। वह कहते हैं, ‘करेक्टर में दम हो तो मैं ऐसे रोल और कई बार करने के लिए तैयार हूं। असल में पुलिसिया जिंदगी के ढेरों रंग हैं। आप ‘ए वेडनसडे’ के पुलिस इंस्पेक्टर और ‘स्पेशल 26’ के पुलिस के मेरे रोल के बीच एक बड़ा फर्क साफ महसूस कर सकते हैं।’ उन्होंने माचिस से लेकर ‘जजमेंटल है क्या’ तक अभिनय का एक लंबा पड़ाव तय किया है। उनकी अभिनय क्षमता का सबसे मजबूत पक्ष यह है कि उन्होंने छोटे-छोटे किरदारों में एक नया रंग भरा है। वह बताते हैं-माचिस जैसी उम्दा फिल्म में काम करने से पहले मैंने चौदह फिल्मों में काम किया था। फिर ‘तनु वेड्स मनु’, ‘ए वेडनेसडे’,‘स्पेशल 26’ जैसे कई फिल्में अच्छा पड़ाव बनीं।’


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