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समंदर के दिल में बसा : सेन्ट माइकल माउंट

Posted On September - 28 - 2019

सीमा आनन्द चोपड़ा
इंग्लैंड के समुद्र तटीय नगर सेन्ट आईवस से माराजियोन नगर और समुद्र तल पर पैदल मार्ग से चल कर दूर पहाड़ी पर स्थित सेन्ट माइकल माउंट तक का सफर बेहद रोमांचक अनुभव था। कार पार्किंग से विशाल समुद्र का अनोखा नज़ारा दिख रहा था- लो टाइड में मानव निर्मित ग्रेनाइट पत्थरों का मार्ग स्पष्ट दिख रहा था जो समुद्र तल पर था और कई सौ पर्यटक इस पर आ जा रहे थे। यह मार्ग दूर सेन्ट माइकल माउंट (पहाड़ी टापू) तक जा रहा था जिसके शीर्ष पर मुकुट समान कासल (किला) सजा था। चलते-चलते हम इस मार्ग पर पहुंचे जिस पर ताजे हरे सी बीड (समुद्री पौधे) बिखरे थे और पैरों को छूकर निकल रही थीं, गुदगुदाती लहरें। लो-टाइड के कारण यह लहरें हमें केवल रोमांचित कर रही थीं, बस छूकर निकल रही थीं। ‘सी द सी’ करते हुए ‘सी-वॉक’ करना एक उल्लासपूर्ण अनुभव था।
दोपहर हो चली थी और हमें हाई टाइड से पहले वापस लौटना था ताकि यह रास्ता फिर से समुद्र में न डूब जाए। ऐसी स्थिति में बोट से ही वापिस कार पार्किंग के निकट पहुंचा जा सकता है।
इतिहास और उसके पीछे
हमारी गाइड के अनुसार हरियाली भरे इस माउंट का नाम आर्च ऐन्जल (प्रधान देवदूत) सेन्ट माइकल के नाम से रखा गया है। बाईबल ग्रंथ अनुसार शैतान के आक्रमण पर प्रभु के देवदूतों की सेना का नेतृत्व सेन्ट माइकल ने किया था। 495 ए.डी. की एक कथा अनुसार भयंकर समुद्री तूफान में आर्च एेंजल सेन्ट माइकल ने मछुआरों को दर्शन दिए और सुरक्षित स्थल का मार्ग दिखाया था। इसकी आगे की शताब्दियों में भिक्षु एवं श्रद्धालु सेन्ट माइकल टापू पर तीर्थ के लिए आने लगे।
इतिहास के अनुसार सेन्ट माइकल माउंट फ्रांस के नोरमैन्डी क्षेत्र का भाग माना गया। सम्भवत: इसलिए यहां पर 8वीं से 11वीं शताब्दी के बीच नोरमैन ऐबी यानी ईसाई महामठ था। भूकंप से महामठ नष्ट हो गया और फिर सैकड़ों साल तक युद्ध, घेराबंदी और कलह का केन्द्र बना रहा। 17वीं शताब्दी में टापू को कर्नल ओबिन ने खरीद लिया और आज उनके वंशज, ब्रिटेन के नेशनल ट्रस्ट के सहयोग से पर्यटन स्थल के रूप में इसका संचालन कर रहे हैं।
स्थानीय कथाओं के अनुसार घने वृक्षों वाले जंगल के बीचो-बीच विशाल चट्टान-पहाड़ी थी जिस पर प्रलय के कारण जल भर गया था और वह डूब गई थी। रेडियो कार्बन डेटिंग की माने तो इस जगह पर 1700 बी.सी. के पेड़ों की लकड़ी पाई गई है।
आरोहण
सेंट माइकल माउंट पहाड़ी टापू तक पहुंच कर हमने पत्थरों से बने मार्ग पर चढ़ाई आरंभ की। इतिहास के पन्नों पर गौर करें तो न जाने कितने भिक्षु, तीर्थ यात्री एवं सैनिक इस मार्ग पर चले होंगे। नवीन पाषाण युग, मध्य पाषाण युग और फिर अनगिनत संख्या में मध्य कालीन युग में यहां बसने वाले लोग इसी मार्ग पर पैदल यात्रा करते रहे होंगे। यहां 1950 में प्राचीन ‘पिलग्रिम पाथ’ तीर्थ यात्रा मार्ग, पुन: खोजा गया जो पहाड़ी से ऊपर दुर्ग किले तक जाता है। ऐसे प्राचीन ऐतिहासिक मार्ग से होकर हम किले के द्वार तक पहुंचे। जिसने बीती शताब्दियों में अनेक रूप बदले।
पहाड़ी कासल
मध्यकालीन प्रवेश द्वार को पार कर हमने किले के प्रवेश हॉल का रुख किया। सर्वप्रथम हमारी दृष्टि सेन्ट ओबिन परिवार (जो किले के स्वामी हैं), के विशिष्ट कोर्ट ऑफ आर्म्स पर पड़ी (राज्य चिन्ह)। उसके पास ही कर्नल सेन्ट ओबिन का यात्रा सन्दूक सजा था, जिन्होंने 17वीं शताब्दी में यह कासल खरीद कर इसमें अपना घर बसाया। ब्रिटेन के सिविल वार के अन्त में उन्हें यहां शांति बरकरार रखने के लिए सेन्ट माइकल माउंट का गवर्नर बनाया गया था। यहां सर जॉन रूम से बाहर का विहंगम दृश्य अद्भुत अनुभव था। इसे सी व्यूह रूम कहते हैं। यहां प्रदर्शित टाइडल क्लॉक समुद्र में उठने वाले हाईटाइड को दर्शा रही थी।
लैदर कवर वाली लाईब्रेरी
इसके बाद हमने लैदर कवर वाली विशेष पुस्तकों की लाइब्रेरी में प्रवेश किया जो 1780 में बनाई गई परन्तु उसकी विशिष्टता यह थी कि वह 12वीं शताब्दी के महामठ का अंग रह चुकी थी। पुस्तकालय शतरंज एवं कार्डस गेम के लिए भी उपयोग किया जाता है।
ग्रेट डाइनिंग हॉल की सज्जा देख कर यह कल्पना तक करना कठिन था कि एक शताब्दी में यह साधारण, बिना सजावट वाला महामठ का डाइनिंग हॉल था। ऊपरी दीवारों पर प्लास्टर से बने शिकार दृश्य एवं वहां लगी 16वीं शताब्दी की स्टेन ग्लास खिड़कियां, अति दर्शनीय हैं। स्टेन ग्लास एक विशेष प्रक्रिया से निर्मित, महंगा रंगीन कांच है जिसे अधिकतर चर्च में धार्मिक दृश्य का मौसेक बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। महलों और किलों में भी इसे सज्जा के लिए प्रयोग किया जा सकता है।
इसके आगे स्मोकिंग रूम था जहां अनेक अनोखे सुंदर स्नफ बॉक्स का संग्रह था जिसके निकट तनजानिया के जनजीबार द्वीप से लाया मदर ऑफ पर्ल का मूल्यवान संदूक प्रदर्शित था।
इस कक्ष का मुख्य आकर्षण था-एक कांच की खिड़की पर खुदी तिथि। सेन्ट ओबिन परिवार की एक पुत्री ने यह निश्चित करने के लिए कि उसकी हीरे की सगाई-अंगूठी शुद्ध और वास्तविक है, अंगूठी से कांच पर यह तिथि खोद दी।
12वीं शताब्दी में बना चर्च
इसके बाद हमने 12वीं शताब्दी के चर्च में प्रवेश किया। यहां 500 वर्ष पुराने अलाबस्टर मैटीरियल की बाइबल चित्रों की नक्काशी भी दर्शनीय है। 15वीं शताब्दी के ईसा-मसीह के लालटेन-क्रॉस को देखना अद्भुत था।
भव्य ब्लू ड्राईंग रूम की दीवारें विश्व विख्यात पेन्टर आ-गेनस्बोरह एवं रेनोडस के चित्रों से सुसज्जित थी। सुंदर शैली में निर्मित विंडसर कुर्सियां देखते हुए हमें बताया गया कि ब्लू ड्राइंग रूम ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया के दौरों के लिए प्रसिद्ध है क्योंकि उन्हें यहां बैठ कर चाय पीना बेहद पसंद था। मैप रूम में लगे 16वीं शताब्दी के रहस्यमयी नक्शे ने हमारी उत्सुकता जगाई। उसमें पौराणिक कथा के अनुसार विशाल कोरनिश दैत्य से मिलने वाले स्थानों पर चिन्ह लगे थे।
इंग्लैंड के कार्नवाल क्षेत्र की लोक कथा अनुसार इस माउंट पर एक विशाल आतंकी दैत्य रहता था जिसे स्थानीय युवक ने मार गिराया और उसे ‘जैक द जाइन्ट किलर’ के नाम से सम्मानित किया गया जो नाम आज भी लोकप्रिय है। हमें बताया गया कि उसका पत्थर का दिल यहीं कहीं पत्थरों में दबा है जिन पर कान रख कर सुनने से दैत्य के दिल की धडक़न सुनाई देती है।
मैप रूम में शैम्पेन की बोतलों से बनाया गया है सेंट माइकल माउंट कासल का मॉडल । पास ही रखी मिस्र-इजिप्ट देश से लाई बिल्ली की ममी भी ध्यानाकर्षित करती है जिसकी सजीव आंखें मानों हम सब को देख रही थीं।
ऐतिहासिक गार्डन
कासल के बाहर 1780 में बने उत्तम गार्डन्स हैं जो रंगीन फूलों और अनोखे पौधों से भरे हैं । यह गार्डन पहाड़ी की ग्रेनाइट चट्टानों की ओर भी फैले हुए हैं। विकटोरियन उद्यान की टैरेस पर से हमने बड़ी हिम्मत दिखाकर, झांक कर गहरे समुद्र को निहारा। यहां आसपास के प्राकृतिक दृश्य अति मनमोहक हैं। गार्डनर ने हमें बताया कि यहां की पुरातत्व खुदाई में, कांस्य युग की अनेक कलाकृति पाई गई थीं। हमने देखा कि अनेक बच्चे, जिन्होंने चिल्ड्रन क्विज़ में भाग लिया था, सभी दिशाओं में सूत्र ढूंढ रहे थे। पर्यटकों को कासल में आने के लिए आकर्षित करने का यह उत्तम तरीका था जो भारत के पर्यटन स्थलों के लिए भी लाभकारी हो सकता है। माउंट के बेस पर नीचे पहुंच कर हम आइलैन्ड कैफे की ओर गए जहां स्वादिष्ट व्यंजन और कार्नवाल क्षेत्र की विशेष पारम्परिक आइसक्रीम और कोरनिश पेस्टी सर्व की जाती है। बाहर धूप में समुद्र का मनमोहक दृश्य देखते हुए हमने कोरनिश आइसक्रीम का आनंद लिया। गार्डन कैफे देख कर यह कल्पना करना कठिन था कि पूर्व शताब्दियों से यह कासल किले का लॉन्ड्री रूम रहा होगा।
घड़ी में समय देखकर याद आया कि इस समंदर की लो टाइड, समुद्र तल पर अब तक बन रही होंगी जो जल्द ही हाई टाइड का रूप ले लेंगी। इसी सोच के साथ हम जल्दी से दूसरे सिरे पर मेन लैन्ड की ओर चल दिए और माउंट सेन्ट माइकल को अलविदा कहा। समंदर के रास्ते सेंट माइकल माउंट तक पैदल चलने का उल्लास अनोखा है जिसकी बोट सवारी से कोई तुलना नहीं।


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